श्रमिकों का नहीं, निजी संस्थाओं का विकास कर रही केंद्र सरकार : मीनाक्षी

इसीएल मुख्यालय का 11 सूत्री मांगों के समर्थन में सीएमएसआइ ने किया घेराव
देश की संपदा बेचने में जुटा है केंद्र, इसे सबको मिल कर रोकना होगा सीएमडी के साथ यूनियन नेताओं की हुई बैठक, 13 सितंबर को सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा का दिन तय आसनसोल/नितुरिया. सीटू से संबद्ध भारतीय कोलियरी मजदूर सभा (सीएमएसआइ) की केंद्रीय कमेटी सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार एक के बाद एक देश की सरकारी संपत्तियों को बेचने में जुटी है. श्रमिकों के हित को लेकर यूनियनों की लंबी लड़ाई के बाद कोयला खदानों का राष्ट्रीयकारण हुआ, वर्तमान सरकार सारे कोयला खदानों को एक-एक करके पुनः निजीकरण कर रही है. यह सरकार श्रमिक हित को दरकिनार करके उद्योपतियों के स्वार्थ के लिए काम कर रही है. कोयला खदानों को एमडीओ रेवेन्यू शेयरिंग मोड में दे रही है. इसमें सारा कुछ निजी संस्था के पास होगा. कोयला खदानों में काम करनेवाले निजी संस्थाओ के कर्मियों को आज तक हाइपर कमेटी की अनुसंशा के आधार पर वेतन नहीं मिला है. श्रमिकों का सिर्फ शोषण हो रहा. जो आगामी दिनों में और भी बढ़नेवाला है. जिसे लेकर सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी. मंगलवार सुबह 11 सूत्री मांगों को लेकर इसीएल मुख्यालय के समक्ष सीएमएसआइ का प्रदर्शन के दौरान भीड़ को संबोधित करते हुए सुश्री मुखर्जी ने उक्त बातें कही. मौके पर सीएमएसआइ केंद्रीय कमेटी के सदस्य आभाष रायचौधरी, गौरांग चटर्जी, सुजीत मुखर्जी सहित स्थानीय अनेकों नेता व कार्यकर्ता उपस्थित थे. नेताओं ने अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक सतीश झा के साथ मुलाकात की और अपनी 11 सूत्री मांगों का ज्ञापन उन्हें सौंपा. सीएमएसआइ नेता श्री चटर्जी ने बताया कि सीएमडी के साथ सभी मुद्दों 15 मिनट तक चर्चा हुई. सीएमडी ने सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए 13 सितंबर का समय दिया है. उस दिन विस्तृत चर्चा होगी. गौरतलब है इसीएल प्रबंधन ने अपने तीन खदानों चिनाकुड़ी एक व तीन नम्बर माइन्स और दुबेश्वरी कोलियरी को माइन्स डेवलपर ऑपरेशन (एमडीओ) रेवेन्यू शेयर मोड पर दिया है. इसमें सारा कार्य निजी संस्था करेगी, कोयला बेचने का अधिकार सिर्फ इसीएल के पास होगी. कोयला जिस भी कीमत पर बिकेगी उसका 92 फीसदी हिस्सा निजी संस्था का और आठ फीसदी हिस्सा इसीएल का होगा. इस प्रक्रिया का यूनियनों ने विरोध किया है. यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है. खदानों को निजी मोड में डालकर वर्ष 1973 के पहले का दौर वापस ला रही है. जहां श्रमिकों को जानवरों से भी बुरी हालत में कार्य कराया जाता था. सीएमएसआइ नेता श्री चटर्जी ने कहा कि एमडीओ रेवेन्यू शेयरिंग मोड और निजीकरण को बंद करना, ठेका श्रमिकों को हाइपर कमेटी की अनुसंशा के आधार पर वेतन देना, धंसान प्रभावित क्षेत्र के गांवों का पुनर्वास करना, बंद खदानों को चालू करना सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया और ज्ञापन दिया गया. सीएमडी को कहा गया कि बंद खदानों को निजी हाथों के देने के बजाय कंपनी खुद चलाये. इसके साथ ही श्रमिकों से जुड़ी विभिन्न मुद्दों पर बात हुई. 13 सितंबर को सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी.
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