सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट में दुकानों के आवंटन में घपला!
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Feb 2019 5:47 AM (IST)
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मोहन झा,सिलीगुड़ी : नियमों को ताक पर रखकर सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट में स्टॉलों के आवंटन व हस्तांतरण करने का मामला सामने आया है. इसमें करोड़ों के घोटाले का भी आरोप लग रहा है. स्टॉल आवंटन व हस्तांतरण के डीड पर सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट कमेटी की चेयरपर्सन सह दार्जिलिंग जिला अधिकारी (डीएम) जयसी दासगुप्त के हस्ताक्षर […]
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मोहन झा,सिलीगुड़ी : नियमों को ताक पर रखकर सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट में स्टॉलों के आवंटन व हस्तांतरण करने का मामला सामने आया है. इसमें करोड़ों के घोटाले का भी आरोप लग रहा है. स्टॉल आवंटन व हस्तांतरण के डीड पर सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट कमेटी की चेयरपर्सन सह दार्जिलिंग जिला अधिकारी (डीएम) जयसी दासगुप्त के हस्ताक्षर दिख रहे हैं, लेकिन उन्होंने किसी डीड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है.
बीते वर्ष के अक्तूबर महीने से सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट कमेटी पर एक के बाद एक घोटाले के आरोप लग रहे हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट में स्टॉल आवंटन व हस्तांतरण वेस्ट बंगाल एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग (रेगुलेशन) एक्ट-1972 के अंतर्गत होता है. लेकिन वर्ष 2018 व 2019 में अब तक 62 स्टॉलों के आवंटन व हस्तांतरण में इस कानून के प्रावधानों की अनदेखी की गयी है. एक्ट के मुताबिक स्टॉलों के आवंटन या हस्तांतरण के लिए म्यूटेशन आवश्यक है. लेकिन इन 62 स्टॉलों के मामले में डीड में म्यूटेशन का जिक्र तक नहीं किया गया है.
सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट कमेटी के दस्तावेजों के मुताबिक, 1 अक्तूबर 2018 को स्टॉल नंबर एपी-16 का हस्तांतरण किया गया, जो मार्केट के फल व सब्जी कॉम्प्लेक्स में स्थित है. यह स्टॉल पहली बार 8 दिसंबर 2008 को राइमा चौधरी के नाम से आवंटित किया गया. दिलचस्प बात यह है कि आवंटन के समय सिलीगुड़ी के खुदीरामपल्ली निवासी प्रसेनजीत राय चौधरी की बेटी राइमा चौधरी मात्र तीन वर्ष की थी. सवाल यह है कि तीन साल की बच्ची के नाम आवंटन कैसे हुआ?
मार्केट कमेटी के पास उस आवंटन के एग्रीमेंट का कोई दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं है. 10 साल बाद, 1 अक्तूबर 2018 को यही स्टॉल पड़ोसी राज्य बिहार के निवासी शंभू राय को हस्तांतरित किया गया.हस्तांतरण के लिए आवश्यक वेस्ट बंगाल स्टेट मार्केटिंग बोर्ड की मंजूरी व म्यूटेशन प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दिया गया.
रिकॉर्ड के अनुसार, एपी-16 स्टॉल का क्षेत्रफल 90 वर्गफुट है. नियमानुसार इतने छोटे स्टॉल में थोक व्यापार संभव नहीं है. शंभू राय को स्टॉल के साथ 100 वर्गफुट का बरामदा भी आवंटित किया गया है. लेकिन हस्तांतरण के दस्तावेज में 100 वर्गफुट के बरामदे के लिए किसी सलामी या भाड़े का जिक्र तक नहीं है. यानी 100 वर्गफुट का बरामदा शंभू राय को ऐसे ही दे दिया गया. जानकार इसके पीछे पर्दे के पीछे डील हुई बताते हैं. खास बात यह भी है कि शंभू राय को स्टॉल का हस्तांतरण पहले हो गया और सलामी बाद में दी गयी.
1 अक्तूबर 2018 को हुए हस्तांतरण के लिए 50 हजार रुपये सलामी 5 अक्तूबर 2018 को जमा करायी गयी. ऐसा एक नहीं, बल्कि कई मामले हैं. 1 अक्तूबर 2018 से 16 जनवरी 2019 तक किये गये कुल 62 स्टॉलों के हस्तांतरण में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है.कई स्टॉलों के साथ 100 वर्गफुट का बरामदा मार्केट कमिटी ने बिना पैसे के दे दिया है. या यूं कहें कि सरकार को चूना लगाकर कमेटी सदस्यों ने अपनी जेबें भर लीं.
डीएम ने अपने हस्ताक्षरों को जाली बताया
दार्जिलिंग की डीएम जयसी दासगुप्त सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट कमेटी की चेयरपर्सन भी हैं. जिन 62 स्टॉलों के हस्तांतरण में नियमों की अनदेखी की बात सामने आयी है, उनके दस्तावेजों पर जयसी दासगुप्त के हस्ताक्षर हैं. इस बारे में पूछे जाने जयसी दासगुप्त ने ऐसे एक भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है.
उन्होंने कहा कि उनके हस्ताक्षर की नकल की गयी है. वह इस मामले की जांच करायेंगी. प्राप्त जानकारी के अनुसार, सभी 62 दस्तावेजों के अंतिम पन्ने पर पर रेगुलेटेड मार्केट कमेटी की चेयरपर्सन जयसी दासगुप्ता, सचिव देवज्योति सरकार व स्टॉल मालिक के हस्ताक्षर हैं. इस संबंध में जयसी दासगुप्ता से बात करने पर उन्होंने कहा, ‘कई बार गलत दस्तावेज मीडिया में फैला दिये जाते हैं. मैंने रेगुलेटेड मार्केट कमेटी की ओर से किसी डीड पर हस्ताक्षर नहीं किया है.’
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