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बंगाल में दीदी या दादा! किसकी बनेगी सरकार, फैसला आज

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
बंगाल में 2021 में किसकी होगी सरकार, जानिए क्या कहते हैं एग्जिट पोल के नतीजे
बंगाल में 2021 में किसकी होगी सरकार, जानिए क्या कहते हैं एग्जिट पोल के नतीजे
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 में से 292 सीटों की मतगणना रविवार (2 मई 2021) को होगी. आज पता चल जायेगा कि बंगाल में दीदी की सरकार बनेगी या दादा की. तृणमूल कांग्रेस फिर सत्ता में आयेगी या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनेगी. कांग्रेस-वाम मोर्चा-आइएसएफ गठबंधन की वजह से बंगाल में कहीं त्रिशंकु विधानसभा तो नहीं बन जायेगी. आज ही इसका फैसला हो जायेगा.

पांच राज्यों में पिछले दिनों संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के साथ-साथ बंगाल में भी चुनाव कराये गये थे. पूरे देश की निगाहें इस बार बंगाल पर टिकी हैं, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और 10 साल से सरकार चला रही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच कांटे का मुकाबला आठवें चरण के चुनाव के बाद अधिकांश Exit Poll में बताया गया है.

बंगाल में इस बार आठ चरणों में चुनाव कराये गये थे. मुर्शिदाबाद जिला के शमशेरगंज के कांग्रेस उम्मीदवार रेजाउल हक और जंगीपुर के रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के उम्मीदवार प्रदीप कुमार नंदी की कोरोना से मौत की वजह से इन दोनों सीटों के चुनाव को टाल दिया गया. इन दोनों सीटों पर 16 मई को ईद के बाद चुनाव कराये जायेंगे.

आठ चरणों के चुनाव के दौरान कई जगह हिंसक घटनाएं भी हुईं. ममता बनर्जी ने लोगों को सुरक्षा बलों का घेराव करने के लिए उकसाया, तो कूचबिहार के शीतलकुची विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर सुबह-सुबह भाजपा समर्थक की हत्या कर दी गयी. इसी बूथ पर सुरक्षा बलों को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें कथित तौर पर चार तृणमूल समर्थकों की मौत हो गयी.

चुनाव के दौरान कई उम्मीदवारों और निवर्तमान विधायकों की कोरोना की वजह से मौत हो गयी. चुनाव प्रक्रिया के दौरान बंगाल में कोरोना का प्रसार तेजी से हुआ. 5 चरणों का चुनाव समाप्त होने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी ने बाकी बचे 3 चरण के चुनाव एक साथ कराने की मांग की, लेकिन आयोग ने उनकी मांग को मानने से इनकार कर दिया. इसके लिए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को आड़े हाथ लिया.

तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को निशाने पर लिया, तो अमित शाह और पीएम मोदी ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर जमकर निशाना साधा. बंगाल में तोलाबाजी, कट मनी और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर टीएमसी को जमकर लताड़ लगायी.

वहीं, ममता बनर्जी ने केंद्र की पीएम मोदी की सरकार पर नोटबंदी, लॉकडाउन के नाम पर लूट मचाने का आरोप लगाया. उन्होंने केंद्र पर रेलवे, कोयला, जीवन बीमा निगम (एलआइसी), बैंक व तमाम सरकारी संपत्तियों को बेचने का आरोप लगाया. चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने मुस्लिमों से कहा कि यदि बीजेपी की सरकार बंगाल में बन गयी, तो उनलोगों के लिए मुश्किलें बढ़ जायेंगी.

ममता ने यह भी कहा कि यदि मुस्लिमों का वोट बंटा और बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी, तो इस समुदाय के लोगों को डिटेंशन सेंटर में बंद कर दिया जायेगा, क्योंकि पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी देश में नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजनशिप (एनआरसी) लागू करेगी और मुसलमानों से उनके भारत का नागरिक होने का प्रमाण मांगा जायेगा.

वहीं, भाजपा की ओर से पीएम मोदी, अमित शाह समेत तमाम नेताओं ने मुसलमानों को अपनी हर सभा में आश्वस्त करने की कोशिश की कि भगवा दल की मंशा घुसपैठियों को देश से निकालने की है, न कि भारत के मुसलमानों को परेशान करने की. भाजपा के नेताओं ने ममता बनर्जी पर सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (सीएए) और एनआरसी को लेकर गलतबयानी करने का आरोप लगाया.

