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नैतिक व सामाजिक मूल्यों का ह्रास चिंतनीय : सीताराम शर्मा

Updated at : 15 Sep 2019 2:07 AM (IST)
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नैतिक व सामाजिक मूल्यों का ह्रास चिंतनीय : सीताराम शर्मा

कोलकाता : अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन ने शनिवार को ‘मारवाड़ी की साख एवं उसकी पहचान’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया. संगोष्ठी का सभापतित्व सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सराफ ने किया. अपने स्वागत वक्तव्य में संतोष सराफ ने कहा कि हमारे पूर्वज अपने पारंपरिक मारवाड़ी गुणों का ध्यान रखते थे और अपनी जुबान […]

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कोलकाता : अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन ने शनिवार को ‘मारवाड़ी की साख एवं उसकी पहचान’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया. संगोष्ठी का सभापतित्व सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सराफ ने किया. अपने स्वागत वक्तव्य में संतोष सराफ ने कहा कि हमारे पूर्वज अपने पारंपरिक मारवाड़ी गुणों का ध्यान रखते थे और अपनी जुबान पर कायम रहते थे.

तभी ‘न खाता न बही, जो मारवाड़ी कहे वो सही’ जैसी कहावतें अस्तित्व में आयीं. वे सादगी पर जोर देते थे और अपनी चादर से ज्यादा पैर नहीं फैलाते थे, इस कारण उनका मान-सम्मान अक्षुण्ण रहा. आज लोग आडंबर और फिजूलखर्ची करते हैं, अपनी औकात से अधिक खर्च करते हैं और फिर अपनी देनदारियों से मुकर जाते हैं. इससे समाज की साख पर धब्बा लगता है.

मौके पर सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं समाजचिंतक सीताराम शर्मा ने खरी नीयत सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि व्यापार में नफा-नुकसान स्वाभाविक है लेकिन यदि आपकी नीयत सही है तो न सिर्फ आपकी साख बनी रहेगी अपितु आप अंत में सफल भी होंगे. नैतिक एवं मानवीय मूल्यों के ह्रास को चिंता का विषय बताते हुए श्री शर्मा ने कहा कि आज समाज का डर किसी को नहीं रहा.

वहीं सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुप्रसिद्ध उद्योगपति व समाजसेवी प्रह्लाद राय अगरवाला ने आडंबर और फिजूलखर्ची को गिरती साख का मूल बताया. उन्होंने कहा कि लोगों को परामर्श देकर और समझाकर ऐसी विचारधारा बनानी होगी कि जितनी आय हो, उसी के अनुसार खर्च करें. अपने पड़ोसी, रिश्तेदार आदि की तुलना न करें.

सुप्रसिद्ध विधिवेत्ता नंद गोपाल खेतान ने अपने व्यवसाय या कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, परिश्रम और गोपनीयता कायम रखने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि समय के साथ स्थितियों में परिवर्तन आया है. हम अपने अभिभावकों की बात सुनने वाली आखिरी और अपने बच्चों की बात सुनने वाली पहली पीढ़ी हैं.

उन्होंने सुप्रसिद्ध समाज बंधुओं लक्ष्मीपत सिंघानिया, बसंत कुमार बिड़ला, भगवती प्रसाद खेतान आदि के संस्मरण सुनाये और कहा कि आज सादगी समय की मांग है. श्री खेतान ने राष्ट्र की वर्तमान वित्तीय स्थिति पर भी प्रकाश डाला और कहा कि व्यवसाय और जीवन में भी, आर्थिक अनुशासन का पालन आवश्यक है.

विषय प्रवर्तन करते हुए संगोष्ठी उपसमिति के चेयरमैन शिव कुमार लोहिया ने कहा कि साख, मारवाड़ियों की सबसे बड़ी संपत्ति है. ब्रिटिश सरकार भी मारवाड़ियों की हुंडी स्वीकारती थी. सादगी एवं सेवाभाव मारवाड़ियों के विशिष्ट गुण हैं जिनकी सराहना महात्मा गांधी ने भी की थी. हमारे पूर्वजों की ‘सादा जीवन उच्च विचार’ की जीवनशैली को हमें अपनाये रहना चाहिए.

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संगोष्ठी उपसमिति के संयोजक दिनेश जैन ने सारगर्भित वक्तव्यों हेतु सभी वक्ताओं का आभार प्रकट किया और कहा कि परामर्श तथा मंत्रणा के माध्यम से हमें समाजबंधुओं को अपनी साख के विषय में सचेत रखना चाहिए और समाज की साख बचाने का हर संभव प्रयास करना चाहिए.

संगोष्ठी के प्रारंभ में राष्ट्रीय महामंत्री गोपाल झुनझुनवाला, संयुक्त महामंत्री संजय हरलालका एवं कोषाध्यक्ष कैलाशपति तोदी ने आमंत्रित वक्ताओं का पुष्पगुच्छों से स्वागत किया. इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामअवतार पोद्दार, संयुक्त महामंत्री दामोदर बिदावतका, पूर्वोत्तर सम्मेलन के अध्यक्ष मधुसूदन सेकसरिया, पश्चिम बंग सम्मेलन के अध्यक्ष नंद किशोर अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमल नोपानी, बिहार सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष निर्मल कुमार झुनझुनवाला, सर्वश्री जगदीशचंद्र मूधड़ा, शिव रतन अग्रवाला, रामनाथ झुनझुनवाला, विष्णु कुमार तुलस्यान, आत्माराम सोंथलिया, भानीराम सुरेका सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे.

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