सुकांत के प्रस्ताव का भाजपा विधायक ने किया विरोध

Updated at : 26 Jul 2024 1:43 AM (IST)
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सुकांत के प्रस्ताव का भाजपा विधायक ने किया विरोध

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार द्वारा बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में उत्तर बंगाल के आठ जिलों को पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय में शामिल करने का प्रस्ताव दिये जाने पर यहां पार्टी के भीतर ही उनका विरोध शुरू हो गया है

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कहा- 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर बंगाल के लोगों को गुमराह कर रहे हैं सुकांत

कोलकाता. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार द्वारा बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में उत्तर बंगाल के आठ जिलों को पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय में शामिल करने का प्रस्ताव दिये जाने पर यहां पार्टी के भीतर ही उनका विरोध शुरू हो गया है. उत्तर बंगाल स्थित कर्सियांग से भाजपा विधायक बिष्णु प्रसाद शर्मा ने गुरुवार को प्रदेश अध्यक्ष की आलोचना करते हुए उनके प्रस्ताव को अवास्तविक बताते हुए कहा कि यह व्यवहारिक रूप से कभी प्रभावी नहीं हो सकता. मानसून सत्र के दौरान विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत में श्री शर्मा ने यहां तक आरोप लगाया कि सुकांत 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर बंगाल के लोगों को गुमराह कर रहे हैं. दरअसल, प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय शिक्षा व पूर्वोत्तर विकास राज्यमंत्री सुकांत ने बुधवार को पीएम मोदी के साथ बैठक में उत्तर बंगाल के आठ जिलों को उनके मंत्रालय में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा होने पर केंद्रीय आवंटन में आसानी होगी और उत्तर बंगाल का विकास होगा. सुकांत के प्रस्ताव पर कटाक्ष करते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि यह एक अवास्तविक विचार है, जो कभी नहीं हो सकता.

उनके मुताबिक, सिक्किम में नार्थ ईस्टर्न काउंसिल (एनईसी) की भागीदारी को लेकर एक विशेष कानून है, लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं है. उन्होंने दावा किया कि राज्य का आधा हिस्सा कभी भी उत्तरी-पूर्वी परिषद या मंत्रालय का हिस्सा नहीं हो सकता. भाजपा विधायक ने लोकसभा चुनाव में राज्य में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए यहां तक कहा कि सुकांत, चुनावी नतीजे से निराश हैं. 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपने सबसे मजबूत गढ़ उत्तर बंगाल को खो सकती है. इस डर से वह उत्तर बंगाल के लोगों को गुमराह कर रहे हैं. श्री शर्मा ने स्पष्ट कहा कि भाजपा विधायक के तौर पर वह इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते. साथ ही उन्होंने फिर से राज्य के विभाजन की अपनी मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि अगर वह (सुकांत) वास्तव में उत्तर बंगाल के जिलों को उत्तर पूर्वी परिषद में शामिल करना चाहते हैं, तो पहले उसे बंगाल से विभाजित करें. पहले उत्तर बंगाल को अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाये, इसके बाद ऐसी बात करें. ज्ञात हो कि श्री शर्मा पार्टी लाइन से अलग जाकर उत्तर बंगाल को अलग राज्य बनाने की मांग लगातार उठाते रहे हैं.

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