साउथ एशिया योगासन कंपीटिशन में जीता गोल्ड

Updated at : 22 Oct 2025 9:55 PM (IST)
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साउथ एशिया योगासन कंपीटिशन में जीता गोल्ड

कुल्टी थाना क्षेत्र के नियामतपुर लिथुरिया रोड इलाके की निवासी टुंपा नंदी (53) ने नेपाल में कीर्तिमान कायम किया. साउथ एशिया योगासन प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल जीत कर देश के साथ पश्चिम बंगाल व अपने इलाके का नाम रोशन किया.

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आसनसोल/नियामतपुर.

कुल्टी थाना क्षेत्र के नियामतपुर लिथुरिया रोड इलाके की निवासी टुंपा नंदी (53) ने नेपाल में कीर्तिमान कायम किया. साउथ एशिया योगासन प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल जीत कर देश के साथ पश्चिम बंगाल व अपने इलाके का नाम रोशन किया. नेपाल से लौटने के बाद उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है. बुधवार को कुल्टी ब्लॉक कांग्रेस की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया. 53 साल उम्र में श्रीमती नंदी यह साबित कर दिया कि इंसान यदि कुछ करने की ठान ले तो वह उसे पूरा कर लेता ही, बस इच्छाशक्ति मजबूत हो.

गौरतलब है कि श्रीमती नंदी का मायके और ससुराल दोनों ही कुल्टी थाना इलाके में है. डिशेरगढ़ में उनका मायके है तो नियामतपुर में ससुराल है. आठ वर्ष पहले उनके पति का देहांत हुआ. उनके दो बेटे हैं. जिसमें एक की शादी हुई है, जो अपनी मां के साथ रहता है. दूसरा बेटा दिल्ली में नौकरी करता है. बचपन से ही टुंपा योगा की दीवानी रही है. कम उम्र में ही पति का साथ छूटने के बाद सारी जिम्मेदारियां निभाते हुए भी उन्होंने योगा को नहीं छोड़ा और योगा ही आज पूरे विश्व में उनकी पहचान बन गयी.

गुरु सुचरिता देबनाथ के कहने पर लिया साउथ एशिया योग प्रतियोगिता में भाग

श्रीमती नंदी के बेटे छोटू ने बताया कि उनकी मां की गुरु सुचरिता देबनाथ है, वह आसनसोल में रहती हैं. उन्होंने ही मां को नेपाल में अयोजित साउथ एशिया योगासन प्रतियोगिता के उत्साहित किया और भागीदारी में हर संभव मदद की. इस प्रतियोगिता में साथ देशों से प्रतिभागी शामिल हुए थे. जिसमें मां ने अव्वल आकर इतिहास रच दिया. अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में भागीदारी के लिए तैयारी शुरू कर दी है.

आठ साल की उम्र में मिला था कुल्टी की योगरानी का खिताब

टुंपा नंदी के बड़े बेटे पारिजात नंदी ने बताया कि उनकी मां बचपन से ही योगासन करती हैं. योगासन ही उनकी पहचान है. आठ साल की उम्र में उन्हें कुल्टी में योगासन प्रतियोगिता जीता था, जिसके बाद उन्हें कुल्टी की योगा रानी का खिताब मिला था. शादी के बाद भी वह योगा को अपना साथी बनाकर रखी. उनका मूल मंत्र है ””””हेल्थ इस वेल्थ””””. इसी पर वह हमेशा अमल करती हैं. पिताजी के निधन के बाद योगा को ही उन्होंने अपना साथी बना लिया. घर में ही योगा की क्लास शुरू कर दी. 40 महिलाएं योगा सीखने आतीं है. इसके अलावा भी इलाके के कुछ बड़े अधिकारियों के विशेष अनुरोध पर वह उनके घरों में जाकर उनकी पत्नियों को योगा का प्रशिक्षण देती हैं. पिछले साल नवम्बर माह में कोलकाता में आयोजित क्रीड़ा प्रतियोगिता में 50 से 60 साल उम्र कैटेगरी में 100 मीटर दौड़ में प्रथम और 200 मीटर दौड़ में द्वितीय हुई थी.

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