डेंगू के बाद अब मलेरिया से महानगर में एक की मौत
Author Prabhat khabar digital desk
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कोलकाता : मच्छर जनित बीमारियां पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है. इन बीमारियों में सबसे अधिक खतरा मलेरिया व डेंगू से है. हालांकि कोलकाता नगर निगम का दावा है कि महानगर पूरी तरह से मलेरिया मुक्त हो चुका है, लेकिन निगम के इन दावों से इतर डेंगू के मामले में जिस तरह से […]
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कोलकाता : मच्छर जनित बीमारियां पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है. इन बीमारियों में सबसे अधिक खतरा मलेरिया व डेंगू से है. हालांकि कोलकाता नगर निगम का दावा है कि महानगर पूरी तरह से मलेरिया मुक्त हो चुका है, लेकिन निगम के इन दावों से इतर डेंगू के मामले में जिस तरह से इस वर्ष निगम की पोल खुली उसी तरह मलेरिया को लेकर निगम के वायदे कागजी साबित हुए हैं.
ज्ञात हो कि अब तक महानगर डेंगू के प्रकोप से उभर भी नहीं पाया कि इसी बीच कोलकाता के 42 नंबर वार्ड में मलेरिया से एक व्यक्ति की मौत हुई है. मृत का नाम दिनेश साव (46) है. दिनेश महानगर 12 नंबर रुपचंद्र स्ट्रीट के निवासी थे. मृतक के परिवार के सदस्यों ने बताया कि दिनेश 26 नवंबर से बुखार से पीड़ित था. उसे इलाके लिए 26 नवंबर को ही मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी में भर्ती कराया गया था, लेकिन सेहत में गिरावट के कारण उन्हें सॉल्टलेक के एक निजी हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया.
उन्हें आइसीयू विभाग में रखा गया था. इलाज के दौरान शुक्रवार रात दिनेश की मौत हुई. अस्पताल की ओर से जारी डेथ सर्टिफिकेट सेप्सिस, मल्टी ऑर्गन फेल्योर सह मलेरिया को मौत का कारण बताया गया है. वार्ड पार्षद सुनीता झावर ने बताया कि बीमारी होने से दो दिन पहले दिनेश कोलकाता से बाहर गया था. पार्षद का दावा है कि पीड़ित बाहर से ही मलेरिया की चपेट में आया था.
विदित हो कि इस वर्ष का यह पहला मामला है कि जब महानगर में मलेरिया से किसी व्यक्ति की मौत हुई है. वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय मच्छर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) द्वारा जारी पिछले 14 वर्षों के आकंड़ों पर अगर गौर करें तो मलेरिया से देश में वर्ष 2001 में 1005, 2002 में 973, 2003 में 1006, 2004 में 949, 2005 में 963, 2006 में 1707, 2007 में 1311, 2008 में 1055, 2009 में 1144 और 2010 में 767 लोगों की जान गयी है.
वहीं डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार 2011 में 754, 2012 में 519, 2013 में 440 और 2014 में 535 लोगों की मौत हुई, जबकि केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 2017 में 62, 2016 में 59, 2014 में 62, 2013 में 17, 2012 में 30 व 2011 में 19 लोगों की मौत हुई थी. ऐसे में यह मच्छर जनित बीमारी देश के लिए खतरा है.
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