भारतीय समाज, राजनीति पर डॉक्टर भीम राव आंबेडकर का काफी प्रभाव
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सालतोरा नेताजी सेंटेनरी कॉलेज में दो दिवसीय यूजीसी प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी 60 से अधिक प्राध्यापकों ने प्रस्तुत किये संबंधित शोधपत्र, महत्वपूर्ण व्याख्यान आसनसोल : बांकुडा जिले के सालतोरा नेताजी सेंटेनरी कॉलेज में दो दिवसीय यूजीसी प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन बुधवार को हुआ. ‘डॉ भीम राव अंबेडकर: इंडियन सोसाइटी एवं इंडियन पोलिटिक्स’ विषय पर सेमिनार […]
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सालतोरा नेताजी सेंटेनरी कॉलेज में दो दिवसीय यूजीसी प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी
60 से अधिक प्राध्यापकों ने प्रस्तुत किये संबंधित शोधपत्र, महत्वपूर्ण व्याख्यान
आसनसोल : बांकुडा जिले के सालतोरा नेताजी सेंटेनरी कॉलेज में दो दिवसीय यूजीसी प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन बुधवार को हुआ. ‘डॉ भीम राव अंबेडकर: इंडियन सोसाइटी एवं इंडियन पोलिटिक्स’ विषय पर सेमिनार का आयोजन इतिहास विभाग के जयमीनी कॉलेज बेलियाताड के सहयोग से किया गया.
सेमिनार में मगध विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर पीयूष कमल सिन्हा, रांची विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डीके शरण, प्रोक्टर प्रोफेसर दिवाकर मिंज, बर्दवान विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ प्रदीप कुमार चट्टोपाध्याय, मानबाजार महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर प्रदीप कुमार मंडल, आसनसोल गल्र्स कॉलेज के टीआइसी डॉ संदीप घटक, संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ विनायक कुमार मिश्र, बांकुडा विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ शंकर दास, सालतोडा कॉलेज के गवर्निग बॉडी के अध्यक्ष कालीपद राय, प्रसिद्ध शिक्षाविद दिनतारण बंदोपाध्याय, सालतोडा कॉलेज के टीआइसी प्रोफेसर संयज प्रसाद, इतिहास विभाग के प्रोफेसर मनोहर कुमार आदि ने डॉ भीम राव अंबेडकर के जीवन, उनके दर्शन, संविधान रचना के द्वारा भारतीय समाज और भारतीय राजनीति को दिशा दिखाने में उनके अवदानों पर विस्तृत आलोचना की.
संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर ने दलित आंदोलनों, गांधी के साथ उनके विचारों से भिन्नता पर भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधार में अंबेडकर के अवदान, संविधान के द्वारा भारतीय समाज को सामाजिक न्याय प्रदान करने पर धार्मिक दर्शन के द्वारा समाज को दिशा दिखाने पर उनके योगदानों के विभिन्न पहलूओं को सेमिनार में प्रस्तुत किया गया. सेमिनार में झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल के विभिन्न विश्वविद्यालय महाविद्यालय से आये 60 अध्यापकों ने शोध पत्र प्रस्तुत किये. एक सौ से अधिक स्टूडेंटस ने सेमिनार में अपनी भागीदारी दी. कॉलेज के टीचर्स काउंसिल के अध्यक्ष डॉ अनिर्वाण मन्ना ने सफल संचालन के लिए प्रोफेसर संजय प्रसाद की प्रशंसा की.
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