बोर्ड गठित, बीमार इसीएल कर्मियों को स्पेशल लीव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 May 2019 2:27 AM (IST)
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पूरी तरह फिट होने पर ही दी जायेगी इन कर्मियों को ड्यूटी पहले मात्र छह माह तक 50 फीसदी वेतन का था प्रावधान सांकतोड़िया : ईसीएल के बीमार कर्मियों को स्पेशल लीव देने के लिए प्रबंधन ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर लिया है. नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में आयोजित बोर्ड की पहली बैठक में कर्मियों […]
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पूरी तरह फिट होने पर ही दी जायेगी इन कर्मियों को ड्यूटी
पहले मात्र छह माह तक 50 फीसदी वेतन का था प्रावधान
सांकतोड़िया : ईसीएल के बीमार कर्मियों को स्पेशल लीव देने के लिए प्रबंधन ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर लिया है. नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में आयोजित बोर्ड की पहली बैठक में कर्मियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया और गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मियों को स्पेशल लीव देने की अनुशंसा की गई. पूरी तरह फिट होने पर ही इन कर्मियों को ड्यूटी दी जायेगी.
इसीएल के सीएमएस डॉ विद्युत गुहा ने बताया कि इसीएल समेत कोल इंडिया की विभिन्न अनुषांगिक कंपनी में कार्यरत कर्मियों को गंभीर बीमारी होने पर ड्यूटी नहीं करने पर छह माह तक आधा वेतन भुगतान किया जाता है. इसके बाद भी फिट नहीं होने पर पुनः अनुमति लेनी पड़ती है. इससे कर्मियों को काफी परेशानी होती है. कई बार स्वीकृति नहीं मिलने पर कर्मियों को मजबूरीवश ड्यूटी पर उपस्थित होना पड़ता है.
मेडिकल लीव में संशोधन की मांग लंबे समय से हो रही थी. स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की बैठक में इस प्रस्ताव को रखते हुए स्पेशल लीव प्रावधान में संशोधन करने की मांग की गई थी. इसके तहत काम करने में अक्षम कर्मी को तब तक वेतन की आधा राशि मिलेगी, जब तक चिकित्सकों की टीम उसे फिट घोषित नहीं करती. बोर्ड की पहली बैठक नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में आयोजित की गई. कोलइंडिया की स्टैंडर्डइजेशन कमेटी ने स्पेशल लीव में संशोधन किया है.
बोर्ड तीन-तीन माह में दो बार पुनः बैठक करेगा. अगली बैठक छह अगस्त को एनसीएच गेवरा में ही होगी. इस दौरान बीमार कर्मियों का पुनः स्वास्थ्य परीक्षण किया जायेगा और फिट होने पर ड्यूटी दी जायेगी. मेडिकल चेकअप के आधार पर ही कर्मियों को मेडिकल अनफिट लेने में सुविधा होगी. गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मियों को स्वास्थ्य लाभ नहीं होने पर उन्हें मेडिकल अनफिट करार करते हुए आश्रितों को नौकरी प्रदान की जा सकती है. हालांकि इस मामले में प्रबंधन अंतिम निर्णय लेगा, पर मेडिकल बोर्ड की स्वीकृति होने पर अनफिट का आधार बनेगा.
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