जमीनी दस्तावेज नहीं रहने पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से हैं वंचित
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मेयर सह तृणमूल जिलाध्यक्ष ने लिखा पत्र पहले भी लिखे गये कई पत्र, सीमित अवधि तक पहल नहीं होने पर आंदोलन आसनसोल : मेयर सह तृणमूल जिलाध्यक्ष जितेन्द्र तिवारी ने पश्चिम बर्दवान जिले में स्थित सभी सरकारी प्रतिष्ठानों को पत्र लिख कर उनकी जमीन पर बसे निवासियों के लिए सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की […]
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मेयर सह तृणमूल जिलाध्यक्ष ने लिखा पत्र
पहले भी लिखे गये कई पत्र, सीमित अवधि तक पहल नहीं होने पर आंदोलन
आसनसोल : मेयर सह तृणमूल जिलाध्यक्ष जितेन्द्र तिवारी ने पश्चिम बर्दवान जिले में स्थित सभी सरकारी प्रतिष्ठानों को पत्र लिख कर उनकी जमीन पर बसे निवासियों के लिए सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की है.
बुधवार को उन्होंने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि कई दशकों से इन कंपनियों की जमीन पर रहने के बाद भी इनके पास जमीन से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है तथा इन्हें राज्य सरकार या केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है. उन्होंने कहा कि नियत अवधि तक इंतजार करने के बाद भी कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जायेगा.
उन्होंने कहा कि जिले में इसीएल, भारतीय रेल, सीएमपीडीआईएल, सेल की विभिन्न यूनिटें तथा डीवीसी जैसी सरकारी प्रतिष्ठान स्थापित है. इन कंपनियों ने कई दशकों पहले अपने कार्य तथा सुविधा के लिए विभिन्न राज्यों से इन्हें न सिर्फ बुलाया था बल्कि अपनी जमीन पर बसाया भी था. इन कंपनिययों के कर्मियों की सेवा के लिए व्यवसाय से लेकर विभिन्न सेवाओं से जुड़े हजारों लोग इन कंपनियों की जमीन पर व्यवसाय करने लगे तथा आवास बना कर रहने लगे. उन दिनों जरूरत होने के कारण कंपनियों ने इन्हें प्रोत्साहित किया. लेकिन जमीन से संबंधित कोई दस्तावेज इन्हें नहीं दिया.
मेयर श्री तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार, नगर निगम तथा जिला परिषद के स्तर से इनके कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं. लेकिन इन योजनाओं के लाभुक होने के लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज होना अनिवार्य है. लेकिन इन्हें सरकारी प्रतिष्ठानों के स्तर से दशककों से रहने का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जाता है.
फलस्वरूप इन्हें इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है. उन्होंने कहा कि नगर निगम स्तर से रेलवे तथा आइएसपी से कई बार जमीन से संबंधित दस्तावेज या अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने को कहा गया है. लेकिन हमेशा पत्र को कूड़े में डाल दिया जाता है.
जिलाध्यक्ष श्री तिवारी ने कहा कि दबाव बढ़ाने पर सरकारी कंपनियां इन्हें अतिक्रमणकारी बता हटाना शुरू कर देती है. लेकिन नये सिरे से सभी सरकारी प्रतिष्ठानों को पत्र लिखा गया है कि वे यथाशीघ्र इन निवासियों के लिए जमीन संबंधित दस्तावेज या अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय ले. उन्होंने कहा कि पार्टी के स्तर से ऐसे सभी निवासियों की सूची तैयार करने का निर्देश स्थानीय कमेटियों को दिया गया है. पूरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद इस पर आंदोलन की रणनीति बनाई जायेगी.
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