वर्षों इंतजार के बाद पानागढ़ बाइपास पर दौड़ने लगे वाहन, मिली जाम से मुक्ति

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पानागढ़. काफी प्रतीक्षा के शनिवार को पानागढ़ बाइपास का उद्घाटन हो गया. इसके साथ ही 17 वर्षों के यंत्रणा भरे ट्राफिक जाम से मुक्ति मिल गई. काफी उठा पटक और लंबी लड़ाई के बाद बाइपास पर अब वाहन दौड़ेंगे. वर्ष 2014 के फरवरी महीने से जाम से मुक्ति दिलाने के लिये बाइपास निर्माण का काम […]

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पानागढ़. काफी प्रतीक्षा के शनिवार को पानागढ़ बाइपास का उद्घाटन हो गया. इसके साथ ही 17 वर्षों के यंत्रणा भरे ट्राफिक जाम से मुक्ति मिल गई. काफी उठा पटक और लंबी लड़ाई के बाद बाइपास पर अब वाहन दौड़ेंगे. वर्ष 2014 के फरवरी महीने से जाम से मुक्ति दिलाने के लिये बाइपास निर्माण का काम शुरू हुआ था. प्राय: 700 करोड़ रुपये व्यय कर 8.15 किलोमीटर लंबा रास्ता तैयार किया गया. हालांकि चार माह पूर्व ही निर्माण कार्य शेष हो गया था. लेकिन केंद्रीय मंत्री को समय नहीं मिलने के कारण इसका अाधिकारिक उद्घाटन नहीं हो पा रहा था. फलस्वरूप, आसनसोल के सांसद व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को उद्घाटन का कार्यभार सौंपा गया. बाइपास के चालू हो जाने से वाहनों का आवागमन सुचारू हो गया है.
पानागढ़ के व्यवसािययों को भी हैवी वाहनों के जाम और होने वाली दुर्घटनाओं से मुक्ति मिलेगी. विकास के नये आयाम भी खुलेंगे. व्यवसायियों का कहना है कि बाइपास का वे लोग स्वागत करते हैं. साथ ही पानागढ़ बाजार से होकर गुजर रही जीटी रोड के सौंदर्यीकरण की परियोजना थी, उसे भी अब तक शुरू नहीं िकया जा सका है. अब इस दिशा में भी जिला प्रशासन व हाइवे ऑथरिटी को ध्यान देना होगा. बाइपास के होने से घंटे भर का सफर अब महज 10 मिनट में ही तय हो जायेगा. आये दिन होने वाली दुर्घटना से भी मुक्ति मिलेगी.
बताया जाता है कि वर्ष 1998 में तत्कालीन वायपेयी सरकार ने दो नंबर हाइवे के संप्रसार का काम युद्धस्तर पर परियोजना के रूप में शुरू िकया था लेिकन उक्त परियोजना पानागढ़ में आकर रुक गयी थी. स्थानीय व्यवसाइयों ने भारी नुकसान को देखते हुए ही यह कदम उस दौरान उठाया था.
फलस्वरुप पानागढ़ दार्जिलिंग मोड़ से भांगाबांध रेल गेट तक 3.5 किलोमीटर हाइवे के संप्रसार का काम ठप हो गया. इसके बाद से वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण पानागढ़ में ट्राफिक जाम की समस्या ने विकराल रूप धारण कर िलया. जाम के कारण स्थानीय व्यवसाय पर भी चोट पहुंचा. दूरदराज के ग्राहक व व्यवसायी पानागढ़ आने के नाम से कतराने लगे. दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ने लगा.
वर्ष 2011 में राज्य में मां-माटी-मानुष की सरकार आने के बाद इलाके के लोगों ने मुख्यमंत्री से आवेदन किया. रास्ते में आने जाने के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री ने लोगों के कष्ट को सुना व महसूस भी िकया. राज्य के अन्य जिलों में चलने वाले प्रोजेक्ट भी धीमा होने लगा.
पानागढ़ में प्रोजैक्ट के िलये मैटेरियल समय पर नहीं पहुंच पा रहे थे. वर्ष 2013 में बर्दवान में एक सभा में मुख्यमंत्री ने बाइपास का मुद्दा उठाया था. हालांकि इससे पूर्व भी वाम सरकार ने जब पानागढ़ औद्योगिक अंचल का निर्माण किया था, तभी बाइपास को उक्त अंचल से जोड़ दिया था. इसके बाद भूमि अधिग्रहण का काम काफी उठापटक के बाद मूर्तरूप में आया. वर्ष 2014 से भूमि अधिग्रहण युद्ध स्तर पर चला. इस बीच कई तरह की समस्याएं भी आईं और उनका निदान भी बाइपास निर्माण के साथ चलता रहा.
स्थानीय व्यवसायियों व नागरिकों का कहना है कि बाइपास चालू हो रहा है. यह खुशी की बात है. लेकिन यदि पुराने जीटी रोड का संप्रसारण व सौंदर्यीकरण नहीं किया गया तो पानागढ़ बाजार पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. बाजार अंधकार में डूब जायेगा. व्यवसािययों व नागरिकों की मांग है िक जीटी रोड के िलये जो परियोजना तैयार की गयी थी, उसे भी जल्द से जल्द शुरू िकया जाये.
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