परबेलिया दुर्गापूजा में कला और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम

Updated at : 18 Sep 2025 10:01 PM (IST)
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परबेलिया दुर्गापूजा में कला और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम

इसीएल के परबेलिया फुटबॉल मैदान में आयोजित होने जा रही 21वीं वर्ष की दुर्गापूजा इस बार कला व लोकसंस्कृति के अनोखे संगम को प्रदर्शित करेगी.

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नितुरिया.

इसीएल के परबेलिया फुटबॉल मैदान में आयोजित होने जा रही 21वीं वर्ष की दुर्गापूजा इस बार कला व लोकसंस्कृति के अनोखे संगम को प्रदर्शित करेगी. आयोजन समिति परबेलिया न्यू सार्वजनिन दुर्गापूजा कमेटी के अध्यक्ष टीके दासगुप्ता, सचिव कृष्णा महतो, कोषाध्यक्ष संजय महतो, संयुक्त सचिव सुजीत मुखर्जी और संयोजक हरेराम सिंह ने बताया कि इस बार का कुल बजट 15 लाख रुपये है. नदिया जिले के नवद्वीप से आए 35 कारीगर दिन-रात मंडप निर्माण में जुटे हैं, जबकि मां दुर्गा की प्रतिमा दुर्गापुर से मंगायी जा रही है.

‘रूपांतरेर रात्री’ थीम पर सज रहा पंडाल

इस बार का पंडाल परंपरागत कला और लोकसंस्कृति का अद्भुत मिश्रण होगा. सजावट में काठ का पुतुल, हुगला पत्ता, झुड़ी, बांसुरी, पीतल की थाल और पक्षियों का घोंसला शामिल किया जा रहा है. इस वर्ष की थीम ‘रूपांतरेर रात्री’ है, जो रूप और संस्कृति के परिवर्तन का संदेश देगी. बारिश के मौसम में निर्माण कार्य में कठिनाइयों के बावजूद कारीगर पंडाल को आकर्षक और मौलिक रूप देने में जुटे हुए हैं. मां दुर्गा इस बार हाथी पर आगमन कर रही हैं. इस संदेश को दर्शाने के लिए मंडप के बाहर हाथी का मॉडल भी तैयार किया जा रहा है.

उद्घाटन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

पूजा का उद्घाटन 25 सितंबर को तृतीया के दिन बांकुड़ा के सांसद अरूप चक्रवर्ती और जामुड़िया के विधायक हरेराम सिंह करेंगे. पूजा के दिनों में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. विजयादशमी के दिन ‘पंचफोरन बैंड’ अपनी प्रस्तुति देगा. हर वर्ष की तरह इस बार भी जरूरतमंदों के बीच वस्त्र वितरण किया जायेगा. कमेटी के संयोजक हरेराम सिंह ने कहा कि यह पूजा विशेषकर परबेलिया कोलियरी के श्रमिकों और बाजार के दुकानदारों के योगदान से संभव हो पाती है. यह हमारी एकता और संस्कृति का प्रतीक है. पूजा के समापन पर कोलियरी श्रमिकों और दुकानदारों के बीच मिठाई वितरण किया जायेगा.

यहां का आयोजन वर्षों से राज्य सरकार के पुरस्कारों में स्थान पाता रहा है. इस बार भी अनोखी थीम और सामाजिक कार्यों के कारण लोगों के बीच यह पूजा चर्चा का विषय बनी रहेगी.

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