पर्यावरण अनुकूल राखियां बनाई स्वयंसेवी महिलाओं ने

आसनसोल : रक्षा बंधन त्योहार पर नगर निगम के एनयूएलएम विभाग की स्वयंसेवी महिलाओं ने विशेष प्राकृतिक सामग्रियों से पर्यावरण अनुकूल राखियों का निर्माण किया. इनके निर्माण में सरसों, सेव, संतरे, नासपाती के बीज, पटल, कोंहडा के बीच, इलायची, लौँग, काजू, काले पिले सरसों, चावल, धान, गेहुं, जूट आदि का उपयोग किया गया है. सिंथेटिक […]
आसनसोल : रक्षा बंधन त्योहार पर नगर निगम के एनयूएलएम विभाग की स्वयंसेवी महिलाओं ने विशेष प्राकृतिक सामग्रियों से पर्यावरण अनुकूल राखियों का निर्माण किया. इनके निर्माण में सरसों, सेव, संतरे, नासपाती के बीज, पटल, कोंहडा के बीच, इलायची, लौँग, काजू, काले पिले सरसों, चावल, धान, गेहुं, जूट आदि का उपयोग किया गया है.
सिंथेटिक सामानों प्लास्टिक, नाइलोन के स्थान पर पर्यावरण जागरूकता एवं ग्रीन आसनसोल का संदेश देतीं प्राकृतिक सामानों से निर्मित राखियों को बाजार में काफी पसंद किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल राज्य विकास एजेंसी की मांग पर स्वयंसेवी महिलाओं के ग्रुप ने 500 राखियां तैयार की है.
आसनसोल बाजार में भी इन राखियों की काफी मांग है. एनयूएलएम प्रभारी सीके रेश्मा रामाकृष्णन ने कहा कि कोलकाता के एक्रोपोलिस मॉल में वेस्ट बंगाल स्टेट अर्बन लाईवलिहूड मिशन ने आयोजित प्रदर्शनी प्रतियोगिता में नगर निगम के स्वयंसेवी महिलाओं के समुह ने प्राकृतिक सामानों से हाथों से निर्मित राखियों की प्रदर्शनी लगायी थी. बेहतर काम के लिए आयोजकों ने ग्रुप की महिलाओं को प्रोत्साहित किया.
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