शिक्षा क्षेत्र में विकास के लिए प्रधानमंत्री को बजट पूर्व सुझाव

Published at :16 Jun 2019 2:23 AM (IST)
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शिक्षा क्षेत्र में विकास के लिए प्रधानमंत्री को बजट पूर्व सुझाव

कोलकाता : एयूएम कैपिटल के प्रबंध निदेशक दिनेश जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बजट के पूर्व देश में शिक्षा के सिस्टम के त्वरित सुधार की दिशा में एक अभिनव सुझाव भेजा है. श्री जैन ने प्रधानमंत्री को पत्र के जरिये अपना सुझाव भेजा है. श्री जैन ने अपने सुझाव में कहा है कि कोई […]

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कोलकाता : एयूएम कैपिटल के प्रबंध निदेशक दिनेश जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बजट के पूर्व देश में शिक्षा के सिस्टम के त्वरित सुधार की दिशा में एक अभिनव सुझाव भेजा है. श्री जैन ने प्रधानमंत्री को पत्र के जरिये अपना सुझाव भेजा है. श्री जैन ने अपने सुझाव में कहा है कि कोई भी व्यक्ति सालाना अधिकतम पांच लाख रुपये अपने स्कूल या कॉलेज को डोनेशन दे सकता है. हालांकि यह जरूरी रहेगा कि डोनेशन देनेवाला व्यक्ति उसी स्कूल या कॉलेज को अनुदान दे, जहां से उसने पढ़ाई की है.

अनुदान में दी जाने वाली राशि को बजट में घोषणा करके करमुक्त किया जाये. इस योजना का लाभ अधिकतम तीन वर्ष तक ही लिया जा सकता है. श्री जैन कहते हैं कि इस योजना के जरिये कोई व्यक्ति अपने स्कूल यानी अपनी जड़ों से जुड़ा रह सकेगा. स्कूल के साथ जुड़ाव होने से उक्त स्कूल के अपग्रेडेशन की दिशा में वह सक्रिय रूप से विचार कर सकेगा और विकास तथा सुधार के लिए वह स्कूल प्रबंधन को अपने सुझाव दे सकेगा.

अगर सरकार डोनेशन की राशि को करमुक्त करने की योजना को तीन वर्ष बाद बंद कर देती है, तो भी यह संभावना रहती है कि वह व्यक्ति स्कूल को डोनेशन देने का सिलसिला जारी रखेगा, क्योंकि स्कूल के साथ उसका जुड़ाव गहराई से स्थापित हो चुका होगा. इस जुड़ाव को खत्म करना उसके लिए कठिन होगा. स्कूल प्रबंधन भी और अधिक पूर्व विद्यार्थियों को इस योजना में शामिल करने की दिशा में प्रयास करेगा. स्कूल एल्यूमनी मीट का भी आयोजन कर सकता है, जहां पूर्व विद्यार्थी मौजूदा विद्यार्थियों को प्रेरित कर सकते हैं.

इस योजना की जहां तक निगरानी की बात है, तो यदि ऐसी स्थिति आती है, जहां किसी प्रकार का घपला होता है, तो स्कूल व पूर्व विद्यार्थी, दोनों पर ही पूरी राशि का तिगुना जुर्माना लगाया जा सकता है. स्कूलों के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि किसी पूर्व विद्यार्थी से राशि मिलने के तीन वर्ष के भीतर वह उसे खर्च करे. अन्यथा राशि सरकार के पास चली जायेगी. यदि स्कूल पहले से पूर्व विद्यार्थियों द्वारा दी जानेवाली राशि का इस्तेमाल कर रहा है, तो सरकार द्वारा दी जानेवाली कोई भी सब्सिडी तभी दी जायेगी, जब स्कूल और फंड की जरूरत के लिए आवेदन करता है. इससे सरकारी फंड की बचत होगी.

श्री जैन ने उम्मीद जतायी है कि यदि यह योजना क्रियान्वित हो जाती है, तो देश की शिक्षा व्यवस्था तेजी से विकास कर सकेगी.

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