सांसद मेले को सशर्त अनुमति
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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आसनसोल नगर निगम व राज्य सरकार की खिंचाई आसनसोल : कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश विश्वनाथ समादार की खंडपीठ ने गुरुवार को केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं व उपलब्धियों को लेकर 13 जनवरी से स्थानीय लोको स्टेडियम में होनेवाले तीन दिवसीय सांसद मेले के आयोजन की सशर्त्त अनुमति दे दी. इसके पूर्व, खंडपीठ ने दो चरणों […]
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आसनसोल नगर निगम व राज्य सरकार की खिंचाई
आसनसोल : कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश विश्वनाथ समादार की खंडपीठ ने गुरुवार को केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं व उपलब्धियों को लेकर 13 जनवरी से स्थानीय लोको स्टेडियम में होनेवाले तीन दिवसीय सांसद मेले के आयोजन की सशर्त्त अनुमति दे दी. इसके पूर्व, खंडपीठ ने दो चरणों में इसकी सुनवाई की. पहले चरण में नगर निगम प्रशासन व राज्य सरकार के प्रति कई कड़ी टिप्पणियां की और अतिरिक्त महाधिवक्ता से दोपहर दो बजे तक उनसे उनकी राय मांगी.
दूसरे दौर की सुनवाई के बाद मेला आयोजन की अनुमति मिली. कोर्ट के स्तर से तय की गयी शर्तों में मेला आयोजकों के स्तर से किसी भी तरह का सांस्कृतिक आयोजन न करने, पुलिस अधिकारियों के स्तर से पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा किसी स्टॉल पर या आयोजन में भीड़ के अनियंत्रित होने पर नगर निगम प्रशासन के स्तर से उक्त स्टॉल या पूरे मेले को स्थगित किये जाने की बात शामिल है. मेला आयोजक तथा नगर निगम प्रशासन दोनों इसे अपनी जीत बता रहे हैं. मेला आयोजन से जुड़े भाजपा कर्मियों ने कोर्ट के आदेश के बाद जम कर गुलाल उड़ाये तथा जीत का जश्न मनाया. स्टेडियम परिसर से लेकर मुख्य सड़क तक खुशियां मनायी गयी.
कोर्ट ने की आलोचनात्मक टिप्पणी
इस मुद्दे पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने दोनों पक्षों की बाते सुनी. इसके बाद उन्होंने नगर निगम प्रशासन तथा राज्य सरकार की जम कर खिंचाई करते हुए टिप्पणी की. उन्होंने कहा: आप (मेयर) को लगता है कि आयोजन स्थल पर भारी भीड़ हो सकती है. इस आधार पर उन्होंने अनुमति देने से इनकार कर दिया. क्या भीड़ नियंत्रण का दायित्व नगर निगम प्रशासन का है? आप कहते हैं कि गंगासागर मेला के मद्देनजर पुलिस वहां व्यस्त है.
क्या मैं एक घंटे में राज्य के पुलिस महानिदेशक के रिपोर्ट मांगू कि हाल के दिनों में राज्य में कितने मेले आयोजित हुए है? आप (मेयर) कहते हैं कि इतने बड़े कलाकार आसनसोल में अब तक नहीं आये हैं? न्यायाधीश ने अतिरिक्त महाधिवक्ता से पूछा कि क्या आपकी मुख्यमंत्री यह सुनकर खुश होंगी? कोर्ट ने कहा : आपने अनुमति रद्द करनेवाले पत्र में कहा है कि इसके पूर्व कई राजनीतिक आयोजनों को अनुमति नहीं दी गयी है.
