तकनीक के संग हिंदी को जोड़ना चुनौती
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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कुल्टी : काजी नजरूल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ) विजय भारती ने कहा कि देश में ही नहीं, विदेश में भी हिंदी में बड़ी संख्या में रोजगार की संभावना है. क्योंकि बाजार का बड़ा दायरा हिंदीभाषी इलाकों व हिंदीभाषियों के बीच लगातार विस्तार पा रहा है. वे गुरुवार को कुल्टी कॉलेज के […]
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कुल्टी : काजी नजरूल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ) विजय भारती ने कहा कि देश में ही नहीं, विदेश में भी हिंदी में बड़ी संख्या में रोजगार की संभावना है. क्योंकि बाजार का बड़ा दायरा हिंदीभाषी इलाकों व हिंदीभाषियों के बीच लगातार विस्तार पा रहा है.
वे गुरुवार को कुल्टी कॉलेज के हिंदी विभाग की पहल पर कॉलेज के सभागार में आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. हिंदी दिवस पर आयोजित सेमिनार का विषय – ‘हिंदी : रोजगार एवं बाजार’ था. कॉलेज के टीचर इंचार्ज राजकुमार राय, राजनीति विभाग के शिक्षक डॉ तारक कुमार घोष, वाणिज्य विभाग के वरीय शिक्षक डॉ अरविंद मिश्र, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रतिमा प्रसाद आदि उपस्थित थी. इसके पूर्व श्री भारती ने दीप प्रज्जवलित कर इसका उद्घाटन किया.
डॉ भारती ने कहा कि हिंदी भाषा की पहचान पूरे विश्व में है. हिंदी में रोजगार की व्यापक संभावना है.जिस भाषा में रोजगार के अवसर अधिक उपलब्ध होंगे, वह भाषा उतनी ही महत्वपूर्ण होगी. यही कारण है कि अंग्रेजी पूरे विश्व में बड़ी भाषा के रुप में विकसित हुयी है. ‘प्रभात खबर’ में छपे आलेख का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसमें बाजार व रोजगार के क्षेत्र में हिंदी की बढ़ते आधिपत्य का बेहतर विश्लेषण किया गया है. यदि विद्यार्थी की सही समझ है तो निश्चित रुप से रोजगार उपलब्ध होंगे. उदारीकरण की नीति के कारण भारत ही नहीं , वस्तुत: पूरे विश्व में भी हिंदी लगातार लोकप्रिय हो रही है. उन्होंने कहा कि शिक्षक, पत्रकार, अनुवादक के साथ-साथ राजभाषा अधिकारी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फिल्म, पठकथा लेखन, लेखक, तकनीक आदि क्षेत्रों में रोजगार की नये आयाम खुले हैं.
अंग्रेजी फिल्म में भी हिंदी में डब हो रही है. इन सबसे रोजगार का सृजन हो रहा है. डॉ भारती ने कहा कि अंग्रेजी के साथ भी बाजार ने ऐसा ही किया है तथा अंग्रेजी के साथ ही हिंग्लिश भी विकसित हुयी है. अमेरिकन इंग्लिश अलग विकसित हुयी है. इधर मोबाइल फोन से लेकर टेबलेट तक इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस ने नयी अंग्रेजी को जन्म दिया है. यह नयी भाषा संकट का कारण बन रही है. हिंदी के साथ भी ऐसी स्थिति हो सकती है.
लेकिन इसमें काफी समय है. हिंदी प्रेमियों को तकनीक से भाषा के संबंधों की जटिलता को समझना होगा तथा बाजार में तथा रोजगार सृजन में हिंदी सबसे मजबूत भाषा बन कर उभारने की चुनौती स्वीकार करनी होगी. सभी वक्ताओं ने अपनी अनुभवों को स्टूडेंट्सों के साथ शेयर किया तथा हिंदी में रोजगार की संभावनाओं की चर्चा की. बाद में नृत्य , गायन, कविता तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
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