विश्वामित्र इंडिया परिवार का एमडी राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार
Updated at : 08 Dec 2019 2:29 AM (IST)
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देश के 13 राज्यों में लोगों को झांसा देकर जमा किये 2200 करोड़ रुपये कोलकाता : मोटे ब्याज और कम समय में जमाधन दोगुना करने का झांसा देकर सैकड़ों निवेशकों के करोड़ों रुपये ठगने वाली चिटफंड कंपनी विश्वामित्र इंडिया परिवार के एमडी मनोज कुमार कौशिक को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया है. शनिवार […]
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देश के 13 राज्यों में लोगों को झांसा देकर जमा किये 2200 करोड़ रुपये
कोलकाता : मोटे ब्याज और कम समय में जमाधन दोगुना करने का झांसा देकर सैकड़ों निवेशकों के करोड़ों रुपये ठगने वाली चिटफंड कंपनी विश्वामित्र इंडिया परिवार के एमडी मनोज कुमार कौशिक को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया है. शनिवार को उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया है.
पुलिस के अनुसार आरोपी मूलत: उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले के उरमा थानान्तर्गत यशवंतपुर व हाल में कोलकाता निवासी मनोज कुमार कौशिक पुत्र लक्ष्मीचंद है, जिस पर हिण्डौनसिटी मेंं भी अपनी कंपनी की शाखा खोल शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के करीब 500 से अधिक लोगों से धोखाधड़ी कर लगभग 10 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप है. पुलिस के अनुसार, आरोपी मनोज कुमार ने कोलकाता में विश्वामित्र इंडिया परिवार के नाम से चिटफंड कंपनी खोली थी.
इसके जरिये आमजन को पैसा दोगुना करने के नाम पर निवेश के लिए आमंत्रित किया. कंपनी ने 13 राज्यों में एजेंट नियुक्त किये. फिर इन एजेंट्स के जरिए देश भर के लोगों को अपने झांसे में फंसाकर करीब 2200 करोड़ रुपये एकत्रित किये. इस पैसे को रियल एस्टेट में निवेश किया गया. महानगर में हुए बहुचर्चित सारधा चिटफंड घोटाले के बाद विश्वामित्र इंडिया परिवार भी संकट में आ गया.
निवेशकों ने पैसा वापस मांगा तो कंपनी ने इनकार कर दिया. इस बीच कंपनी के खिलाफ कई राज्यों में धोखाधड़ी के केस दर्ज हुए. क्षेत्र के निवेशकों ने भी कोतवाली थाने पर कंपनी के एमडी व चेयरमैन मनोज कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, जिस पर उसे कोटा से गिरफ्तार कर लिया गया.
आरोपी ने माना : निवेशकों के 500 करोड़ रुपये वापस करने हैं
पुलिस हिरासत में विश्वामित्र इंडिया परिवार के एमडी ने बताया कि कोलकाता में हुए सारधा चिटफंड घोटाले के बाद वर्ष 2014 में उनकी कंपनी मुश्किल में आ गयी. पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा नया कानून पास करने के बाद सेबी व आरबीआइ की मंजूरी के बाद ही कंपनी की प्रॉपर्टी की बिक्री की जा सकती है. ऐसे में जब निवेशकों ने अपना पैसा वापस मांगा तो पश्चिम बंगाल सरकार का नया कानून आड़े आ गया और निवेशकों के पैसों से खरीदी गयी प्रॉपर्टी को बेच नहीं पाये. आरोपी ने माना कि उन्हें अभी निवेशकों के 500 करोड़ रुपये वापस करने है.
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