आप किसी राजनीतिक कार्यक्रम से मेले की तुलना कैसे कर सकते हैं? आप कह रहे हैं कि मेले में केंद्र सरकार के स्तर से आधार कार्ड व अन्य स्टॉल लगाये जायेंगे. आप यह भी कह रहे हैं कि इन स्टॉलों में भारी संख्या में भीड़ जमा होगी. यदि लोग इनसे लाभान्वित होंगे तो आपको आपत्ति क्यों है? आप (मेयर) कह रहे हैं कि मेला की अनुमति देने में चारदीवारी बाधक है. क्या मैं इस संबंध में रिपोर्ट मंगवाऊं कि पिछले एक वर्ष में कितने मेलों को अनुमति मिली है और कितने को अनुमति नहीं देकर उन्हें रद्द किया गया है. मेला कमेटी ने कोर्ट को सूचित किया है कि मेले में कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होगा. मैं आपको कुछ समय दे रहा हूं. दोपहर दो बजे पुन: कोर्ट में आये तथा अपना स्टैंड साफ करें. इसके बाद कोर्ट अपना निर्णय सुनायेगी.
दोनों पक्षों की बात दिखी कोर्ट के आदेश में
दो बजे के बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अपनी बात रखी तथा दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश विश्वनाथ समादार की खंपीठ ने निर्णय सुनाया. उन्होंने कहा कि आसनसोल नगर निगम प्रशासन स्थानीय लोको स्टेडियम में मेले के आयोजन की अननुमति दे.
हालांकि इसके साथ ही आयोजकों को भी निर्देश दिया कि मेला स्थल पर कोई सांस्कृतिक आयोजन नहीं करेंगे. सनद रहे कि कई फिल्मी गायकों जैसे शान, मीका सिंह, अभिजीत, अलका याज्ञनिक के गायन तय थे. पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मेले में सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती हो. साथ ही नगर निगम प्रशासन को अधिकार दिया गया है कि मेले के दौरान भीड़ के अनियंत्रित होने या गड़बड़ी होने पर वह इसमें हस्तक्षेप कर सकता है तथा पुलिस अधिकारियों की मदद ले सकता है. कोर्ट ने नगर निगम प्रशासन को यह अधिकार भी दिया है कि यदि स्थिति अनियंत्रित हो जाये तो वह सिकी भी स्टॉल या पूरे मेले के आयोजन को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर सकता है. कोर्ट सूत्रों के अनुसार खंडपीठ ने इस निर्णय से पहले व्हाट एप्प तथआ गुगल मैप के माध्यम से आयोजन स्थल का अवलोकन किया.
इस निर्णय की सूचना मिलते ही आयोजक तथा आयोजन में सहयोग कर रहे भाजपा कर्मियों ने आयोजन स्थल पर ही गुलाल उड़ाना और जश्न मनाना शुरू कर दिया. पूरे स्टेडियम परिसर में जश्न चलता रहा. भाजपा कर्मी स्टेडियम से बाहर आकर सड़कों पर भी जश्न मनाते रहे.
क्या है मामला
नगर निगम के स्तर से मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दिये जाने के बाद मेले की सह आयोजक संस्था ‘मी टू के फाउंडेशन’ ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मंगलवार को न्यायाधीश हरीश टंडन के समक्ष याचिका दायर की गयी.
उन्होंने नगर निगम तथा राज्य सरकार की खिंचाई करते हुए मेयर को निर्देश दिया कि वह राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त होकर आयोजन स्थल की जांच करें तथा इस मामले में निर्णय लें. बुधवार को मेयर जितेन्द्र तिवारी ने विस्तारित तकनीकी टीम के साथ आयोजन स्थल का निरीक्षण कर अनुमति देने से इनकार कर दिया. उधर याचिकाकर्ता ने एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ न्यायाधीश विश्वनाथ समादार की खंडपीठ के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर कर सीधे अनुमति देने की मांग की. कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम प्रशासन तथा राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दिया. गुरुवार को पुन: इस पर सुनवाई हुई.
क्या हैं मुख्य शर्तें
आयोजक मेला स्थल पर कोई सांस्कृतिक आयोजन नहीं करेंगे
पुलिस अधिकारी आयोजन स्थल पर सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करेंगे
किसी भी स्टॉल या मेला स्थल पर गड़बड़ी होने पर नगर निगम प्रशासन करेगा हस्तक्षेप
जरूरत पड़ने पर पुलिस अधिकारियों से भी ली जायेगी मदद
स्थिति अनियंत्रित होने पर नगर निगम प्रशासन संबंधित स्टॉल या पूरे मेले को कर सकता है स्थगित
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