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बोलकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का ऐप बनाने वाले नितिन को आइआइटी खड़गपुर करेगा सम्मानित

Updated at : 16 Aug 2019 10:07 PM (IST)
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बोलकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का ऐप बनाने वाले नितिन को आइआइटी खड़गपुर करेगा सम्मानित

कोलकाता : बोलकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने वाले ऐप बनाने के लिए आइआइटी खड़गपुर ने अपने पूर्व छात्र और Niki.ai के संस्थापक नितिन बाबेल को यंग अलम्नाई अचीवर अवार्ड (वाईएएए) 2019 से सम्मानित करने की घोषणा की है. यह पुरस्कार आइआइटी खड़गपुर परिसर में 18 अगस्त को संस्था के फाउंडेशन डे के अवसर पर दिया जायेगा. […]

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कोलकाता : बोलकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने वाले ऐप बनाने के लिए आइआइटी खड़गपुर ने अपने पूर्व छात्र और Niki.ai के संस्थापक नितिन बाबेल को यंग अलम्नाई अचीवर अवार्ड (वाईएएए) 2019 से सम्मानित करने की घोषणा की है. यह पुरस्कार आइआइटी खड़गपुर परिसर में 18 अगस्त को संस्था के फाउंडेशन डे के अवसर पर दिया जायेगा.

आइआइटी से मिली जानकारी के अनुसार आइआइटी खड़गपुर की ओर से दिया जाने वाला यह एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है, जिसे संस्था अपने उन पूर्व छात्रों को देती है, जिन्होंने प्रोफेशनल जीवन में बेहतरीन योगदान देते हुए एक लीडर के रूप में स्वयं को स्थापित किया है और जो संस्था के वर्तमान और भविष्य के विद्यार्थियों के लिए रोल मॉडल साबित होते हैं.

श्री बाबेल को यह पुरस्कार उनके अपने करियर जीवन में उत्कृष्ट योगदान और अपने कार्य से समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने के लिए दिया जा रहा है. श्री बाबेल ने देश के आम लोगों की परेशानियों को ध्यान में रखकर niki ऐप का निर्माण किया, जिसने आम लोगों को उनकी अपनी भाषा में बातचीत करते हुए ऑनलाइन लेनदेन करने की स्वतंत्रता दी है.

श्री बाबेल ने ‘प्रभात खबर’ से बातचीत करते हुए कहा कि Niki भारत का एकमात्र ऐसा ऐप है, जो देश में 50 लाख से अधिक लोगों को उनकी अपनी भाषा में ऑनलाइन लेनदेन का अवसर प्रदान कर रहा है. आम लोगों को डिजिटल भुगतान में होने वाली मुश्किलों जैसे जटिल इंटरफेस, भाषा जैसी परेशानियों को दूर करके niki देश के टियर 2/3/4 के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन लेनदेन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है तथा अगले वर्ष तक 2.5 करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य है.

उन्होंने बताया कि अभी niki में अंग्रेजी, हिंदी, बगंला और तमिल भाषा में लेनदेन की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही अन्य भाषाओं में भी यह सुविधा मिलेगी. इस ऐप को आइआइटी खड़गपुर के चार पूर्व छात्र नितिन बाबेल, सचिन जायसवाल, केशव प्रवासी और शिशिर मोदी द्वारा बनाया गया है. इस ऐप के उज्जवल भविष्य को देखते हुए कंपनी में रतन टाटा, यूनिलेजर वेंचर्स, SAP.iO सहित कई निवेशकों ने निवेश किया है.

कंपनी लगातार अपनी क्षमता साबित करते हुए वित्तीय वर्ष 2018 में niki.ai ने लगभग 30 मिलियन डॉलर का GMV रन रेट और 1 मिलियन डॉलर से अधिक का रेवेन्यू रन रेट प्राप्त किया. ऐप में हिंदी भाषा को जोड़ने के बाद, अक्टूबर 2018 से हिंदी GMV में भी 300 गुना की वृद्धि देखी गयी, जो करीब 60 मिलियन अमरीकी डॉलर है.

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