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कोलकाता : खबरपालिका जब मरती है, धराशायी हो जाता है लोकतंत्र : वेदप्रताप वैदिक

Updated at : 17 Dec 2018 1:38 AM (IST)
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कोलकाता : खबरपालिका जब मरती है, धराशायी हो जाता है लोकतंत्र : वेदप्रताप वैदिक

कोलकाता : खबरपालिका जब मर जाती है, तो लोकतंत्र धराशायी हो जाता है. लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता को खबरपालिका कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. ये बातें चर्चित वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक ने रविवार को ‘दृष्टि परख’ हिंदी साप्ताहिक के रजत जयंती समारोह के अवसर पर कही. श्री वैदिक ने कहा कि जब […]

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कोलकाता : खबरपालिका जब मर जाती है, तो लोकतंत्र धराशायी हो जाता है. लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता को खबरपालिका कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. ये बातें चर्चित वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक ने रविवार को ‘दृष्टि परख’ हिंदी साप्ताहिक के रजत जयंती समारोह के अवसर पर कही. श्री वैदिक ने कहा कि जब तोप न काबिल हो तो अखबार निकालो, क्योंकि कलम की ताकत सभी ताकतों से बड़ी है.
पत्रकारिता के पीछे शब्द की ताकत तथा शब्दों के पीछे विचार की ताकत होती है. उन्होंने कहा कि ये हिंदी पत्रकारिता का इतिहास रहा है कि हिंदी पत्रकारिता करनेवालों ने खोया ही है.
इसके बावजूद हिम्मती विचारवान लोकतंत्र को प्राणवायु बनकर बचा रहे हैं. कोलकाता पुलिस महानिदेशक अधीर शर्मा ने कहा कि दृष्टि परक अखबार आज भी पुुरानी मान्यताओं, संस्कृति व समाज की वास्तविकता दिखाने के कार्य में लगा हुआ.
वरिष्ठ पत्रकार विश्वम्भर नेवर ने कहा कि एक अखबार की ताकत उसके पाठक हैं. उन्होंने हिंदीभाषियों से अनुरोध किया कि वे हिंदी अखबार पढ़ें, क्योंकि अखबार पैसों से नहीं निकलता. विचारों की ताकत और जनता की ज्ञान शक्ति से इसे बढ़ावा मिलता है.
इस मौके पर हास्य कवियों के शिरोमणि पदमश्री सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि आज पत्रकारिता की ये हालत हो गयी है कि वो मात्र पेटकारिता बन गयी है. इसी विषय पर उन्होंने दिनकर जी का एक किस्सा बताया कि जब लड़खड़ाते हुए नेहरू को दिनकर ने संभाल लिया था तो नेहरू ने कहा आप न होते तो क्या होता. इस पर दिनकर ने कहा था कि ‘नेहरू जी जब-जब देश की राजनीति लड़खड़ायेगी तब साहित्य उसे सम्हाल लेगी.
कार्यक्रम के आयोजक व वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन जोशी ने कहा कि संवाद को आत्मा की भूख वही मानता है, जो इसकी दिवानगी को महसूस भी करता है. उन्होंने बताया कि एक संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए भी अपने आप को कहीं खाली महसूस किया. इसके पश्चात ही उन्होंने दृष्टि परक की शुरुआत की.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उद्योगपति जगदीशप्रसाद गोयल, पुलिस महानिदेशक, जीआरपी अधीर शर्मा, चर्चित भजन गायक रमेश कुमार शर्मा, लाफ्टर चैलेंज के दिनेश बावरा, शंभु शिखर, लेखिका व भजन गायक डॉ सीता सागर उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन ईशा शर्मा ने किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में रामचंद्र जोशी की मुख्य भूमिका रही.
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