कक्षा एक से ही पास-फेल प्रणाली हो लागू : शिक्षक
Updated at : 30 Oct 2019 2:26 AM (IST)
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कोलकाता : केंद्र सरकार द्वारा गाइडलाइन जारी करने के बाद राज्य सरकार ने सभी स्कूलों में कक्षा 5वीं व 8वीं में पास-फेल प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया है. इसकी घोषणा के साथ ही यह निर्देश दिया कि यह प्रणाली 2020 से लागू होगी. इस फैसले को लेकर कई शिक्षक संगठन सहमत नहीं हैं. कुछ […]
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कोलकाता : केंद्र सरकार द्वारा गाइडलाइन जारी करने के बाद राज्य सरकार ने सभी स्कूलों में कक्षा 5वीं व 8वीं में पास-फेल प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया है. इसकी घोषणा के साथ ही यह निर्देश दिया कि यह प्रणाली 2020 से लागू होगी. इस फैसले को लेकर कई शिक्षक संगठन सहमत नहीं हैं. कुछ प्रतिनिधियों व हेडमास्टरों का कहना है कि पास-फेल प्रणाली कक्षा एक से ही शुरू होनी चाहिए.
बच्चे नहीं पढ़ रहे फिर भी पास घोषित हो जा रहे हैं, इससे उनकी नींव कमजोर हो रही है. पहले बेसिक शिक्षा को कक्षा प्रथम, द्वितीय, तृतीय व चौथी में ही सीखेंगे. प्रारम्भिक शिक्षा में वे कुछ सीख ही नहीं पाते हैं और उनको पास कर दिया जाता है, यह उचित नहीं है. इस विषय में सेकेंडरी टीचर्स एंड एम्पलाइज एसोसिएशन के महासचिव विश्वजीत मित्रा का कहना है कि क्लास में जो बच्चे गंभीरता से पढ़ते हैं या मेधावी हैं, वे तो अपनी मेहनत से पास होंगे लेकिन जो कमजोर हैं, उनको भी कक्षा 1 से लेकर 8वीं तक पास किया जाता है. राइट टू एजुकेशन एक्ट में ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ के जरिये अभी तक यही प्रणाली चली आयी है.
इसमें देखा जा रहा है कि बच्चों को बेसिक ज्ञान भी नहीं है. दूसरी व तीसरी कक्षा का बच्चा कुछ लिख ही नहीं पाता है, उसको अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता है. इससे न केवल उनकी नींव कमजोर हो रही है बल्कि उंची कक्षा में जाकर उनके अंदर पढ़ाई को लेकर एक फोबिया पनपने लगता है. कुछ बच्चे पढ़ाई के नाम पर डर जाते हैं. कक्षा 9वीं व 10वीं में बोर्ड परीक्षा से पहले उनके अंदर घबराहट व भय की स्थिति पैदा होने लगती है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य खराब हो जाता है, ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि उस बच्चे का परफॉरमेंस अच्छा न होने पर भी उसको रोका नहीं जाता, उसको अगली कक्षा में प्रमोट किया जाता है.
बेसिक शिक्षा व लर्निंग नहीं होने से वे आगे जाकर कुछ नहीं कर पाते हैं. इस पद्धति को बदलने की जरूरत है. अंग्रेजी मीडियम स्कूल की तरह अगर छोटी क्लास में भी बच्चा परीक्षा में अंक नहीं ला पा रहा है तो उसे फेल घोषित कर देना चाहिए. भले उसको सुधरने का एक और मौका दिया जाये या उसको फिर से परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाये. अभी तो गार्जियन भी जानते हैं कि बच्चे को स्कूल वाले तो वैसे ही पास कर देंगे, इसलिए गार्जियन भी ध्यान नहीं देते हैं.
इस विषय में हावड़ा शिक्षा निकेतन के हेडमास्टर अरविंद राय का कहना है कि पास-फेल प्रणाली हर कक्षा के लिए होनी चाहिए. बेसिक शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि सरकारी स्कूल का बच्चा सभी टेस्ट में पास हो जाये. ऐसी व्यवस्था करने के लिए स्कूल के शिक्षकों को भी परिश्रम करना होगा.
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