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विजयवर्गीय ने अमर्त्य सेन पर बोला हमला, कहा- क्या वह शंकराचार्य हैं या फिर महामंडलेश्वर?

Updated at : 27 Jul 2019 5:39 PM (IST)
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विजयवर्गीय ने अमर्त्य सेन पर बोला हमला, कहा- क्या वह शंकराचार्य हैं या फिर महामंडलेश्वर?

– जय श्रीराम को बंगाल की संस्कृति नहीं बताये जाने पर उखड़ें विजयवर्गीय – तारकेश्वर में महादेव का दर्शन कर की पूजा अर्चना अजय विद्यार्थी, कोलकाता भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश भाजपा के केंद्रीय प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार को तारकेश्वर में बाबा महादेव की पूजा की. पहली बार तारकेश्वर में पूजा करने पहुंचे […]

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– जय श्रीराम को बंगाल की संस्कृति नहीं बताये जाने पर उखड़ें विजयवर्गीय

– तारकेश्वर में महादेव का दर्शन कर की पूजा अर्चना

अजय विद्यार्थी, कोलकाता

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश भाजपा के केंद्रीय प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार को तारकेश्वर में बाबा महादेव की पूजा की. पहली बार तारकेश्वर में पूजा करने पहुंचे श्री विजयवर्गीय ने बंगाल में शांति की प्रार्थना की. इसके साथ ही नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन द्वारा ‘जय श्रीराम बंगाल की संस्कृति नहीं’ के बयान पर नाराजगी जतायी.

श्री विजयवर्गीय ने ‘प्रभात खबर’ से बातचीत करते हुए कहा, आज देख रहा हूं. बंगाल में जगह-जगह जय श्रीराम के ऊपर अमर्त्य सेन के बयान के पोस्टर लगे हैं. वे हिंदू धर्म के शंकराचार्य थोड़े ही हैं, जो वह कह दें कि बंगाल में जय श्रीराम की संस्कृति नहीं है. वह क्या महामंडलेश्वर हैं या शंकराचार्य हैं. ठीक है, वे अर्थशास्त्री हैं, तो हैं. उनके अर्थशास्त्र के ज्ञान से बंगाल ने कितनी प्रगति की है?

विजयवर्गीय ने कहा कि चाहे माकपा का राज हो या फिर तृणमूल का. सब जानते हैं कि बंगाल में कितनी आर्थिक प्रगति हुई है? वे अपने अर्थशास्त्र को ही फोकस करें और जय श्रीराम बंगाल की संस्कृति है या नहीं है. यह काम साधु संतों और आम लोगों पर छोड़ दें. देश के बुद्धिजीवियों द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने के संबंध में श्री विजयवर्गीय ने कहा : जहां तक ये तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखने की बात है. ये तथाकथित बुद्धिजीवी हमेशा देशविरोधी ताकतों का समर्थन करते रहे हैं.

उन्‍होंने कहा कि सिर्फ मोदी जी को बदनाम करने के लिए इस प्रकार के हथकंडे अपनाते हैं. जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं, तो कभी पुरस्कार वापसी, कभी भारत के भी टुकड़े होंगे, जैसे नारा देने वाले लोगों के साथ खड़े होकर और कभी नक्सली आंदोलन में भाग लेने वाले अर्बन नक्सलवादियों के साथ खड़े होकर देश में सिर्फ आराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. देश की जनता इनके साथ नहीं है.

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