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एमटीपीएस के रोलर में फंस ठेका श्रमिक की मौत

Updated at : 13 Aug 2024 9:38 PM (IST)
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एमटीपीएस के रोलर में फंस ठेका श्रमिक की मौत

दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के मेजिया थर्मल पावर स्टेशन (एमटीपीएस) में एक हफ्ते के अंदर हुए दूसरे हादसे में एक ठेका श्रमिक की मौत हो गयी. सोमवार शाम करीब 6:00 बजे प्लांट की यूनिट नंबर पांच व छह के टीपी-11 क्षेत्र के रोलर में फंसने से श्रमिक की मौत हो गयी.

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बांकुड़ा.

दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के मेजिया थर्मल पावर स्टेशन (एमटीपीएस) में एक हफ्ते के अंदर हुए दूसरे हादसे में एक ठेका श्रमिक की मौत हो गयी. सोमवार शाम करीब 6:00 बजे प्लांट की यूनिट नंबर पांच व छह के टीपी-11 क्षेत्र के रोलर में फंसने से श्रमिक की मौत हो गयी. जब हादसा हुआ, तो पाकर प्लांट में गुरुवार की घटना का जायजा लेने आये अधिकारी व उक्त पावर प्रोजेक्ट के मुख्य महाप्रबंधक विद्युत भवन के कॉन्फ्रेंस रूम में मीटिंग कर रहे थे. खबर मिलते ही अधिकारी वहां पहुंचे, जहां उन्हें घेर कर बी शिफ्ट के ठेकाकर्मी विरोध जताने लगे और श्रमिक सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाने लगे. ठेकाकर्मियों ने काम बंद कर दिया. मृत ठेका श्रमिक का नाम अनंत उर्फ नाडू घोष(49) बताया गया है. वह गंगगाजलघाटी थाना क्षेत्र के बांकादह गांव का निवासी था.

वह बीते डेढ़ दशक से ठेका कंपनी के साथ काम कर रहा था. मालूम रहे कि पावर प्रोजेक्ट के वार्षिक रखरखाव कार्य से करीब 3.5 हजार ठेकाकर्मी जुड़े हैं. एक सप्ताह के अंदर डीवीसी के एमटीपीएस में दूसरे हादसे से श्रमिकों में भारी आक्रोश है. ध्यान रहे कि बीते गुरुवार को बंद पड़े पावर प्लांट की दूसरी यूनिट के एरिया 6.6 के ब्रेकर में ब्लास्ट होने से एक इंजीनियर व चार ठेका श्रमिक झुलस गये थे. सोमवार को ठेका श्रमिक की हादसे में मौत के बाद प्लांट परिसर में तनाव फैल गया. श्रमिक संगठनों का इल्जाम है कि डीवीसी, श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है. इसे लेकर उसका रवैया लचर रहा है. इधर, पावर प्रोजेक्ट के एक अधिकारी ने बताया कि प्लांट में हुए हादसे की जांच शुरू कर दी गयी है.

बताया गया है कि किसी ट्रेड यूनियन में रहने के बजाय अनंत उर्फ नाड़ू घोष ने अराजनीतिक मंच बना रखा है, जिसके नेता प्रणब कर्मकार, उज्ज्वल ढैंग, गौर कुंडू आदि हैं. इन नेताओं का भी इल्जाम है कि डीवीसी व उसके ठेकेदार, श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह उदासीन हैं. श्रमिकों को जान हथेली पर रख कर काम करना पड़ता है. श्रमिक सुरक्षा की व्यवस्था नहीं होने से आये दिन हादसे होते रहते हैं. यहां डीवीसी के इंजीनियर, टेक्नीशियन व कंपनी के सुपरवाइजर होने चाहिए. पर प्लांट के जोखिम वाले हिस्से में श्रमिक ही जाकर काम करते हैं. गत मार्च में एक हफ्ते के अंदर दो श्रमिकों की मौत हो गयी थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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