आसनसोल श्रम न्यायालय में श्रमिकों को मिल रही है सिर्फ तारीख पर तारीख

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Feb 2020 1:59 AM

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अक्तूबर 2018 से यहां न्यायाधीश का पद रिक्त होने से कुल 382 मामले हैं लंबित गुवाहाटी श्रम न्यायालय के न्यायाधीश को आसनसोल का दिया गया था अतिरिक्त प्रभार, एकबार भी नहीं आये आसनसोल, उनका कार्यकाल भी समाप्त धनबाद से अलग हटकर वर्ष 1985 में आसनसोल श्रम न्यायालय की हुई थी स्थापना पूर्व बर्दवान, पश्चिम बर्दवान, […]

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अक्तूबर 2018 से यहां न्यायाधीश का पद रिक्त होने से कुल 382 मामले हैं लंबित

गुवाहाटी श्रम न्यायालय के न्यायाधीश को आसनसोल का दिया गया था अतिरिक्त प्रभार, एकबार भी नहीं आये आसनसोल, उनका कार्यकाल भी समाप्त
धनबाद से अलग हटकर वर्ष 1985 में आसनसोल श्रम न्यायालय की हुई थी स्थापना
पूर्व बर्दवान, पश्चिम बर्दवान, बांकुड़ा, पुरुलिया, बीरभूम, दुमका, देवघर, गोड्डा, साहेबगंज जिले के मामलों की होता है यहां निष्पादन
आसनसोल : स्थानीय कन्यापुर में स्थित केंद्रीय सरकार औद्योगिक अधिकरण कम श्रम न्यायालय में न्यायाधीश के नहीं होने से मंगलवार को 12वीं तारीख में भी हिंदुस्तान केबल्स लिमिटेड (एचसीएल) के 554 श्रमिकों के मामले पर सुनवाई नहीं हुई और अगली तारीख 22 अप्रैल 2020 को दे दिया गया.
एचसीएल के श्रमिकों ने वर्ष 1997 के वेज एरियर का भुगतान नहीं होने के मुद्दे को लेकर इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 के तहत प्रबंधन के खिलाफ यहां 12 सितंबर 2018 को मामला दायर किया था. न्यायाधीश की अनुपस्थिति में पिछले डेढ़ वर्षों में मामले पर एक बार भी सुनवाई नहीं हुई. हर बार श्रमिकों को नई तारीख मिल जाती है. डेढ़ वर्षों में कुल 12 तारीखें अब तक मिल चुकी है. मंगलवार को सुनवाई तारीख थी, सुनवाई नहीं हुई और पुनः अगली तारीख मिल गयी.
न्याय पाने की उम्मीद लिये 10 श्रमिकों की मौत हो चुकी है और दर्जनों श्रमिक बीमार हैं. श्रमिकों ने इस मुद्दे को लेकर 24 जनवरी 2020 को केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर मामले को आसनसोल से स्थानांतरित कर कोलकाता श्रम न्यायालय में भेजने की अपील की है. जिसपर उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है. कुल 382 मामले यहां लंबित हैं.
श्रम न्यायालय स्थापना का उद्देश्य
केंद्रीय क्षेत्र में औद्योगिक विवादों के शीघ्र व समय पर निष्पादन (90 दिन के अंदर) करने तथा न्यायालयों का बोझ कम करने के उद्देश्य से वर्ष 1968 में देश का पहला श्रम न्यायालय की स्थापना धनबाद में हुई. इसके सकारात्मक असर को देखते हुए देश में कुल 22 श्रम न्यायालय स्थापित हुआ. आसनसोल में वर्ष 1985 में श्रम न्यायालय की स्थापना हुई.
यहां पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुल नौ जिले पश्चिम बर्दवान, पूर्व बर्दवान, पुरुलिया, बीरभूम, बांकुड़ा, देवघर, गोड्डा, दुमका, साहेबगंज के मामले दर्ज होते हैं. इसमें इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 के तहत आने वाले सभी प्रकार के मामलों के साथ भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े मामलों को निष्पादन किया जाता है.
