29 की कोयला हड़ताल स्थगित

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सुखद. सीआइएल प्रबंधन, चार केंद्रीय यूनियनों की बैठक रही सकारात्मक कोल इंडिया चेयरमैन व गैर बीएमएस केंद्रीय यूनियनों के साथ सोमवार को हुयी बैठक का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि आगामी 29 मार्च को प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी गयी. इसके पहले नीतिगत सवालों पर कोयला मंत्री पीयूष गोयल 14 मार्च को इन यूनियनों के […]

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सुखद. सीआइएल प्रबंधन, चार केंद्रीय यूनियनों की बैठक रही सकारात्मक
कोल इंडिया चेयरमैन व गैर बीएमएस केंद्रीय यूनियनों के साथ सोमवार को हुयी बैठक का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि आगामी 29 मार्च को प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी गयी. इसके पहले नीतिगत सवालों पर कोयला मंत्री पीयूष गोयल 14 मार्च को इन यूनियनों के साथ बैठक कर चुके थे.
आसनसोल : विभिन्न मांगों को केंद्र कर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) व उसकी अंगीभूत कोयला कंपनियों में आगामी 29 मार्च को प्रस्तावित एक दिवसीय हड़ताल स्थगित कर दी गयी है. सोमवार को कोलकाता में कोल इंडिया मुख्यालय में प्रबंधन व हड़ताल का आह्वान करनेवाली चार केंद्रीय यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच हुयी बैठक में यह निर्णय लिया गया. दोनों फक्षों के बीच विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनी.
क्या है मामला
कोल इंडिया में सक्रिय चार केंद्रीय यूनियनों – इंटक, एटक, एचएमएस व सीटू ने बीते 27 जनवरी को आगामी 29 मार्च को एक दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल करने का संयुक्त नोटिस प्रबंधन को दिया था.
इस संबंध में कोल इंडिया के निदेशक (कार्मिक व औद्योगिक संबंध) के स्तर पर बीते 13 व 18 फरवरी को द्विपक्षीय बैठक हुयी थी. इन बैठकों में यूनियनों की विभिन्न मांगों के मुद्दे पर चर्चा हुयी थी. इसके बाद कोयला मंत्री पीयूष गोयल के साथ नीतिगत मुद्दों पर बीते 22 फरवरी तथा 14 मार्च को बैठक हुयी थी. सोमवार को कोल इंडिया चेयरमैन एस भट्टाचार्या की अध्यक्षता हुयी.
बैठक में सीआइएल के निदेशक (कार्मिक व औद्योगिक संबंध) आर मोहनदास, महाप्रबंधक (मेनपावर, कार्मिक व औद्योगिक संबंध) भगवान पांडेय, वरीय प्रबंधक ( कार्मिक व जेबीसीसीआइ) मनोज कुमार, इंटक के प्रतिनिधि राजेन्द्र प्रसाद सिंह, एसक्यू जामा, एटक के रमेन्द्र कुमार के प्रतिनिधि लखन लाल महतो, एचएमएस के प्रतिनिधि नत्थूलाल पांडेय तथा सीटू के डीडी रामानंदन आदि शामिल थे.
सीआइएल की आर एंड आर पॉलिसी में बदलाव
बैठक में सहमति बनी कि सीआइएल की आरएंडआर पॉलिसी में नेशनल आरएंडआर पॉलिसी के अनुरुप संशोधन किया जायेगा.
ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के सुझाव जेसीसी (सीसीसी) के माध्यम से शामिल की जायेंगी. यही नीति सीएसआर में भी लागू होगी. यूनियन फ्रतिनिधियों ने कहा कि विभिन्न कोर्ट में हजारों मामलों के लंबित होने से कंपनी व संबंधित कर्मियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है.
