नहीं निकली महावीर अखाड़ा शोभायात्रा
Updated at : 07 Oct 2025 10:08 PM (IST)
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प्रशासन द्वारा तय नये रूट को लेकर असहमति, दशकों पुरानी परंपरा एक बार फिर टूटी
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रानीगंज. विजयादशमी के बाद और कोजागरी लक्ष्मी पूजा के अगले दिन रानीगंज में हर साल निकलने वाली ऐतिहासिक महावीर अखाड़ा शोभायात्रा इस वर्ष भी नहीं निकली. प्रशासन द्वारा तय किये गये नये रूट को लेकर अखाड़ा कमेटियों की असहमति के कारण यह परंपरा लगातार कुछ वर्षों से ठप पड़ी हुई है. इस स्थिति से स्थानीय लोगों में गहरी निराशा देखी जा रही है.
2019 में रामनवमी के दौरान हुए विवाद के बाद प्रशासन ने शोभायात्रा के लिए नये दिशा-निर्देश जारी किये और पुराने पारंपरिक मार्ग को बदल दिया था. अखाड़ा कमेटियों ने इन निर्देशों को मानने से इनकार करते हुए पुराने रूट पर ही यात्रा निकालने की मांग की. शलडांगा बजरंग क्लब के सचिव विजय गौंड़ ने बताया कि इस बार भी अखाड़ा कमेटियों ने पुलिस प्रशासन की शांति बैठक में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि वे अपनी पुरानी परंपरा से समझौता नहीं करना चाहते.पुराने रूट की मांग और परंपरा को बचाने का प्रयास
हालांकि, 2020 और 2021 में तत्कालीन थाना प्रभारी सुब्रतो घोष के प्रयासों से नये रूट के तहत सीमित रूप से अखाड़े निकाले गये थे — एक बार रोबिन सेन स्टेडियम तक और दूसरी बार बस स्टैंड तक — जहां कलाकारों ने करतब दिखाये थे. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वैसी भव्य शोभायात्रा नहीं हो पा रही है, जैसी पहले होती थी. अखाड़ा कमेटियों ने परंपरा को जीवित रखने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में पूजा-पाठ और महावीर झंडा स्थापना जारी रखी है. रानीगंज में कुल आठ अखाड़ा कमेटियां सक्रिय थीं, जिनमें शलडांगा बजरंग क्लब, नवयुवक संघ (हटिया), खाखी बाबा मंडली (हटिया तालाब), गोपाल बांध सर्वाना, महावीर कोलियरी, हरिश्चंद्र क्लब (तिलक रोड), महाराणा प्रताप बस स्टैंड बालक समिति (बुजीरबांध), श्री महावीर व्यायाम समिति और रक्षा काली महावीर अखाड़ा (काली तला) शामिल हैं.‘अखाड़ा रानीगंज की पहचान है’
नवयुवक संघ (हटिया) के सदस्य शशि महतो ने बताया कि उनका संगठन 1934 से अखाड़े का आयोजन कर रहा है. यह रानीगंज की सबसे पुरानी अखाड़ा परंपरा है, जो 91 वर्षों से चली आ रही थी. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक बाधाओं के बावजूद वे परंपरा निभाने के लिए महावीर झंडा लगा रहे हैं और पूजा कर रहे हैं. शशि महतो ने प्रशासन से अपील की कि रानीगंज की इस ऐतिहासिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए पुराने रूट को फिर से बहाल किया जाये.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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