कोलकाता : स्कूलों में यौन शोषण पर अंकुश के लिए सख्ती, आचार संहिता में ‘क्या करें और क्या न करें’ की 24-सूत्री सूची शामिल

Updated at : 12 Feb 2019 1:23 AM (IST)
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कोलकाता :  स्कूलों में यौन शोषण पर अंकुश के लिए सख्ती, आचार संहिता में ‘क्या करें और क्या न करें’ की 24-सूत्री सूची शामिल

कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए नयी आचार संहिता बनायी है, जिसका मकसद स्कूली छात्र छात्राओं को यौन शोषण से बचाना है. पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी और सरकार की ओर से वित्तपोषित स्कूलों के शिक्षकों के लिए एक आचार संहिता तैयार की है. हाल के दिनों […]

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए नयी आचार संहिता बनायी है, जिसका मकसद स्कूली छात्र छात्राओं को यौन शोषण से बचाना है. पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी और सरकार की ओर से वित्तपोषित स्कूलों के शिक्षकों के लिए एक आचार संहिता तैयार की है.

हाल के दिनों में स्कूलों में यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार इस आचार संहिता में क्या करें और क्या न करें, की एक 24-सूत्री सूची भी शामिल है. तमाम शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए इसका पालन करना अनिवार्य है. इसके उल्लंघन का दोषी पाये जाने की स्थिति में जुर्माने से लेकर निलंबन व नौकरी से बर्खास्त करने तक की सजा का प्रावधान है. बंगाल संभवत: ऐसी आचार संहिता बनाने वाला देश का पहला राज्य है.

बंगाल में बढ़ती घटनाएं
पश्चिम बंगाल के स्कूलों में छात्र-छात्राओं के यौन शोषण की घटनाएं हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी हैं. अकेले राजधानी कोलकाता में ही बीते दो-ढाई वर्षों के दौरान ऐसी एक दर्जन से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गयी हैं. इनमें एक दर्जन से ज्यादा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई है. यही वजह है कि सरकार ने दो साल पहले इस आचार संहिता के मसविदों पर काम शुरू किया था. तमाम संबंधित पक्षों से राय लेने के बाद अब इसे मंजूरी दी गयी है. सरकार की ओर से जारी एक अधिसूचना में तमाम स्कूलों में इसका पालन अनिवार्य कर दिया गया है.
इसमें शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों से स्कूल परिसर के अलावा बाहर भी छात्रों के साथ संबंधों की गरिमा बहाल रखने और आपसी सम्मान का माहौल बनाये रखने को कहा गया है. आचार संहिता में कहा गया है कि हर शिक्षक व गैर-शिक्षण कर्मचारी को छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ भी सम्मानजनक रवैया अपनाना होगा.
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अभिभावकों की अनुमति के बिना कोई भी शिक्षक छुट्टी के दिन छात्र को किसी निजी कार्यक्रम में नहीं बुला नहीं सकता है. स्कूल के दौरान भी शिक्षक को स्कूल के प्रिंसिपल से इसकी अनुमति लेनी होगी. तमाम शिक्षकों को अपने स्कूल के छात्र-छात्राओं को निजी ट्यूशन पढ़ाने से भी मना कर दिया गया है.
क्या कहना राज्य के शिक्षा मंत्री का
शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी कहते हैं : इसकी कई वजहें हैं. कई कर्मचारियों ने विभाग के खिलाफ सैकड़ों मामले दर्ज करा रखे हैं. इससे विभाग को कानून प्रक्रिया पर काफी समय व रकम खर्च करनी पड़ती है. वह कहते हैं कि विभागीय अधिकारियों के कोर्ट-कटहरी का चक्कर लगाने की वजह से फैसलों की प्रक्रिया प्रभावित होती है. ऐसे मामले दर्ज कराने वाले शिक्षकों के भी कोर्ट में ज्यादा समय बिताने की वजह से स्कूली पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता. मंत्री का दावा है कि इस आचार संहिता के जरिए शिक्षकों के कानूनी सहायता लेने के अधिकारों पर अंकुश लगाने की कोई मंशा नहीं है.
क्या है अाचार संहिता में
आचार संहिता में कहा गया है कि कोई भी शिक्षक या गैर-शिक्षण कर्मचारी ऐसा कोई काम नहीं करेगा जो उसके पद की गरिमा के प्रतिकूल हो और जिससे संस्थान की छवि पर नकारात्मक असर पड़े. इसके उल्लंघन की स्थिति में उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है. अगर किसी शिक्षक के खिलाफ कोई शिकायत मिलती है तो राज्य सेकेंडरी शिक्षा बोर्ड उसकी जांच के लिए सब-इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स स्तर के अधिकारी की नियुक्ति करेगा. आचार संहिता में शिक्षकों पर सरकारी अनुमोदन वाले स्कूलों में नौकरी के दौरान कोई निजी व्यापार करने, रुपये के लेन-देन का काम करने या पुस्तकें लिखने तक पर पाबंदी लगा दी गयी है.
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