दूसरों की दुनिया चमकाते किस्मत से, खुद के लिए कर्म पर भरोसा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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लॉटरी के टिकट बेच कर कर रहे है परिवार का भरण पोषण, अध्ययन भी नितुरिया प्रखंड के दीघा ग्राम पंचायत के नव ग्राम के निवासी बने मिसाल नितुरिया. नितुरिया प्रखंड के दीघा ग्राम पंचायत के नव ग्राम के निवासी तथा नाबालिग दो सगे भाई महावीर थानदार और अभिजीत थानदार लॉटरी के टिकट बेचकर अपने और […]
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लॉटरी के टिकट बेच कर कर रहे है परिवार का भरण पोषण, अध्ययन भी
नितुरिया प्रखंड के दीघा ग्राम पंचायत के नव ग्राम के निवासी बने मिसाल
नितुरिया. नितुरिया प्रखंड के दीघा ग्राम पंचायत के नव ग्राम के निवासी तथा नाबालिग दो सगे भाई महावीर थानदार और अभिजीत थानदार लॉटरी के टिकट बेचकर अपने और अपने परिवार का भरण पोषण के साथ साथ अपनी पढ़ाई करने में जुटे हुये है. दूसरे के जीवन को सुखमय बनाने के लिए भले ही वे किस्मत पर बाजी लगा रहे हैं, लेकिन अपने बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने कर्म को ही प्रधानता दी है.
रानीपुर कोलियरी हाइ स्कूल की कक्षा पांचवीं का छात्र 12 वर्षीय महावीर और कक्षा तीसरी का छात्र नौ वर्षीय अभिजीत प्रखंड के झनका मोड़ के पास सुबह और शाम लॉटरी के टिकट घूम-घूम कर बेचते है. उनके पिता हृदय थानदार विकलांग है. ठीक से चल नहीं सकते हैं. माता गृहिणी है तथा वह भी अक्सरहां अस्वस्थ रहती है. घर में उनकी बड़ी दीदी है.
महावीर और अभिजीत का कहना है कि पिता काम करने में अक्षम है और मां अस्वस्थ. बीच बीच में गांव के बड़े लोगों के यहां काम कर लेते है. सुबह उठ कर मुंह धोकर वे लॉटरी के टिकट लाने निकल पड़ते है. लौट कर वे घूम-घूम कर लॉटरी का टिकट बेचते है.
इससे प्राप्त आय से घर के लिये चावल, दाल, नमक आदि खरीद कर ले आते हैं. दीदी चुन कर लकड़ियां लाती है. जिनसे चूल्हा जला कर खाना पकता है. खाने के बाद स्कूल के लिये दौड़ लगाते है. स्कूल से लौटने के बाद दोनो भाई एक बार फिर लॉटरी की टिकट बेचने के लिये निकल पड़ते है. इस दौरान क्रेताओं को उनके लॉटरी टिकट का परिणाम भी बताते है. जिसकी लॉटरी निकलती है, वे खुशी से उन्हें टिप्स देते हैं. उसे दोनों दीदी के हाथों में दे देते है.
शिशु शिक्षा, स्वास्थ्य उन्नति योजना के अनुसार इस जिला में वित्तीय वर्ष 2014-15 में स्कूलों से ड्रॉप आउट करनेवाले स्टूडेंट्सों की संख्या 730 थी. जबकि वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान यह संख्या बढ़ कर एक हजार के आसपास पहुंच गयी है. महावीर और अभिजीत जैसे छात्रों को तो लॉटरी के टिकट बेच कर अपने अक्षम माता पिता की जिम्मेवारी वहन करने का अवसर भी प्राप्त है. पर कई ऐसे छात्र भी है जिन्हें कोई अवसर नहीं मिलता.
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