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संविधान के स्वामी नहीं, सेवक होते हैं न्यायाधीश : सीजेआइ डीवाइ चंद्रचूड़

Updated at : 29 Jun 2024 9:21 PM (IST)
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संविधान के स्वामी नहीं, सेवक होते हैं न्यायाधीश : सीजेआइ डीवाइ चंद्रचूड़

भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़ ने भारतीय न्यायशास्त्र में ‘संवैधानिक नैतिकता’ लागू करने के महत्व पर जोर देते हुए शनिवार को विविधता, समावेशिता और सहिष्णुता सुनिश्चित करने के लिए अदालतों की प्रतिबद्धता पर जोर दिया. राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (पूर्वी क्षेत्र) के दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में सीजेआइ चंद्रचूड़ ने न्याय वितरण प्रणाली में तकनीकी प्रगति के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित किया.

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कोलकाता.

भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़ ने भारतीय न्यायशास्त्र में ‘संवैधानिक नैतिकता’ लागू करने के महत्व पर जोर देते हुए शनिवार को विविधता, समावेशिता और सहिष्णुता सुनिश्चित करने के लिए अदालतों की प्रतिबद्धता पर जोर दिया. राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (पूर्वी क्षेत्र) के दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में सीजेआइ चंद्रचूड़ ने न्याय वितरण प्रणाली में तकनीकी प्रगति के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित किया.

न्यायाधीश देवता नहीं

प्रधान न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़ ने यहां ”समकालीन न्यायिक विकास और कानून एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से न्याय को मजबूत करना” शीर्षक वाले सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जब लोग अदालतों को न्याय का मंदिर कहते हैं, तो वह मौन हो जाते हैं, क्योंकि इसका मतलब होगा कि न्यायाधीश देवता हैं. जो वे नहीं हैं. वे इसके बजाय लोगों के सेवक हैं, जो करुणा और सहानुभूति के साथ न्याय करते हैं.

प्रधान न्यायाधीश ने न्यायाधीशों को ”संविधान के स्वामी नहीं, सेवक” बताते हुए न्यायपालिका को संविधान में निहित मूल्यों के विपरीत निर्णयों में हस्तक्षेप करने वाले न्यायाधीशों के व्यक्तिगत मूल्यों और विश्वास प्रणालियों के नुकसान के बारे में चेतावनी दी.

गौरतलब है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय और पश्चिम बंगाल न्यायिक अकादमी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम भी मौजूद थे.

केवल आधुनिकीकरण के नाम के लिए आधुनिकीकरण करना सही विचार नहीं

नागरिकों को न्याय का प्रभावी वितरण सुनिश्चित करने में तकनीकी सहायता की आवश्यकता पर सीजेआइ ने कहा कि विचार यह नहीं होना चाहिए कि केवल आधुनिकीकरण के नाम के लिए आधुनिकीकरण करना है. यह कुछ इच्छित चीज के लिए सहयोग की दिशा में एक कदम है. न्यायमूर्ति डीवाइ चंद्रचूड़ ने स्वतंत्रता के बाद से उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये 37,000 से अधिक निर्णयों को अंग्रेजी से संविधान के तहत मान्यता प्राप्त सभी क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए चल रहे कार्य में सहायता करने वाले एआइ-सहायता प्राप्त सॉफ्टवेयर की बात की. उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के डिजिटल प्रारूप को सभी के लिए निशुल्क उपलब्ध कराना, वादियों को यात्रा संबंधी राहत प्रदान करने के लिए अदालतों तक विकेंद्रीकृत पहुंच, अदालत प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना और मामलों का वर्गीकरण करना भी प्रभावी न्याय में सहायता करने वाले प्रौद्योगिकी-संचालित उपायों में से कुछ हैं, जिनके बारे में प्रधान न्यायाधीश ने बात की.

देश का संघीय ढांचा विविधताओं से भरा

सीजेआइ डीवाइ चंद्रचूड़ ने सरकार पर एक निरोधक कारक के रूप में ”संवैधानिक नैतिकता” की धारणा पर विस्तार से बात की, जिसे संविधान के प्रस्तावना मूल्यों से प्राप्त किया जाना चाहिए. उन्होंने देश के संघीय ढांचे को रेखांकित किया, जो बहुत अधिक विविधता से भरा है. सीजेआइ ने ‘भारत की विविधता को संरक्षित करने’ में न्यायाधीशों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने कहा : हम संवैधानिक व्याख्या के विशेषज्ञ हो सकते हैं, लेकिन न्यायपूर्ण समाज की स्थापना अदालत के संवैधानिक नैतिकता के दृष्टिकोण से ही होती है.

दक्षिणेश्वर मंदिर व बेलूड़ मठ पहुंचे मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़

हावड़ा. एक दिवसीय दौरे पर कोलकाता आये सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ शनिवार सुबह नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के कार्यक्रम में शरीक हुए. इसके बाद वह दक्षिणेश्वर मंदिर पहुंचे, जहां मां काली की पूजा-अर्चना की. इस दौरान मंदिर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गयी थी. यहां से वह बेलूड़ मठ गये और महाराज गौतमानंदजी से मुलाकात की. मुख्य न्यायाधीश ने यहां भी पूजा की और प्रसाद ग्रहण किया. वह करीब एक घंटे तक मठ में रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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