बंगाल के स्कूलों में लड़कियों की ड्रापआउट संख्या घटी
Updated at : 23 May 2019 1:40 AM (IST)
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कन्याश्री योजना का असर कोलकाता : राज्य के स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में काफी बढ़ोतरी हुई है. इसमें कन्याश्री योजना का बहुत बड़ा हाथ है. माध्यमिक परीक्षा के नतीजों की घोषणा के बाद ऐसी राय स्कूल के हेडमास्टरों ने दी है. हालांकि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली का भी मानना है कि […]
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कन्याश्री योजना का असर
कोलकाता : राज्य के स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में काफी बढ़ोतरी हुई है. इसमें कन्याश्री योजना का बहुत बड़ा हाथ है. माध्यमिक परीक्षा के नतीजों की घोषणा के बाद ऐसी राय स्कूल के हेडमास्टरों ने दी है. हालांकि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली का भी मानना है कि कन्याश्री से मिलने वाली राशि से गरीब व पिछड़े वर्ग में लड़कियों की शिक्षा के प्रति काफी जागरूकता बढ़ी है.
इसी पर सहमति देते हुए सेकेंडरी टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव विश्वजीत मित्रा का कहना है कि नतीजों के बाद यह सिद्ध हो गया है कि कन्याश्री योजना के कारण लड़कियों का ड्रापआउट कम हुआ है. माध्यमिक की परीक्षा में ज्यादा लड़कियां बैठी थीं. यह संख्या पिछले तीन साल से बढ़ी है.
कन्याश्री योजना की धनराशि व सबुज साथी योजना में दी गयी साइकिल की वजह से स्कूलों में आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है. कई बच्चे जो स्कूलों से ड्रापआउट थे, वे भी स्कूलों की ओर आकर्षित हुए हैं. सरकारी स्कूलों के लिए सक्रिय हेडमास्टर एसोसिएशन के एक सदस्य ने बताया कि स्कूलों में लड़कियों के लिए कन्याश्री योजना के बाद बीपीएल परिवारों में लड़कियों को स्कूल भेजने के लिए पिछले साल काफी उत्साह देखा गया.
यही कारण है कि इस बार माध्यमिक परीक्षा में लड़कियों की संख्या अधिक रही, जो लड़कियां पढ़ाई छोड़ कर घर पर बैठकर ही काम करती थीं, उनको फिर से स्कूल लाने के लिए जिला स्तर पर अभियान चलाया गया. इसमें सरकार को काफी सफलता मिली. कन्याश्री योजना कक्षा दसवीं व बारहवीं के बाद (पिछले वर्ष विस्तारित स्नातकोत्तर) तक विस्तारित की गयी.
लड़कियों को प्रत्यक्ष व वित्तीय मुआवजा मिलने से गरीब परिवार में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है. शिक्षा के क्षेत्र में सशक्तीकरण के लिए कई अन्य सुविधाएं भी शुरू की गयीं. विशेषकर लड़कियों के लिए कन्याश्री योजना से माता-पिता स्कूल भेजने के लिए काफी उत्साहित देखे गये हैं. अभी तक के आंकड़े बताते हैं कि स्कूलों में ड्रॉपआउट की संख्या घटी है. इसके साथ ही स्कूलों में लड़कियों के नामांकन में भी बढ़ोतरी हुई है. ग्रामीण स्तर पर भी यह सकारात्मक बदलाव देखा गया है.
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