कोलकाता : पश्चिम बंगाल आवासीय नियामक अधिनियम को मिली मंजूरी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Apr 2018 5:08 AM (IST)
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कोलकाता : महानगर में प्रमोटर राज को खत्म करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने नया एक्ट ‘पश्चिम बंगाल आवासीय नियामक अधिनियम’ पारित किया है. विधानसभा में पारित होने के बाद इस अधिनियम को राज्य के कैबिनेट बैठक में भी मंजूरी मिल चुकी है. जानकारी के अनुसार, यह अधिनियम फ्लैट खरीदारों के लिए रक्षा कवच […]
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कोलकाता : महानगर में प्रमोटर राज को खत्म करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने नया एक्ट ‘पश्चिम बंगाल आवासीय नियामक अधिनियम’ पारित किया है. विधानसभा में पारित होने के बाद इस अधिनियम को राज्य के कैबिनेट बैठक में भी मंजूरी मिल चुकी है.
जानकारी के अनुसार, यह अधिनियम फ्लैट खरीदारों के लिए रक्षा कवच साबित होगा, क्योंकि इससे प्रमोटर राज को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा. गौरतलब है कि पिछले वर्ष अगस्त महीने में राज्य सरकार ने विधानसभा में पश्चिम बंगाल आवासीय उद्योग नियामक अधिनियम-2017 पारित था और बाद इस अधिनियम को कानून का प्रारूप दिया गया. इस कानून के तहत राज्य सरकार ने ‘हाउसिंग इंडस्ट्री रेगुलेटरी अथॉरिटी या हीरा’ तैयार किया है. साथ ही हाउसिंग इंडस्ट्री एप्पीलेट ट्राइबुनल का भी गठन किया गया है. राज्य के आवासन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस कानून के लागू होने के बाद प्रमोटर पर फ्लैट खरीदारों को प्रताड़ित नहीं कर पायेंगे और अगर कहीं कोई प्रताड़ना का मामला होता है, तो आरोपी प्रमोटर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
आवासीय बिल्डिंग बनाने से पहले रजिस्ट्रेशन जमा करना होगा
अब से राज्य के किसी भी प्रमोटर को आवासीय बिल्डिंग तैयार करने से पहले हीरा में रजिस्ट्रेशन जमा करना होगा और रजिस्ट्रेशन कराते वक्त उसे जमीन के सभी दस्तावेज, प्रस्तावित आवासन का परिमाप, फ्लैटों की संख्या, फ्लैट के कारपेट एरिया व कितने कीमत पर बेचा जायेगा, इसकी पूरी जानकारी देनी होगी. जब तक प्रमोटर हीरा के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं, तब तक वह कंपनी फ्लैट विक्रय के कोई विज्ञापन नहीं दे पायेगी.
साथ ही इस नये नियम के तहत अब कोई भी प्रमोटर क्रेता को सुपरबिल्ड अप एरिया के अनुसार फ्लैट नहीं बेच पायेगा. अब कारपेट एरिया के अनुसार ही फ्लैट विक्रय करने होंगे. सिर्फ कारपेट एरिया ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार ने कई आर्थिक नियम भी नये अधिनियम में जोड़े हैं. प्रमोटर एक निर्दिष्ट एकाउंट में ही रुपये जमा कर पायेंगे. यदि कोई खरीदार को समय पर फ्लैट नहीं मिलता है, तो फ्लैट देने में जितने अतिरिक्त महीने लगेंगे, उसके एवज में प्रमोटर को फ्लैट खरीदार को ब्याज के साथ आर्थिक मुआवजा भी देना होगा.
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