केंद्र सरकार का श्रम कानून विधेयक श्रमिक विरोधी है: संजीवा रेड्डी
Updated at : 30 Dec 2019 6:56 AM (IST)
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बर्नपुर : पूर्व सांसद सह अखिल भारतीय इंटक के अध्यक्ष जी संजीवा रेड्डी ने कहा कि श्रम कानून विधेयक श्रमिकों के खिलाफ है. केंद्र सरकार की श्रमिक और जन विरोधी नीतियों से देश का हर नागरिक परेशान है. सरकारी उद्योगों को रुग्ण कर उसे बंद किया जा रहा है या निजी हाथों में सौंपा जा […]
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बर्नपुर : पूर्व सांसद सह अखिल भारतीय इंटक के अध्यक्ष जी संजीवा रेड्डी ने कहा कि श्रम कानून विधेयक श्रमिकों के खिलाफ है. केंद्र सरकार की श्रमिक और जन विरोधी नीतियों से देश का हर नागरिक परेशान है. सरकारी उद्योगों को रुग्ण कर उसे बंद किया जा रहा है या निजी हाथों में सौंपा जा रहा है.
सरकार की नीति से मालिक पक्ष मजबूत और श्रमिक पक्ष कमजोर हो रहा है. रविवार को बर्नपुर भारती भवन में आसनसोल ऑयरन एंड स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक) की स्टेट जनरल काउंसिल की सभा को संबोधित करते हुये श्री रेड्डी ने यह बातें कहीं.
अखिल भारतीय इंटक के महासचिव आरपी सिंह, बिहार राज्य इंटक के अध्यक्ष सीपी सिंह, इंटक पश्चिम बर्दवान जिला के अध्यक्ष विकास घटक, आलोक चक्रवर्ती, संजय गाभा, सेल आईएसपी बर्नपुर आसनसोल ऑयरन एंड स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक) के महासचिव हरजीत सिंह, अध्यक्ष गौरीशंकर सिंह, अजय राय, विजय सिंह आदि उपस्थित थे.
श्री रेड्डी ने इंटक का ध्वज फहराकर और दीप प्रज्ज्वलित कर सभा की शुभारंभ की. सभा की अध्यक्षता मोहम्मद कमरूद्दीन कमर ने की. बैठक में आगामी आठ जनवरी की केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई.
इंटक के अध्यक्ष श्री रेड्डी ने कहा कि बंगाल इंटक को ताकतवर बनाने के लिए निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद कमरूद्दीन कमर को पुन: नेतृत्व के लिये मनोनीत किया गया है. देश की आजदी के बाद पहली बार ऐसा समय आया हैं जहां गरीब और श्रमिक वर्ग का लगातार शोषण हो रहा है.
उनका जीवन स्तर को उपर उठाने के बजाय नीचे गिराने का प्रयास हो रहा है. श्रमिक वर्ग घोर मुसीबत में है. उनका रोजगार कब चला जायेगा, ये उनको भी नहीं पता हैं. औद्योगिक संस्थानें कब बंद हो जायेंगी, कोई नहीं जानता. साल में दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा करने वाली भाजपा की सरकार ने पांच से छह करोड लोगों को बेरोजगार बना दिया है.
देश में बड़े, छोटे और मझौले बहुत से उद्योगों के बंद होने से श्रमिक बेरोजगार हो गये. केन्द्र सरकार में उद्योगों को चलाने की क्षमता नहीं है. मालिक पक्ष को मजबूत बनाने के लिए श्रमिक पक्ष को कमजोर करने की दिशा में प्रयास हो रहा है.
केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों का मुकाबला अकेले कोई संगठन नहीं कर सकती है. इसलिये केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (बीएमएस को छोड़) ने कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया गया. कमेटी का चेयरमैन होने के नाते यह जिम्मेवारी हैं कि श्रमिकों को कमजोर बनाने वाली मोदी सरकार के विरोध में आंदोलन करना है.
चीन का स्टील भारत में बिकता है, लेकिन भारत का स्टील चीन में नहीं बिकता हैं. कोरिया, जापान का स्टील सस्ते में बिक रहा हैं. भारत स्टील उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के बावजूद बाहर से स्टील लेकर इस उद्योग को रुग्ण किया जा रहा है. स्टील मंत्री तथा स्टील ऑथोरिटी से बात कर चीन तथा जापान के स्टील को देश में प्रवेश रोकने के लिये डम्पिंग ड्यूटी लगाने का आग्रह किया गया.
लेकिन सरकार डंपिंग ड्यूटी लगाने को तैयार नहीं हैं. इसलिये देश में स्टील उद्योग और यहां कार्य करने वाले श्रमिकों की स्थिति दयनीय होती जा रही है. विदेशी निवेश के कारण देश में बेरोजगारी बढ़ रही है. उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आठ जनवरी को होने वाली हड़ताल को हर स्तर पर सफल बनाने की अपील की.
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