नमाज अदा कर निकल रहे शेख अमीन पर अंधाधुंध फायरिंग, मौत
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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गोली लगने से दो अन्य भी घायल, 27 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी ईदगाह से साथ ही निकले थे सभी हत्यारे, भागने का नहीं दिया मौका हरिपुर : लाउदुआ-फरीदपुर थाना क्षेत्र के कैलाशपुर गांव स्थित ईदगाह से बकरीद की नमाज अदा कर बाहर निकलने के दौरान मंगलवार की सुबह अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर कोयला […]
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गोली लगने से दो अन्य भी घायल, 27 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी
ईदगाह से साथ ही निकले थे सभी हत्यारे, भागने का नहीं दिया मौका
हरिपुर : लाउदुआ-फरीदपुर थाना क्षेत्र के कैलाशपुर गांव स्थित ईदगाह से बकरीद की नमाज अदा कर बाहर निकलने के दौरान मंगलवार की सुबह अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर कोयला तस्करी के संचालक रहे शेख सलीम की हत्या के मुख्य आरोपी शेख अमीन को मार डाला. आधा दर्जन से अधिक गोली लगने के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गयी. फायरिंग के बाद ईदगाह में भगदड़ मच गयी. फायरिंग में मृतक के पुत्र शेख नसीम और नमाजी मजहर हुसैन (मास्टर) को भी गोली लगी है. मजहर को गंभीर हालत में दुर्गापुर के द मिशन अस्पताल में दाखिल कराया गया है.
घटना के बाद पहुंची स्थानीय पुलिस को लोगों ने शव उठाने से रोक दिया. वे हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (इस्ट) कुमार गौतम व सहायक पुलिस आयुक्त (इस्ट) विमल कुमार मंडल भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए दुर्गापुर महकमा अस्पताल भेजा. इस संबंध में मृतक के पुत्र शेख नसीम ने 27 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी है. पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है. अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. इस हत्याकांड को कोयले की तस्करी पर वर्चस्व के संघर्ष से जोड़ कर देखा जा रहा है. तनाव को देखते हुए वहां पुलिस का अस्थायी कैंप लगाया गया है.
मृतक के बड़े भाई शेख मतिन ने कहा कि इस हत्या की साजिश में कई लोग शामिल रहे हैं. काफी योजनाबद्ध तरीके से हमला के लिए बकरीद का समय चुना गया. इदगाह से निकलते समय हुई फायरिंग में भगदड़ मचा कर अपराधियों ने उनके छोटे भाई की हत्या कर दी. अन्य ग्रामीण मास्टर के िसर में गोली लगी है. मृतक के बेटे नसीम ने स्थानीय थाने में 27 आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी है.
ग्रामीणों ने किया विरोध
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और शव को ले जाने की कोशिश की. लेकिन ग्रामीणों ने शव को उठाने से रोक दिया. उनका कहना था कि पुलिस नामजद आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी करे. इसके साथ ही गांव में तनाव बढ़ने लगा था. ग्रामीणों की भीड़ बढ़ने लगी थी. इसकी सूचना मिलने के बाद एडीसीपी (इस्ट) पुलिस बल के साथ पहुंचे. उन्होंने आश्वासन दिया कि हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी की जायेगी. इसक ेबाद उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए दुर्गापुर महकमा अस्पताल भेजा. घायलों को इलाज के लिए निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया है. घायल मास्टर की स्थिति गंभीर बनी हुई है.
कोयला तस्कर शेख सलीम की हत्या का मुख्य आरोपी था अमीन
कैसे घटी घटना : बकरीद के मौके पर शेख अमीन अपने परिजनों व सहयोगियों के साथ गांव में स्थित ईदगाह में नमाज अदा करने गया था. नमाज अदा करने व एक दूसरे को बधाई देने के बाद वह ईदगाह से निकल रहा था. मृतक की बेटी शमीमा खातून ने बताया कि उनके पिता मोरम और बालू के कारोबार से जुड़े थे. शेख सकीबुल, शेख शाहजहां, शेख जहांगीर, शेख जैनुल, शेख कासिम और शेख भूलन आदि उनसे रंगदारी की मांग करते थे. कई बार उन्होंने रंगदारी न देने पर हत्या करने की धमकी दी थी. लेकिन उनके पिता ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया था. लेकिन वे इसकी जानकारी परिजनों को देते रहते थे. उन्होंने कहा कि नमाज अदा करने के बाद सभी हमलावर उनके पिता के साथ ही इदगाह से निकले. दरवाजा से बाहर निकलने के साथ ही हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.
मौके की नजाकत को समझते हुए उनके पिता ने अपनी जान बचाने के लिए इदगाह के अंदर भागने की कोशिश की. लेकिन योजना के अनुसार शेख भूलन ने ईदगाह का गेट बंद कर दिया. पिता भीतर नहीं जा पाये. इसके बाद शेख सकीबुल और शेख जहांगीर ने उनके पिता पर फायरिंग शुरू कर दी. उनके पिता के सिर, नाक व सीने के पास गोली कई गोली लगी और घटनास्थल पर ही उनके पिता की मौत हो गयी. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले पार्थ चटर्जी और सैफुल ने उनके पिता को किसी व्यवसाय की मीटिंग के लिए बुलाया था. लेकिन उसके पिता उसमें शामिल नहीं हुए. संभवत: इस हत्या की साजिश में ये दोनों भी शामिल रहे हैं.
हत्या के पीछे कोयला तस्करी में वर्चस्व की लड़ाई : पुलिस
पुलिस व स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस हत्या के पीछे कोयला तस्करी पर वर्चस्व का संघर्ष है. वाममोरचा के समय से ही यह इलाका कोयला तस्करों के लिए स्वर्ग रहा है. वीरभूम जिले से सटा और अजय नदी के किनारे होने के कारण प्रतिमाह करोड़ों रुपये की कोयला तस्करी होती है.
कोयला नदी पार कर वीरभूम व सीमावर्ती झारखंड सीमा में घुसता है. इस तस्करी पर वाममोरचा के शासनकाल में शेख सलीम का राज चलता था. सरकार बदलने के बाद उसके प्रभाव में कमी आयी. लेकिन वर्ष 2012 में शेख सलीम की हत्या उसके घर के पास ही कर दी गयी. हत्यारों ने उस समय भी फायरिंग की थी. उसकी हत्या के बाद कोयला तस्करी का साम्राज्य शेख अमीन के हाथों में आ गया था. इस हत्या को अंजाम देकर उसके प्रतिद्वंद्वियों ने कमान अपने हाथों में ले ली है.
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