चेयरमैन श्री भट्टाचार्या ने सुझाव दिया कि इसके लिए नेशनल लिटिगेशन पॉलिसी का पालन किया जाना चाहिए. बैठक में पीस रेट से टाइम रेट में जानेवाले कर्मियों के पे प्रोटेक्शन पर सहमति बनी. इसके लिए 25 नवंबर, 2014 को निर्देश जारी किया जा चुका है. 15 दिनों के अंदर इन्हें निष्पादित करने का निर्देश श्री भट्टाचार्या ने दिया. उन्होंने कहा कि जेबीसीसीआइ गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
इसके साथ ही कन्ट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडीकेयर स्कीम फॉर नन एक्सक्यूटिव, पेंशन को आय के रूप में ट्रीट नहीं किये जाने , सीएमपीएस-1998, इनीसियल मेडिकल एक्जामिनेशन तथा निजी प्रबंधन द्वारा संचालित शिक्षको्ं की मांगों पर भी चर्चा की गयी.
शिक्षकों के मामले में प्रबंधन ने कहा कि सीआइएल स्तर पर सव्रे व डाटा संग्रह का कार्य चल रहा है. इसके बाद ही इस मुद्दे पर कोई निर्णय लिया जायेगा. यूनियन नेताओं ने कहा कि यदि किसी श्रमिक का चयन उच्च पद के लिए किया जाता है तो उसे वेज प्रोटेक्शन मिलना चाहिए. इस पर प्रबंधन ने सहमति जतायी.
किन मुद्दों पर बनी सहमति
हाइ पावर कमेटी की अनुशंसा को पूर्ण रुप से लागू करने का दायित्व क्षेत्रीय संबंधित महाप्रबंधकों को सौंपा गया. सहमति बनी कि इसके लिए संबंधित महाप्रबंधक सीधे जिम्मेवाग होंगे. वर्ष 2014-15 के बकाये बोनस का भुगतान 15 दिनों के अंदर करना होगा.
स्पेशल फीमेल वोलेंटरी रिटायरमेंट स्कीम (एसएफवीआरएस) के बारे में प्रबंधन का कहना था कि इस योजना को लेकर विभिन्न स्तरों पर विवाद चल रहा है. इस संबंध में एडीशनल सॉलीसीटर जेनरल (भारत सरकार) से राय ली गयी थी. उन्होंने कहा है कि यह योजना संविधान के समानता के प्रावधान के खिलाफ है. जबकि यूनियन प्रतिनिधियों ने प्रबंधन के इस तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि यह योजना वोलेंटियर प्रवृत्ति की है.
यह निर्णय जेबीसीसीआइ की स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की गुवाहाटी में 11 अप्रैल, 2015 को हुयी बैठक में लिया गया था. इसके बाद छह-सात जुलाई, 2015 को हुयी सीएमडी मीट्स में इसे सहमति दी गयी. प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि एसएफवीआरएस-2014 तथा एसएफवीआरएस-2014 (संशोधित) योजना में दो माह दस दिनों का गैप है. इन दोनों योजनाओं को लागू किया जायेगा. इस समयावधि के बीच आनेवाले मामलों का निष्पादन किया जायेगा. एसएफवीआरएस-2015 में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा.
दोनों पक्षों के बीच लंबी वातर्आ के बाद अंजान हिल्स कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की अनुशंसा को पूर्ण रुप से लागू करने पर सहमति बनी. इसके लिए महाप्रबंधक (मेनपावर, कार्मिक व औद्योगिक संबंध) भगवान पांडेय की अध्यक्षता मे ं गठित कमेटी एससीसीएल (सिगरैनी) का दौरा करेगी तथा ठेका श्रमिकों के आश्रितों को मुआवजा भुगतान का रास्ता तलाश करेगी. ताकि बड़ी दुर्घटना के मामले में इसे नियमित रूप से लागू किया जा सके.
जन्म दिन में अंतर होने के मामले को कंपनी स्तर पर निपटाने पर सहमति बनी. इसके बाद भी यदि उनका निपटारा नहीं होता है तो उसे कोल इंडिया मुख्यालय को भेजा जायेगा. इस निर्णय की सूचना सभी अनुषांगिक कंपनियों को शीघ्र भेजने का निर्देश कोल इंडिया चेयरमैन श्री भट्टाचार्या ने दिया.
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