10वीं जेबीसीसीआइ में सिंगरेनी कोलियरीज शामिल नहीं

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आसनसोल : कोयला कामगारों के 10वें वेतन समझौता के लिये गठित होनेवाली जेबीसीसीआइ गठन को लेकर उठे विवाद के बीच तेलंगाना सरकार की स्वामित्व वाली सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड ने दसवीं जेबीसीसीआइ में शामिल होने से इंकार कर दिया है. कंपनी प्रबंधन ने इस बारे में लिखित सूचना कोयला मंत्रलय और कोल इंडिया प्रबंधन को […]

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आसनसोल : कोयला कामगारों के 10वें वेतन समझौता के लिये गठित होनेवाली जेबीसीसीआइ गठन को लेकर उठे विवाद के बीच तेलंगाना सरकार की स्वामित्व वाली सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड ने दसवीं जेबीसीसीआइ में शामिल होने से इंकार कर दिया है. कंपनी प्रबंधन ने इस बारे में लिखित सूचना कोयला मंत्रलय और कोल इंडिया प्रबंधन को पिछले दिनों भेजी थी.जानकारी के अनुसार सिंगरेनी कोलियरीज प्रबंधन ने अपने पत्र में लिखा है कि सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी में तेलांगना बोग्गु घनी कार्मिक संगठन (टीबीजीकेएस) मान्यता प्राप्त यूनियन है.
उसी के साथ कंपनी वेतन समझौता करेगी. सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी जेबीसीसीआइ एक से लेकर नौ तक में शामिल रही है. नौवीं जेबीसीसीआइ में इसके तीन प्रतिनिधि-सीएमडी, निदेशक (पीएएंडडब्ल्यू) और निदेशक (वित्त) शामिल रहे है.
क्या है इसकी इनसाइड स्टोरी
जानकारी के अनुसार तेलंगाना सरकार के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त प्रतिनिधि रामचंदू तेजावथ ने आठ अक्तूबर, 2015 को कोयला मंत्रलय को एक पत्र लिख कर टीबीजीकेएस के तीन सदस्यों को जेबीसीसीआइ में प्रतिनिधित्व देने की मांग की. यूनियन के महामंत्री मिरियाला राज रेड्डी ने भी उसी दिन जेबीसीसीआइ में प्रतिनिधित्व देने की मांग करते हुए कोल मंत्रलय को पत्र लिखा.
कोयला मंत्रलय ने कोल इंडिया से इस पर जबाब मांगा. कोल इंडिया प्रबंधन ने 11 मार्च को लिखा कि जेबीसीसीआइ में उसी यूनियन का प्रतिनिधित्व है जो केंद्रीय श्रमिक संगठन से संबद्ध है. ऐसे में टीबीजीकेएस को जेबीसीसीआइ में प्रतिनिधित्व देना संभव नहीं है. टीबीजीकेएस तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति से जुड़ी है. जेबीसीसीआइ में प्रतिनिधित्व नहीं मिलने के बाद जेबीसीसीआइ में शामिल नहीं होने का फैसला लिया गया है.
तो क्या केवल सीआइएल के लिए
कोयला मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार 10वीं जेबीसीसीआइ सिर्फ कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी इकाइयों के लिये ही गठित होगी. जेबीसीसीआइ गठन के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाइ कोर्ट में याचिका दायर करनेवाले कोरबा के मुख्य भंडारपाल डीपी सर्राफ ने फरवरी, 2016 में कोयला मंत्रलय को पत्र लिख कर कहा कि जेबीसीसीआइ स्टेच्यूरी नहीं है.
यह कोयला उद्योग के लिये समझौता नहीं कर सकती. इस पर कोयला मंत्रलय के संयुक्त सचिव ने 21 मार्च को लिखा कि कोल इंडिया को अपने और अपनी अनुषंगी इकाइयों के कामगारों के लिये ही जेबीसीसीआइ का गठन करना चाहिए न कि पूरे कोयला उद्योग और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के लिये.
यूनियन नेताओं ने जतायी नाराजगी
सिंगरेनी कोलियरीज को जेबीसीसीआइ में शामिल नहीं होने के सवाल पर एटक के वरीय उपाध्यक्ष सह पूर्व जेवीसीसीआइ सदस्य पूर्व सांसद आरसी सिंह ने कहा कि सबका वेतन समझौता एक होना चाहिए. सिंगरेनी कोलियरीज प्रबंधन वहां के सत्ताधारी दल के दबाब में है. जेबीसीसीआइ में प्रतिनिधित्व नहीं मिला. इसलिए टीआरएस नाराज है. सिंगरेनी कोलियरीज प्रबंधन ने एचपीसी की अनुशंसा को भी लागू नहीं किया है.
इसमें केंद्र सरकार की मिलीभगत है. पहले ही निजी कोयला कंपनियों को इससे अलग किया जा चुका है. यह कोयला श्रमिकों की एकता को तोड़ने का प्रयास है. ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन (सीटू) के महासचिव डीडी रामानंदन ने कहा कि उक्त कंपनी को साथ रहना चाहिए. उसके शामिल नहीं होने से कोयला मजदूरों के आंदोलन के कमजोर होने की संभावना है. पूरे कोयला उद्योग के मजदूरों के लिये एक समझौता होना चाहिए.
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