बंगाल : शक्ति की आराधना के लिए दक्षिणेश्वर मं‍दिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Updated at : 27 Oct 2019 6:54 PM (IST)
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बंगाल : शक्ति की आराधना के लिए दक्षिणेश्वर मं‍दिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

– मां काली के दर्शन को दूर-दूर से पहुंचे लोग, घंटों लाइन में लग श्रद्धालुओं ने की पूजा कोलकाता : दक्षिणेश्वर काली मंदिर की गणना न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे भारत के महानतम देवी तीर्थों में की जाती है. यह काली मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. कहते हैं इस […]

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– मां काली के दर्शन को दूर-दूर से पहुंचे लोग, घंटों लाइन में लग श्रद्धालुओं ने की पूजा

कोलकाता : दक्षिणेश्वर काली मंदिर की गणना न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे भारत के महानतम देवी तीर्थों में की जाती है. यह काली मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. कहते हैं इस जगह पर माता सती के दायें पैर की चार अंगुलियां गिरी थीं. दक्षिणेश्वर काली मंदिर को काली का दिव्य धाम भी कहा जाता है. पूरे विश्व में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है.

कालीपूजा के अवसर पर शक्ति की देवी के रूप में मां काली की अराधना को लेकर रविवार तड़के से ही मां काली की पूजा के लिए दक्षिणेश्वर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है. दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ हैं. घंटों कतार में खड़े रह कर श्रद्धालु मां काली की पूजा अर्चना कर रहे हैं.

हुगली नदी के तट पर स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर यह मुख्य रूप से बांग्ला भाषी लोगों के अध्यात्म का प्रमुख केंद्र माना जाता है. कालीपूजा के इस पावन अवसर पर बंगाल ही नहीं बल्कि हर कोने से लोग पहुंच रहे हैं. इस दिन खासकर बंगाली समुदाय के लोग हर साल की भांति इस बार भी अपनी दुकानों का हाल खाता का पूजा कराने मंदिर पहुंचे और हाथ में डाला-फूल माला लेकर लोगों ने मां की पूजा अर्चना की.

सुबह से लेकर देर शाम तक अधिकतर दुकान के व्यवसायी अपना-अपना हाल खाता लेकर पहुंचे. शाम सात बजे के बाद मां काली के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ शुरू हो जाती है. कोलकाता के साथ-साथ हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना समेत कई जिलों से लोग पहुंचे थे. इस दिन पूरी रात मंदिर का पट खुला रहता है. पूजा के दूसरे दिन अर्थात सोमवार को मंदिर में मां का भोग लगने के बाद लोगों में प्रसाद वितरण किया जायेगा.

इधर, दक्षिणेश्वर अद्यापीठ मंदिर में भी पूरी रात मंदिर के पट खुले रहते हैं लेकिन मां काली की अलग से कोई प्रतिमा नहीं होती है, बल्कि मंदिर में मां आद्या की ही पूजा होती है. काली पूजा के अवसर पर बड़े उत्साह के साथ इस मंदिर में लोगों ने मां आद्या की पूजा की. सुबह से ही विधिवत पूजा-पाठ की शुरुआत हुई. शाम में कई तरह के कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे. काली पूजा के अवसर पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है.

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