काजी नजरूल कॉलेज को दिये तीन लाख

Updated:
विज्ञापन

कवि, निबंधकार तथा भाषा-संस्कृति आलोचक अशोक वाजपेयी ने काजी नजरूल कॉलेज के दौरे के दौरान मिली जानकारी के आधार पर राज्य सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि नजरूल के नाम पर बने कॉलेज की शासकीय अनुदान बंद करना कहीं से भी उचित नहीं है. उन्होंने इसे बंगाल की संस्कृति से जोड़ते हुए इसे गंभीर […]

विज्ञापन
कवि, निबंधकार तथा भाषा-संस्कृति आलोचक अशोक वाजपेयी ने काजी नजरूल कॉलेज के दौरे के दौरान मिली जानकारी के आधार पर राज्य सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि नजरूल के नाम पर बने कॉलेज की शासकीय अनुदान बंद करना कहीं से भी उचित नहीं है. उन्होंने इसे बंगाल की संस्कृति से जोड़ते हुए इसे गंभीर बताया तथा अपने स्तर से कॉलेज को तीन लाख रुपये का अनुदान दिया.
आसनसोल : कवि, निबंधकार तथा भाषा-संस्कृति आलोचक अशोक वाजपेयी ने कहा कि राज्य सरकार ने बांग्ला संस्कृति की पहचान रहे विद्रोही कवि नजरूल से जुड़े काजी नजरूल कॉलेज को शासकीय अनुदान देना बंद कर दिया है. यह उपेक्षा निंदनीय है. उन्होंने सैयद हैदर रजा फाउंडेशन के मद से कॉलेज को तीन लाख रुपये का अनुदान देने की घोषणा की. रविवार को उषाग्राम स्थित हिंदी भवन परिसर में आसनसोल नगर निगम हिंदी अकादमी आयोजित ‘साहित्य क्यों’ व्याख्यान को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि आसनसोल शहर में हिंदी पुस्तकालय की स्थापना हो तो वे दो लआख रुपये का अनुदान देंगे. मौके पर विभिन्न शिक्षण्ण संस्थानों में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता स्टूडेंट्सों को उन्होंने सम्मानित किया.
श्री वाजपेयी ने कहा कि समाज को अपने पुरखों की याद हमेशा रखनी चाहिए. नजरूल की उपेक्षा से वे काफी हताश हैं. उन्होंने कहा कि बंगाल की संस्कृति काफी समृद्ध रही है. यहां के निवासियों को उस पर गर्व भी रहा है. लेकिन हिंदी समाज कआफी बेसुरा रहा है. नृत्य, गायन या साहित्य के प्रति उसकी अधिक अभिरू चि नहीं है. उन्होंने कहा कि साहित्य का जीवन में काफी महत्व है. भाषा ने विश्व को बदला है तथा साहित्य भाषा का उपादान है.
उसका विकसित रूप है. उन्होंने कहा कि साहित्य की अपनी विशिष्टता भी है. वह सत्य का अनुभव है, लेकिम एकांगी है. वह राजनीति तथा धर्म से सवाल पूछता है, उसकी समीक्षा करता है लेकिन साथ ही वह खुद को फैसला लेने से भी रोकता है. वह दासता से मुक्त करता है. मुक्ति का राह दिखाता है, कठिन समय में अंत:करण से उठता विद्रोह है. वह दर्शन व विज्ञान को समान सम्मान देता है. वह समाज को निरन्तर बदलाव के लिए उर्जान्वित रखता है. उन्होंने कहा कि साहित्य से अलग होकर जीवन की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है.
हिंदी की स्थिति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के प्रति आसक्ति चरम पर है. हिंदी में 46 बोलियां हैं. हिंदी के शब्दकोश में करीब एक लाख शब्द है. लेकिन इनमें से दस फीसदी शब्दों का भी उपयोग नहीं होता है.
उन्होंने कहा कि समाचार चैनलों में हिंदी के तीन हजार शब्द, हिंदी समाचार पत्रों में हिंदी के पांच हजार तथा हिंदी साहित्य में हिंदी के दस हजार शब्दों का ही उपयोग हो पाता है. उन्होंने कहा कि इन शब्दों का अधिकतम उपयोग होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हिंदी में पठन-पाठन को बढ़ावा देने से स्थिति में बदलाव आ सकता है. उन्होंने कहा कि आसनसोल में हिंदी पुस्तकालय खोला जाये तो वे दो लाख रुपये की अनुदान राशि उपलब्ध करा सकते हैं.
