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माध्यमिक परीक्षा : मोबाइल दिखने पर इनविजिलेटर की खैर नहीं

Updated at : 10 Feb 2019 12:16 AM (IST)
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माध्यमिक परीक्षा : मोबाइल दिखने पर इनविजिलेटर की खैर नहीं

कोलकाता : आगामी 12 फरवरी से माध्यमिक की परीक्षा शुरू हो रही है. इसके लिए बोर्ड द्वारा सभी तैयारियां कर ली गयी हैं. जिन स्कूलों में परीक्षा के केंद्र निर्धारित किये गये हैं, वहां परीक्षार्थियों के लिए पूरी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. परीक्षा केंद्र पर एक्जामिनर व इनविजिलेटर के अलावा इस साल शिक्षा बोर्ड […]

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कोलकाता : आगामी 12 फरवरी से माध्यमिक की परीक्षा शुरू हो रही है. इसके लिए बोर्ड द्वारा सभी तैयारियां कर ली गयी हैं. जिन स्कूलों में परीक्षा के केंद्र निर्धारित किये गये हैं, वहां परीक्षार्थियों के लिए पूरी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. परीक्षा केंद्र पर एक्जामिनर व इनविजिलेटर के अलावा इस साल शिक्षा बोर्ड का एक अधिकारी भी रहेगा.

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली ने शनिवार को एक बार फिर से यह सूचना जारी की कि परीक्षा केंद्र पर इनविजिलटेर या एक्जामिनर के पास अगर मोबाइल देखा गया, तो उसे सस्पेंड कर दिया जायेगा. हालांकि मोबाइल को लेकर परीक्षार्थियों को भी पहले ही सचेत कर दिया गया है, फिर एक बार शिक्षकों व इनविजिलेटरों को भी हिदायत दी गयी है कि वे परीक्षा हॉल में किसी भी कीमत पर मोबाइल लेकर न जायें. अगर किसी के पास हॉल में मोबाइल पाया गया, तो उसे सस्पेंड किया जायेगा.
उनका कहना है कि परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी पर तैनात इनविजिलेटर व एक्जामिनरों को अपना मोबाइल वैन्यु इनचार्ज को जमा करवाना होगा. कोई भी अपने जेब में मोबाइल नहीं रख सकता है. ऐसा देखे जाने पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी. इसको लेकर कुछ शिक्षक संगठन आपत्ति जता रहे हैं. इस विषय में बंगीय शिक्षा-ओ-शिक्षाकर्मी समिति के सहसचिव सपन मंडल का कहना है कि शिक्षक या इनविजिलेटर भी नियम कायदा जानते हैं. वे कोई गैर-कानूनी काम नहीं करेंगे.
बोर्ड के अध्यक्ष को यह सूचना जारी करनी चाहिए कि कोई भी इनविजिलेटर को अगर हॉल में मोबाइल से तस्वीर लेते हुए देखा गया, तो सख्त कार्रवाई की जायेगी. केवल मोबाइल देखने से ही बोर्ड सस्पेंड कर देगा, यह तो उचित नहीं है. पेपर लीक की घटना को रोकने के लिए बोर्ड ने इस बार कड़ी कार्रवाई की है.
समग्र शिक्षा अभियान ड्रापआउट को स्कूल की ओर लाने का प्रयास
कोलकाता : सर्व शिक्षा मिशन व राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक स्तर व मिडिल क्लास तक ड्रापआउट बच्चों को स्कूल की ओर आकर्षित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की गयी हैं. इसमें आठवीं तक चाइल्ड ट्रेकिंग व्यवस्था से हर गली-माैहल्ले से बच्चों को पुनः स्कूल की ओर लाया गया. इसी योजना को फिर नये सिरे से समग्र शिक्षा अभियान के नाम से शुरू किया गया है. स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इस साल सीनियर कक्षा 9,10,11,12वीं के लिए चाइल्ड ट्रेकिंग प्रणाली शुरू की गयी है. इन कक्षाओं में पास-फेल प्रथा जारी है, इसलिए ड्रापआउट संख्या भी अधिक है.
इसको ध्यान में रख कर इसमें छात्रों को स्कूल में फिर से लाने के लिए चलाया गया अभियान सफल हो रहा है. एक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक जिले में गली व माैहल्ले से उन बच्चों को स्कूल लाया गया, जो किसी भी आर्थिक व सामाजिक कारणों से स्कूल छोड़ कर चले गये थे. हाल ही में किये गये सर्वे में यह पाया गया कि 15 से 18 साल के कई बच्चे अभी भी ड्रापआउट हैं.
इस चाइल्ट ट्रेकिंग अभियान से काफी संख्या में स्कूल की ओर लाकर बच्चों को लाया जा रहा है. डीआइ को काफी सफलता हासिल हुई है. इन बच्चों का रुझान बढ़ाने के लिए इनकी फीस भी माफ की जा रही है. इस विषय में शिक्षक संगठन के एक प्रतिनिधि ने कहा कि देश में शिक्षा की दर बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार की यह पहल काफी सफल सिद्ध हुई है.
इसमें बंगाल राज्य में भी काफी बदलाव आया है. समग्र शिक्षा अभियान के तहत अब प्रत्येक पिछड़े इलाकों में उन बच्चों को स्कूल की ओर लाया जा रहा है, जो रेल किनारे रह रहे हैं या स्कूल छोड़ चुके है. यह अभियान शिक्षा के अधिकार की ओर एक अच्छी पहल है.
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