पीएम मोदी और अमित शाह समेत तमाम बीजेपी के नेताओं ने स्पष्ट किया कि सीएए पड़ोसी देशों से जान बचाकर भागे वहां के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भारत में नागरिकता देने का कानून है, इससे किसी की नागरिकता छिनेगी नहीं. ममता बनर्जी ने एनआरसी के मुद्दे पर हमला किया. लेकिन, बीजेपी के नेता इस मुद्दे पर बोलने से बचते रहे और वे सिर्फ सीएए का मुद्दा उठाते रहे.

बंगाल में बड़ी संख्या में मतुआ समुदाय के लोग रहते हैं, जो बांग्लादेश से भारत आये और दशकों से यहां शरणार्थी का जीवन जी रहे हैं. भाजपा ने इन्हें नागरिकता देने की बात कही, तो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक ने इस समुदाय के लोगों से कहा कि आप पहले से भारत के नागरिक हैं, आपको नागरिकता की जरूरत नहीं है. अब देखना यह है कि लोकसभा चुनाव में इसी मुद्दे पर भाजपा के साथ जाने वाला मतुआ समुदाय इस बार किसके पक्ष में खड़ा होता है.

पहली बार देश के किसी मुख्यमंत्री ने हिंदू वोटरों को लुभाने के लिए अपनी रैलियों में चंडीपाठ किया. ममता बनर्जी अपनी हर रैली में चंडीपाठ करती रहीं. बाद में जब मुस्लिम बहुल इलाकों में चुनाव शुरू हुआ, तो उन्होंने इंशाअल्लाह और ला इलाहा इल्लल्लाह.. कहना शुरू कर दिया. उन्होंने सर्वधर्म प्रार्थना भी की.

पांच चरणों के चुनाव तक तृणमूल और भाजपा भीड़ जुटाने को लेकर बड़े-बड़े दावे करती रही. एक-दूसरे की रैली को फ्लॉप करार देने के लिए उनके वीडियो जारी करते रहे. खासकर टीएमसी की ओर से ममता बनर्जी के लाडले अभिषेक बनर्जी के रोड शो के ड्रोन से बनाये गये वीडियो सोशल मीडया में खूब शेयर किये गये. लेकिन, छठे चरण का चुनाव आते-आते प्रचार की दशा और दिशा दोनों बदल गयी. चुनाव के मुद्दे भी बदल गये.

प्रचार अभियान के दौरान राजीतिक पार्टियों का फोकस एक-दूसरे की योजनाओं में खामियां गिनाने पर था, उनमें भ्रष्टाचार को उजागर करने पर था, लेकिन अब पूरा फोकस कोरोना पर शिफ्ट हो गया. ममता बनर्जी ने कोरोना संक्रमण के बढ़ने के लिए पीएम मोदी, अमित शाह और अन्य राज्यों से प्रचार करने के लिए बंगाल आने वाले भाजपा नेताओं को जिम्मेदार ठहराया.

ममता बनर्जी ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को कोरोना कैरियर तक कह डाला. इसके पहले तृणमूल सुप्रीमो ने पीएम मोदी और अमित शाह समेत तमाम भाजपा नेताओं को बाहरी और गुंडा कहा था. उन्होंने देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को डकैत और लुटेरा भी कहा. अपने गुस्से का इजहार करते समय ममता बनर्जी कई बार अपना आपा खो बैठीं और पीएम मोदी और अमित शाह के लिए अपशब्द तक का इस्तेमाल किया.

अपने अंतिम वर्चुअल रैली में पीएम मोदी ने बंगाल की तृणमूल सरकार और ममता बनर्जी के साथ-साथ उनके भतीजे पर हमला तो जारी रखा, लेकिन ममता बनर्जी का उन्होंने नाम तक नहीं लिया. यहां तक कि उन्होंने इस चुनाव में अपने सबसे लोकप्रिय हुए ‘दीदी, ओ दीदी…’ का भी इस्तेमाल नहीं किया.

Posted By : Mithilesh Jha

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