ललमटिया खदान हादसा की जांच दो माह में हो पूरी

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आसनसोल : झारखंड हाइकोर्ट ने मंगलवार को इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) की राजमहल परियोजना की लालमटिया कोयला खदान में हुई दुर्घटना के मामले में दायर लोकहित याचिका पर सुनवायी की. कोर्ट ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) को दो माह में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. जांच रिपोर्ट को कोर्ट में प्रस्तुत करने को […]

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आसनसोल : झारखंड हाइकोर्ट ने मंगलवार को इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) की राजमहल परियोजना की लालमटिया कोयला खदान में हुई दुर्घटना के मामले में दायर लोकहित याचिका पर सुनवायी की. कोर्ट ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) को दो माह में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है.
जांच रिपोर्ट को कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है. कोर्ट ने खान सुरक्षा महानिदेशालय तथा प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद उक्त निर्देश दिया. सनद रहे कि ओबी डंप के धंसान से उस पर कार्य कर रहे 23 श्रमिकों की मौत की पुष्टि की गयी है.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश प्रदीप कुमार मोहंती तथा न्यायाधीश आनंद सेन की खंड़पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुयी. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ मार्च की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्‘ खान सुरक्षा महानिदेशालय की ओर से पूर्व में दिये गये जबाब को दोहराया गया. बताया गया कि 35 कर्मी कार्यस्थल पर कार्य कर रहे थे. जिसमें से चार श्रमिक रेस्ट पर चले गये थे. कुछ वापस हो गये थे. 23 कर्मी कार्य कर रहे थे.
हादसे के बाद 18 श्रमिकों के शव बरामद किये गये. पांच कर्मी अभी भी लापता है. वहीं प्रार्थी की ओर से पूरक शपथ पत्र दायर कर बताया गया कि ई-रजिस्टर के आधार पर 47 कर्मी कार्यरत थे. उल्लेखनीय है ्कि प्रार्थी मोहम्मद सरफराज ने लोकहित याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि बीते 30 दिसंबर, 2016 को खदान दुर्घटना हुयी थी. जिसमें काफी संख्या में मजदूर दब गये थे. दुर्घटना में दर्जनों मजदूरों की मौत हो गयी थी. प्रार्थी ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर खदान से कोयला निकालने का आरोप लगाया है. इसमें इसीएल तथा खनन कार्य कर रही महालक्ष्मी कंपनी (आउटसोर्सिग) की मिलीभगत है. मामले की सीबीआ िसे जांच कराने की मांग की गयी थी. सनद रहे कि यह मामला बीते 21-22 जनवरी को केरल में हुयी जेबीसीसीआइ-10 की बैठक में भी उठा था.
यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रबंधन इस खदान दुर्घटना में 23 श्रमिकों के दबने की पुष्टि कर रहा है. लेकिन सिर्फ 18 श्रमिकों के ही शव निकाले जा सके हैं. इस स्थिति में उन पांच श्रमिकों का क्या होगा, जिनके शव नहीं निकाले जा सके हैं? प्रबंधन ने स्वीकार किया कि स्थिति काफी खतरनाक होने के कारण ही मलवे से रेस्क्यू कर शेष पांच श्रमिकों को निकालने का कार्य स्थगित कर दिया गया है. यूनियनों की मांग पर प्रबंधन ने कहा कि बिना शव मिले उन श्रमिकों को मृत घोषित नहीं किया जा सकता है. इस स्थिति में इन पांच श्रमिकों के परिजनों को कंपनी के स्तर से पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद की जायेगी. यूनियन प्रतिनिधियों ने इस दुर्घटना की कोर्ट ऑफ इनक्वायरी की मांग की है.
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