डीएम ऑफिस का युवा कांग्रेस ने किया घेराव बांग्ला में पढ़ाई अनिवार्य करने को दिया ज्ञापन

Updated at : 23 Sep 2025 9:57 PM (IST)
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डीएम ऑफिस का युवा कांग्रेस ने किया घेराव बांग्ला में पढ़ाई अनिवार्य करने को दिया ज्ञापन

डब्ल्यूबीसीएस (एक्जीक्यूटिव) परीक्षा में हिंदी, उर्दू और संताली भाषा को हटाये जाने को लेकर प्रभात खबर द्वारा दो वर्षों तक लगातार मुहिम चलाने के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने अपना फैसला वापस लिया और डब्ल्यूबीसीएस परीक्षा में उक्त तीनों भाषाओं को लागू किया.

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आसनसोल.

डब्ल्यूबीसीएस (एक्जीक्यूटिव) परीक्षा में हिंदी, उर्दू और संताली भाषा को हटाये जाने को लेकर प्रभात खबर द्वारा दो वर्षों तक लगातार मुहिम चलाने के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने अपना फैसला वापस लिया और डब्ल्यूबीसीएस परीक्षा में उक्त तीनों भाषाओं को लागू किया. हालाकिं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में नौकरी के लिए बांग्ला भाषा बोलना, पढ़ना और लिखना का नियम लागू है.

जिसे लेकर प्रभात खबर ने गैर बांग्ला मध्यम स्कूलों में कक्षा दस तक बांग्ला की पढ़ाई नियमित करने को लेकर मुहिम शुरू की. जिसमें स्थानीय सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल हुए और उन्होंने इस मांग को जायज मानते हुए इसके लिए आवाज उठाने की बात कही थी. इसी मुद्दे को लेकर युवा कांग्रेस ने मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया और अतिरिक्त जिलाधिकारी (जनरल) को ज्ञापन सौंपा. जिसमें मांग की गयी कि जिले के सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में माध्यमिक तक बांग्ला भाषा की पढ़ाई को अनिवार्य किया जाए. अतिरिक्त जिलाधिकारी ने उनकी मांगों को आला अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया. मौके पर युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रवि यादव, कांग्रेस नेता शाह आलम खान, काजल दत्त, युवा कांग्रेस के राहुल रंजन, विनय वर्मन, मनीष बर्नवाल, सलाउद्दीन अंसारी, आरिफ़ अंसारी, पल्लव भुइयां, संदीप कुशवाहा, जीशान अंसारी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे. युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रवि यादव ने कहा कि बंगाल हमारी जन्मभूमि है और हम यहीं पले-बढ़े हैं. शिक्षा भी यहीं से प्राप्त की है, आज हमें बाहरी बोला जा रहा है. बांग्ला नहीं बोल पाने के कारण राज्य के विभिन्न इलाकों में प्रताड़ित किया जा रहा है. नौकरियों में बांग्ला भाषा लिखना, पढ़ना और बोलना अनिवार्य कर दिया गया. हमें अपनी शिक्षा से इस राज्य में अब नौकरी मिलने की संभावना नहीं के बराबर है. इसमें हमारी गलती कहां है. राज्य सरकार ने गैर बांग्ला माध्यम स्कूलों में जिस प्रकार शिक्षा दी, हमलोगों ने वही लिया. अब नौकरी में भेदभाव क्यों हो रहा है? सरकार यदि बांग्ला भाषा को अनिवार्य करना चाहती है तो हमलोग इसका पूर्णरूप से समर्थन करते हैं. बस सरकार से हमारी यही मांग है कि राज्य में स्थित सरकारी या गैर सरकारी सभी स्कूलों में कक्षा दस तक बांग्ला भाषा की पढ़ाई को अनिवार्य कर दिया जाए. ताकि पांच साल बाद आज की स्थिति न रहे. जिसे लेकर जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया.

प्रदेश कांग्रेस के सचिव प्रसेंजीत पुईतुंडी ने कहा की सरकार के समर्थन से ही हिंदी व उर्दू भाषियों पर हमले हो रहे हैं, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हम चाहते हैं कि भविष्य में किसी भी समुदाय को बंगाल में भेदभाव का सामना न करना पड़े. इसलिए सभी स्कूलों में बंगला पढ़ाई अनिवार्य किया जाए. आसनसोल नगर निगम के पार्षद व कांग्रेस नेता एस. एम. मुस्तफा ने कहा कि बंगाल में रहकर भी विद्यार्थी जब हिंदी या उर्दू माध्यम से पढ़ते हैं तो उन्हें विभिन्न परीक्षाओं में पिछड़ना पड़ता है. इसलिए बंगला को अनिवार्य करना समय की मांग है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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