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सातग्राम इनक्लाइन में बालू भराई में चूक, कोयला उत्पादन पर रोक

24 Jan, 2026 9:31 pm
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सातग्राम इनक्लाइन में बालू भराई में चूक, कोयला उत्पादन पर रोक

इसीएल के सातग्राम श्रीपुर एरिया के अधीन सातग्राम इनक्लाइन कोलियरी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रबंधन पर भारी पड़ी है. खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ने खदान के अंदर सही समय पर बालू भराई नहीं होने से उत्पादन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.

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रानीगंज.

इसीएल के सातग्राम श्रीपुर एरिया के अधीन सातग्राम इनक्लाइन कोलियरी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रबंधन पर भारी पड़ी है. खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ने खदान के अंदर सही समय पर बालू भराई नहीं होने से उत्पादन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. डीजीएमएस के इस कड़े आदेश के बाद खदान में कोयला रेजिंग बंद हो गयी है, जिससे श्रमिकों के बीच हड़कंप व भविष्य को लेकर चिंता व्याप्त है.

बीते 20 जनवरी को सीतारामपुर क्षेत्र संख्या-III के खान सुरक्षा निदेशक द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि दिशरगढ़ (आर-VI) सीम के पैनल नंबर-21 में 22 स्थानों पर रिक्तियां मौजूद हैं. नियमतः केवल 500 m^3 की अनुमति थी, जबकि मौके पर 3600 m^3 का ””स्टोविंग लैग”” पाया गया. इसे कामगारों के लिए ””तत्काल खतरा”” मानते हुए महानिदेशालय ने धारा 38(1)(बी) के तहत उत्पादन बंद करने का आदेश जारी किया है.

प्रबंधन व राज्य सरकार को यूनियनों ने घेरा

कोलियरी में उत्पादन बंद होने से श्रमिक संगठन आक्रोशित हैं.भारत की कोलियरी मजदूर सभा सीटू सचिव हिमाद्री चक्रवर्ती ने कहा कि खदान में उच्च गुणवत्ता वाला कोयला मौजूद है. उन्होंने तर्क दिया कि 3600 क्यूबिक बालू की कमी इतनी बड़ी समस्या नहीं है कि खदान बंद की जाए. उन्होंने बताया कि भारी बारिश के कारण बालू की आपूर्ति बाधित हुई थी, लेकिन अब आपूर्ति शुरू हो गई है. उन्होंने प्रबंधन से आदेश पर पुनर्विचार करने और राज्य सरकार से जल्द बालू उपलब्ध कराने की मांग की.

एटक सचिव जय किशन मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन इस कोलियरी को घाटे में बताकर बंद करने की साजिश रच रहा है. उन्होंने बालू संकट का कारण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा डंपरों में जीपीएस लगाने की अनिवार्यता के कारण डंपर मालिकों और सरकार के बीच खींचतान चल रही है, जिसका खामियाजा खदान और मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है,जबकि इस कोलियरी में 400 श्रमिक कार्यरत है,एवं कोयला का इतने बड़े पैमाने पर भंडार मौजूद है कि कई वर्षों तक यह कोलियरी चल पाये.

प्रबंधन ने साधी चुप्पी डीजीएमएस के इस कड़े आदेश और श्रमिक संगठनों के आरोपों के बीच सतग्राम इनक्लाइन के मैनेजर, एजेंट और सातग्राम-श्रीपुर एरिया के महाप्रबंधक ने फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. फिलहाल खदान में केवल वही श्रमिक प्रवेश कर रहे हैं जो सुरक्षा और रखरखाव कार्यों से जुड़े हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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