पांचमुड़ा की टेराकोटा गुड़िया ने देश-विदेश में बनायी पहचान

Updated at : 24 Feb 2025 9:52 PM (IST)
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पांचमुड़ा की टेराकोटा गुड़िया ने देश-विदेश में बनायी पहचान

जिले के पांचमुड़ा ग्राम में बनी टेराकोटा की गुड़िया आज भी लोकप्रिय है. ये गुड़िया न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुकी है. इन गुड़ियों की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही देश-विदेश में इनकी मांग भी बढ़ी है.

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बांकुड़ा.

जिले के पांचमुड़ा ग्राम में बनी टेराकोटा की गुड़िया आज भी लोकप्रिय है. ये गुड़िया न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुकी है. इन गुड़ियों की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही देश-विदेश में इनकी मांग भी बढ़ी है. पांचमुड़ा के कलाकार विश्वनाथ कुंभकार ने 1992 में लंबे गर्दन और लंबे हाथ वाली गुड़ियों का निर्माण शुरू किया था. राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने वाले रासबिहारी कुंभकार के पोते विश्वनाथ ने अपने दादा से इसे बनाने की कला सीखी थी. विश्वनाथ कुंभकार ने बताया कि इन गुड़ियों को बनाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी. इन गुड़ियों की कीमतें 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक हैं. विश्वनाथ कुंभकार ने बताया कि इन गुड़ियों की मांग देश-विदेश में बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ‘हमें इन गुड़ियों के लिए देश-विदेश से ऑर्डर मिल रहे हैं. हम इन गुड़ियों को बनाने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं.’ 1997 में इन गुड़ियों को दिल्ली के प्रगति मैदान में प्रदर्शनी में शामिल किया गया था. विदेशियों ने इसे काफी पसंद किया. दिल्ली से लौटने के बाद प्रसिद्ध डिजाइनर आशीष पान के नेतृत्व में कोलकाता के ढाकुरिया की एक निर्यात कंपनी के साथ गुड़ियों को बेचने के लिए समझौता किया गया. गुड़ियों को यूके, हवाना और रूस में निर्यात किया जाने लगा. 33 वर्ष पहले इन गुड़ियों को विश्वनाथ कुंभकार ने आएशी नाम दिया था. यह नाम भी लोगों को खूब पसंद आता है.

इन गुड़ियों की लोकप्रियता को देखते हुए, पांचमुड़ा ग्राम को टेराकोटा हस्तशिल्प के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. पांचमुड़ा के टेराकोटा कार्य का इतिहास विष्णुपुर के मल्ल राजाओं के समय से जुड़ा हुआ है. वर्तमान में ग्राम में 80 परिवार टेराकोटा कार्य से जुड़े हुए हैं. इन गुड़ियों की विशेषता है कि ये पूरी तरह से हाथ से बनायी जाती हैं और इनमें किसी भी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता है. यही कारण है कि ये गुड़िया न केवल सुंदर दिखती हैं, बल्कि ये पर्यावरण अनुकूल भी हैं. विश्वनाथ कुंभकार ने बताया कि इन गुड़ियों को बनाने के लिए उन्हें कई पुरस्कार पुरस्कार भी मिले हैं. इन गुड़ियों की लोकप्रियता को देखते हुए, पांचमुड़ा ग्राम को टेराकोटा हस्तशिल्प के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. यह ग्राम देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहा है और लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.

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