बंगाल चुनाव से 4 दिन पहले दुर्गापुर में बंद हो गये मयखाने, शराब पीने वाले परेशान

Published by :Mithilesh Jha
Published at :20 Apr 2026 8:53 PM (IST)
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Durgapur Liquor Shops Closed West Bengal Elections 2026

दुर्गापुर में बंद पड़ी शराब की दुकान.

Durgapur Liquor Shops Closed: दुर्गापुर में चुनाव से 4 दिन पहले ही शराब की दुकानें बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है. आबकारी विभाग ने 48 घंटे की बजाय 96 घंटे पहले ही शराबबंदी लागू कर दी है. इसने सुरा प्रेमियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

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Durgapur Liquor Shops Closed| दुर्गापुर, नीरज श्रीवास्तव : पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले आबकारी विभाग और चुनाव आयोग के एक फरमान ने शराब के शौकीनों को परेशान कर दिया है. दुर्गापुर शहर समेत पूरे जिले में सोमवार सुबह से ही शराब की दुकानें बंद कर दी गयीं.

पहले 48 घंटे पहले बंद होती थीं शराब की दुकानें

आमतौर पर चुनाव से 48 घंटे पहले शराब की दुकानें बंद होती थीं, लेकिन इस बार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए वोटिंग से 96 घंटे यानी पूरे 4 दिन पहले ही दुकानों पर ताला जड़ दिया. अचानक हुए इस फैसले से सुरा प्रेमियों में भारी निराशा और बेचैनी देखी जा रही है.

प्रशासन ने क्यों बदला ड्राई डे का नियम?

आबकारी विभाग के अनुसार, चुनाव के दौरान किसी भी तरह की अशांति को रोकने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है. अक्सर देखा गया है कि चुनाव से ठीक पहले शराब की मांग काफी बढ़ जाती है. इससे हिंसा और विवाद की आशंका बढ़ जाती है.

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सरकारी शराब डिपो से सप्लाई भी रोकी गयी

प्रशासन का यह भी मानना है कि चुनाव से पहले मतदाताओं को शराब का लालच देकर प्रभावित करने की कोशिश की जाती है. इस प्रलोभन को रोकने के लिए शराबबंदी की अवधि को 48 घंटे से बढ़ाकर 96 घंटे कर दिया गया है. दुकानों के साथ-साथ सरकारी शराब डिपो से भी सप्लाई रोक दी गयी है, ताकि कोई स्टॉक जमा न कर सके.

Durgapur Liquor Shops Closed: दुकानों पर पहुंचे लोग हुए निराश

सोमवार को जैसे ही लोग अपनी नियमित जरूरतों के लिए दुकानों पर पहुंचे, उन्हें वहां सन्नाटा मिला. शराब प्रेमियों का कहना है कि जब वोटिंग में अभी 3 दिन बचे हैं, तो दुकानें आज से ही क्यों बंद कर दी गयीं? कई लोगों ने 20 अप्रैल की रात तक अपनी जरूरत का स्टॉक जुटाने की योजना बनायी थी, लेकिन अचानक दुकानें बंद होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया.

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पश्चिम बर्धमान की 9 सीटों पर सुरक्षा का पहरा

पश्चिम बंगाल के जिन 16 जिलों में 23 अप्रैल को पहले फेज की वोटिंग होगी, उनमें पश्चिम बर्धमान जिले की 9 महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं. दुर्गापुर के औद्योगिक क्षेत्र में चुनावी माहौल के बीच शराबबंदी को कड़ाई से लागू करना पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके.

दुर्गापुर की गलियों में मयखानों पर लगे ‘दुकान बंद’ के बोर्ड

दुकान मालिकों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल सरकारी आदेश का पालन कर रहे हैं. फिलहाल, दुर्गापुर की गलियों में मयखानों के बाहर लगे ‘दुकान बंद’ के बोर्ड शराब के शौकीनों के लिए किसी झटके से कम नहीं है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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