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कोलकाता में बोले अमित शाह : ममता सरकार को उखाड़ फेंकना है, कार्यकर्ताओं को दिया इन 17 सीटों को जीतने का लक्ष्य

Updated at : 12 Aug 2018 7:54 AM (IST)
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कोलकाता में बोले अमित शाह : ममता सरकार को उखाड़ फेंकना है, कार्यकर्ताओं को दिया इन 17 सीटों को जीतने का लक्ष्य

कोलकाता : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को मेयो रोड की अपनी सभा में स्पष्ट कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य देश के अन्य 19 राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी भाजपा सरकार की स्थापना करनी है. उन्होंने कहा कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी […]

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कोलकाता : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को मेयो रोड की अपनी सभा में स्पष्ट कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य देश के अन्य 19 राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी भाजपा सरकार की स्थापना करनी है.
उन्होंने कहा कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी जरूर जीत लेगी, लेकिन बंगाल में असली लक्ष्य 2021 का है. भाजपा कर्मियों को ममता सरकार को उखाड़ फेंकने का लक्ष्य अभी से अपने साथ लेकर चलने की जरूरत है. अमित शाह ने कहा रैली की भीड़ इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी का शासन खत्म होने जा रहा है.
पार्टी की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोरचा की ओर से आयोजित रैली में भाजपा अध्यक्ष ने शरणार्थियों को अपनाने और घुसपैठियों को भगाने की बात करके अपना 2019 का एजेंडा स्पष्ट कर दिया.
उन्होंने एनआरसी को पूरी तरह राष्ट्रवाद से जोड़ दिया, ताकि सांप्रदायिक तौर पर ध्रुवीकरण का आरोप न लगे. शाह ने अपने भाषण में स्पष्ट लाइन खींच दी कि भाजपा का यह अभियान किसी भी भारतीय के खिलाफ नहीं है चाहे वह हिंदू हों या मुस्लिम. साथ ही कहा कि विपक्षी दल पहले स्पष्ट करें कि वे बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ हैं या विरोध में. उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए यह राजनीतिक मामला नहीं है. पार्टी ने 1980 से अब तक हर राजनीतिक प्रस्ताव में बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने की बात की है और अब सत्ता में आने के बाद उसे पूरा करके दिखा दिया है.
राज्य की ममता सरकार को आड़े हाथों लेते हुए शाह ने घुसपैठ के मुद्दे को स्थानीय रोजगार, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ दिया और जनता से सवाल किया कि क्या घुसपैठियों के कारण उनके रोजी-रोजगार प्रभावित नहीं हो रहे हैं.
इसके साथ ही शाह ने एयरपोर्ट से लेकर मंचस्थल तक हर तरफ लगे तृणमूल कांग्रेस के पोस्टरों का विषय वस्तु सामने लाकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा और कहा कि वह बंगाल के लोगों को गुमराह करके यह प्रचार करने की कोशिश कर रही हैं कि भाजपा बंगाल और बंगाली समाज का विरोधी है.
उन्होंने कहा कि जिस पार्टी की स्थापना खुद बंगाल के सपूत डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने किया और जो पार्टी रामकृष्ण परमहंस को पूजती है वह बंगाल और बंगाली समाज का विरोधी कैसे हो सकती है.
अलबत्ता जो शरणार्थी इस देश में आये हैं उनके पुनर्वास और नागरिकता के लिए जल्द ही कानून बनेगा और घुसपैठियों को चुन-चुन कर निकाला जायेगा. यह प्रक्रिया ममता बनर्जी के रोकने से थोड़े ही रुकेगी. क्योंकि भाजपा के लिए देशहित वोट बैंक से ज्यादा जरूरी है. लेकिन ममता बनर्जी के लिए वोट बैंक के लिए देशहित के साथ समझौता करना आम बात है.
उन्होंने कहा कि इस बात का प्रमाण ममता बनर्जी के दोहरे मानदंड से होता है. जब वह वामपंथियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रही थीं उस वक्त उन्होंने घुसपैठियों के खिलाफ संसद में हंगामा किया था. उनका दावा था कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के बल पर वामपंथी चुनाव जीतते हैं. लेकिन आज वही सत्ता पाते ही राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का विरोध कर रही हैं.
शाह ने कहा कि बंगाल में विकास हुआ नहीं और रोजी-रोजगार का लाभ घुसपैठिये उठा रहे हैं. केंद्र का पैसा आ रहा है और उसका सही लाभ आम लोगों के पास नहीं पहुंच रहा है. ऐसे में बंगाल के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आस्था रखते हुए बंगाल के विकास और संस्कृति की रक्षा के लिए भाजपा को मौका देना चाहिए. अब तक यहां के लोग कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस को मौका दे चुके हैं.
लेकिन जरूरत है एक बार भाजपा को मौका देने की. वैसे भी देश के 19 राज्यों की सत्ता में आने और 75 फीसदी हिस्से पर भाजपा का झंडा लहराने के बाद उसका विजय रथ तब तक नहीं रुकेगा जब तक बंगाल की सत्ता पर काबिज नहीं हो जाते हैं.
इसके लिए उन्होंने सभा में मौजूद नौजवानों को संकल्प दिलाया कि हर हाल में वह लोग परिवर्तन करके रहेंगे. इसके लिए वह हर तरह की कुर्बानी देने को तैयार हैं. पंचायत चुनाव के दौरान मारे गये 65 लोगों की कुर्बानी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता हत्या की राजनीति को पसंद नहीं करती. ऐसा करने वालों को वह उखाड़ फेंकती है इस बार भी वह ऐसा ही करेगी.
तृणमूल सरकार ने बांग्लादेश से घुसपैठ के साथ-साथ भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया है. वह (ममता बनर्जी) ‘वोट-बैंक की राजनीति’ के कारण एनआरसी के खिलाफ हैं. बांग्लादेशी घुसपैठिये पूर्व की वामपंथी सरकार का वोट बैंक थे और अब वे टीएमसी का एक वोट बैंक बन गये हैं. राहुल गांधी और ममता दीदी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण है या वोट बैंक. भाजपा के लिए देश पहले आता है.
अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष
इन सीटों पर है नजर
शाह के शनिवार के भाषण से यह स्पष्ट हो गया कि बंगाल की कुल 42 लोकसभा सीटों में से वह 17 सीटें उनके मुख्य निशाने पर हैं, जहाँ मुस्लिम वोटरों कि संख्या अधिक है. ये सीटें हैं : मुर्शिदाबाद (मुस्लिम आबादी 59%), रायगंज-56%, बहरमपुर-44%, बशीरहाट- 44%, मालदा उत्तर-41%, मालदा दक्षिण-41%, डायमंड हार्बर-33%, जयनगर-30%, बीरभूम-36%, कृष्णानगर-33%, बोलपुर-25%, जंगीपुर-60%, कूच बिहार-23%, उलूबेरिया-22%, मथुरापुर-21%, जादवपुर-20%, बर्धवान-20%. इनमें से भाजपा के पास अभी कोई सीट नहीं.
भाजपा बंगाल विरोधी नहीं, ममता विरोधी
शाह ने कहा कि पहले इस रैली को रोकने की कोशिश की गयी और अब पश्चिम बंगाल के सारे स्थानीय टीवी चैनलों को डाउन कर दिया गया है ताकि लोग इस रैली का प्रसारण न देख सकें. उन्होंने कहा कि भाजपा पश्चिम बंगाल की विरोधी कैसे हो सकती है, जबकि हमारी पार्टी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल से ही थे. उन्होंने कहा कि भाजपा बंगाल विरोधी नहीं, ममता विरोधी है.
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