श्री वाजपेयी ने समाज की चर्चा करते हुए कहा कि हिंसक प्रवृत्ति हर क्षेत्रमें बढ़ रही है. यूएनओ की रपट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बाजार, समाचार, पर्यावरण, राजनीति, प्रकृति, धर्म आदि में हिंसक प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है. मानव के विचार लगातार संकुचित होते जा रहे हैं. मानव अपनी उपलब्धियों के बजाय तुलना पर अधिक जोर देने लगा है. विकास व सुविधा के नाम पर अनावश्यक सामग्रियों का संग्रहण हो रहा है.
उन्होंने कहा कि घर को घर रखने के बजाय उसे गोदाम बनाया जा रहा है. प्रकृत्ति के हिंसक होने के कारण ही प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही है. उन्होंने धर्म पर भी चोट की. उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में चार वेद, 18 उपनिषद, छह महाकाब्य तथआ 34 करोड़ देवी देवता है. इतने तो एक समय में भारत की आबादी भी नहीं थी. उन्होंने कहा कि समन्वय के बजाय एकांकी का प्रभाव बढ़ रहा है. जबकि लोकतंत्र में विचार-विमर्श को प्राथमिकता दी गयी है. उन्होंने कहा कि समाज के बदलते इस स्वरूप के कारण साहित्य की चुनौतिया ं और भी बढ़ गयी है. व्याख्यान की अध्यक्षता डॉ दामोदर मिश्र तथा संचालन मनोज यादव ने किया. हिंदी अकादमी की सचिव उमा सर्राफ ने अतिथियों का स्वागत किया.
उद्घाटन के बाद ही चले गये मेयर
व्याख्यान का उद्घाटन कवि सह आलोचक अशोक बाजपेयी तथा मेयर जितेन्द्र तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया. इसके बाद वे विभागीय कार्य के कारण चले गये. मंच पर डॉ दामोदर मिश्र, हिंदी अकादमी के अध्यक्ष डॉ विजय नारायण, सचिव उमा सर्राफ, केएनयू के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ शांतनु बनर्जी आदि उपस्थित थे. इसके पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत सामूहिक नृत्य व कविता पाठ किया गया.
सम्मानित हुए प्रतियोगिता विजयी छात्र
हिंदी अकादमी ने आयोजन से पहले विभिन्न कॉलेजों व हाइ स्कूलों में स्टूडेंट्सों के बीच विभिन्न विषयों पर भाषण व निबंध प्रतियोगिता आयोजित करायी थी. हर संस्थान से तीन-तीन विजयी प्रतियोगी को केंद्रीय प्रतियोगिता के लिए बुलाया गया था. सभी विजयी प्रतियोगियों को कवि श्री बाजपेयी ने सम्मानित किया. सचिव सुश्री सर्राफ, अध्यक्ष डॉ नारायण ने तथा डॉ मिश्र ने श्री वाजपेयी को सम्मानित किया.
केएनयू में ‘आलोचना क्यों’ पर व्याख्यान आज
के एनयू के नजरूल सेंटर फॉर सोशल एंड कल्चरल स्टडीज एंड हिंदी विभाग की पहल पर सोमवार को विद्या चर्चा भवन में ‘आलोचना क्यों’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया जायेगा. यह जानकारी हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ) विजय भारती ने दी. उन्होंने कहा कि स्नातकोत्तर के हिंदी स्टूडेंट्सों के लिए यह विषय काफी प्रासंगिक होगा. यूनिवर्सिटी के साथ-साथ विभिन्न कॉलेजों के शिक्षक व स्टूडेंट्स शामिल होंगे.
अशोक वाजपेयी: एक नजर में
अशोक वाजपेयी का जन्म वर्ष 1941 में हुआ. प्रशासनिक अधिकारी के साथ ही वे कवि, निबंधकार, भाषा-संस्कृति आलोचक तथा वर्ष 2008 से 2011 तक केंद्रीय सरकार के सांस्कृतिक व कला प्रशासक भी रहे हैं. सांस्कृतिक मंत्रलय में सचिव के पद पर सेवा करने के साथ ही वे महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति रहे हैं. संगीत नाटक अकादमी के कार्यकारी बोर्ड सदस्य भी रहे हैं.
वर्ष 1994 में उन्हें साहित्य अकादमी अवार्ड तथा दयावती मोदी कविशेखर अवार्ड भी मिला है. हैदराबाद यूनिवर्सिटी से उन्होंने डी लिट् की उपाधि ली है. उनकी प्रमुख रचनाओं में -‘कहीं नहीं वहीं’,‘जो नहीं है’, ‘इक पतंग अनंत में’, ‘समय के पास समय’, ‘कविता का गोलपा’, ‘उमंग’, ‘कुछ पूर्वाग्रह’, ‘संशय के साये’, ‘अन्यत्र’, ‘कभी-कभार’, बहुरी अकेला’, ‘अब यहां नहीं’ तथा दिन फिरनेवाले हैं’ शामिल हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola