5 घंटे में पूरा होगा कोलकाता से दिल्ली का सफर, लेकिन कब?

Updated at : 25 Jul 2017 3:02 PM (IST)
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5 घंटे में पूरा होगा कोलकाता से दिल्ली का सफर, लेकिन कब?

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के लोगों को रेलवे एक सौगात दे रहा है. इस महानगर के लोगों को यदि देश की राजधानी दिल्ली में कोई काम हो और अगले दिन कोलकाता में भी जरूरी काम हो, तो वे दिल्ली जाकर लौट सकते हैं और अपना दूसरा काम भी निबटा सकते हैं. चीनी […]

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के लोगों को रेलवे एक सौगात दे रहा है. इस महानगर के लोगों को यदि देश की राजधानी दिल्ली में कोई काम हो और अगले दिन कोलकाता में भी जरूरी काम हो, तो वे दिल्ली जाकर लौट सकते हैं और अपना दूसरा काम भी निबटा सकते हैं.

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जी हां, रेलवे ने इस संबंध में तैयारियां पूरी कर ली है. लेकिन, इस खबर से बहुत ज्यादा खुश होने की भी जरूरत नहीं है. इसके लिए कम से कम 16 साल का इंतजार करना होगा. यह संभव हो पायेगा वर्ष 2031 में. अच्छी बात यह है कि रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने इसकी फाइनल रिपोर्ट जमा कर दी है.

इसके साथ ही तय हो गया है कि कोलकाता और दिल्ली के बीच हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन की परियोजना तैयार है. परियोजना पर वर्ष 2021 से काम शुरू हो जायेगा. पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी के बीच कॉरिडोर बनाया जायेगा. इसके बाद कॉरिडोर का विस्तार कोलकाता तक किया जायेगा.

हाइ-स्पीड और बुलेट ट्रेनों की तकनीक

इस तरह वर्ष 2031 तक दिल्ली से कोलकाता के बीच कॉरिडोर बन कर तैयार हो पायेगा. इससे पहले ही दिल्ली और लखनऊ के बीच बुलेट ट्रेन का परिचालन शुरू हो जायेगा. एक बार कॉरिडोर तैयार हो जाने के बीच कोलकाता से दिल्ली का सफर 5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि इस वक्त इस रूट पर सबसे तेज गति से राजधानी एक्सप्रेस दौड़ती है. इस ट्रेन की स्पीड तकरीबन 140 किलोमीटर है. ट्रेन को कोलकाता से दिल्ली का सफर पूरा करने में अभी 17 घंटे लग जाते हैं.

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परियोजना में सियालदह-हावड़ा और कोलकाता स्टेशन के अलावा शालीमार को प्रांतीय स्टेशन के रूप में दर्शाया गया है. रेल विकास निगम लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजेश प्रसाद ने कहा, ‘हमने पहले कोलकाता स्टेशन को हाई स्पीड ट्रेन के ठहराव के लिए चुना था. लेकिन, ट्रेन में भीड़ अधिक होने की वजह से अपनी योजना को रद्द कर दिया. यदि हम इस स्टेशन को विकसित करते, तो उस पर खर्च बहुत अधिक बढ़ जाता. इसलिए भी हमने शालीमार को चुना है, क्योंकि भविष्य में इसे ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के साथ जोड़ा जा सकेगा.’

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