अक्तूबर 2018 से न्यायाधीश नहीं है
आसनसोल श्रम न्यायालय के न्यायाधीश प्रमोद कुमार के अक्टूबर 2018 में अवकाश ग्रहण करने के बाद से यहां अब तक कोई न्यायाधीश नहीं आए. एचसीएल के 554 श्रमिकों ने वेज एरियर की राशि के भुगतान को लेकर सितम्बर 2018 में यहां मामला दायर किया था.
न्यायाधीश के अभाव में मामले पर सुनवाई नहीं होने पर श्रमिकों ने 26 मार्च 2019 को केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी समस्या बताते हुए यहां न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की.
मंत्रालय से जवाब मिला कि न्यायाधीश नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई है, थोड़ा समय लगेगा. इस दौरान गोहाटी श्रम न्यायालय के न्यायाधीश एमके भट्टाचार्य को आसनसोल का अतिरिक्त प्रभार का दायित्व दिया गया. श्री भट्टाचार्य आज तक यहां एकबार भी नहीं आए. एकबार उनके आने को लेकर तैयारी पूरी कर ली गयी थी. अंतिम समय में सूचना आया कि वे नहीं आ रहे है. उनका कार्यकाल भी समाप्त हो गया. नए किसी न्यायाधीश की नियुक्ति अब तक नहीं हुई.
क्या है एचसीएल का मामला?
कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सह एचसीएल के पूर्व स्टेट अधिकारी व प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज करने वाले 554 श्रमिकों से एक हरिशंकर चट्टोपाध्याय ने बताया कि संस्था के श्रमिकों को वर्ष 1997 के वेज एरियर का भुगतान नहीं हुआ. जबकि वेज के पीएफ राशि का भुगतान हो गया है. संस्था बंद होने के बाद केंद्र सरकार ने श्रमिकों का सम्पूर्ण बकाया राशि भुगतान करने का प्रावधान रखा था. वेज एरियर का भुगतान नहीं होने पर 554 श्रमिकों ने इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 के तहत आसनसोल श्रम न्यायालय में मामला दर्ज किया.
न्यायाधीश की मांग को लेकर केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय, केंद्रीय कानून मंत्री को कुल पांच बार पत्र भेजा गया. एचसीएल के 110 श्रमिकों के समूह ने 1997 के वेज एरियर के भुगतान के मुद्दे पर उच्च न्यायालय उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में मामला दायर किया था. सर्वोच्च न्यायालय में श्रम न्यायालय में मामला करने का निर्देश दिया.
जिसके आधार पर इनलोगों ने भी 2019 में मामला किया. एक भी सुनवाई नहीं हुई. न्याय की उम्मीद में कुल दस श्रमिक स्वर्गीय हो गए. काफी श्रमिक बिस्तर पर हैं. मामले की सुनवाई के लिए न्यायालय बदलने को लेकर भी केंद्रीय श्रम मंत्रालय को चिट्ठी भेजा गया. कोई जवाब नहीं मिला है.
श्रमिकों को मिल रही है तारीख पर तारीख
आसनसोल स्थित केंद्रीय सरकार औद्योगिक अधिकरण कम श्रम अदालत में श्रमिकों को मामले की निष्पादन के जगह पर सिर्फ तारीख ही मिल रही है. न्यायाधीश के नहीं होने से यहां कुल 382 मामले लंबित है. पश्चिम बंगाल और झारखंड से कुल नौ जिले के श्रमिक अपना सारा काम छोड़कर यहां तारीख लर हाजिरी देते है और तारीख लेकर वापस लौट जाते हैं. उन्हें उम्मीद है कि कभी न कभी न्याय मिलेगी. हालांकि न्याय का निर्णय जानने के लिए वे रहेंगे या नहीं इसकी उम्मीद उन्हें नहीं है.
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