परिश्रम के बल पर बने हैं डॉक्टर, बाहर निकालने की धमकी सुनने के लिए नहीं : डॉ सजल

कोलकाता : सहनशक्ति की भी एक सीमा होती है. नोबेल प्रोफेशन के नाम पर कब तक डॉक्टरों की अनदेखी होती रहेगी? जब हम मौत के मुंह में से इंसान को बचा कर लाते हैं तब प्रशंसा में प्रशासन की ओर से चिकित्सकों के पीठ क्यों नहीं थपथपाये जाते? लेकिन जब भी कुछ ऐसा होता है […]
कोलकाता : सहनशक्ति की भी एक सीमा होती है. नोबेल प्रोफेशन के नाम पर कब तक डॉक्टरों की अनदेखी होती रहेगी? जब हम मौत के मुंह में से इंसान को बचा कर लाते हैं तब प्रशंसा में प्रशासन की ओर से चिकित्सकों के पीठ क्यों नहीं थपथपाये जाते? लेकिन जब भी कुछ ऐसा होता है जिसके कसूरवार चिकित्सक नहीं होते हैं. लेकिन उसे कसूरवार ठहराकर दनादन लाठी बरसाया जाता है तब शासन-प्रशासन क्यों नहीं मदद को आगे आता? सर्विस डॉक्टर फोरम के महासचिव डॉ सजल विश्वास ने एनआरएस में धरना पर बैठे चिकित्सकों से उक्त बाते कहीं.
उन्होंने कहा कि हम कराहते रहते, पीड़ित के परिजन पीटते रहते? कहां का न्याय है यह? इस सभी बातों को अनदेखा करके सीएम का कहना कि जो डॉक्टर काम पर नहीं आयेगा उसे सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा! यह चिकित्सकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचानेवाली बात है. ना सिर्फ पश्चिम बंगाल के वरन दिल्ली समेत देश के सभी चिकित्सक भी नाइंसाफी के खिलाफ हमारे साथ हैं.
उन्होंने आगे कहा कि, ‘परिवार वालों के त्याग, अपनी अथक परिश्रम के बल पर हम सभी डॉक्टर बने हैं. हमें भी सुरक्षित व सम्मानित जीवन जीने का पूरा अधिकार है. हमें खेद है कि हड़ताल के वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसके लिए सीएम जिम्मेवार हैं. क्योंकि हम सभी सरकारी चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में कम से कम सुविधा व संसाधन में हमेशा अपना बेस्ट देते हैं. लेकिन फिर भी ऐसा सुलूक नाकाबिले बर्दाश्त है. जब तक सीएम चिकित्सकों से बात नहीं करती तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
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