लक्खी पूजा की तैयारी जोरों पर, देवी की मूर्तियों से पटे बाजार
Updated at : 23 Oct 2018 4:02 AM (IST)
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दुर्गापुर : दुर्गापुर व इसके आसपास के इलाके में दुर्गापूजा का समापन होने के साथ ही लक्खी पूजा (लक्ष्मी पूजा) की तैयारियां शुरू हो गई हैं. धन की देवी लक्खी देवी की बंगाल में घर-घर पूजी होती है. दुर्गापूजा के बाद पूर्णिमा की तिथि को मां लक्खी की पूजा की जाती है. सोमवार को लक्खी […]
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दुर्गापुर : दुर्गापुर व इसके आसपास के इलाके में दुर्गापूजा का समापन होने के साथ ही लक्खी पूजा (लक्ष्मी पूजा) की तैयारियां शुरू हो गई हैं. धन की देवी लक्खी देवी की बंगाल में घर-घर पूजी होती है. दुर्गापूजा के बाद पूर्णिमा की तिथि को मां लक्खी की पूजा की जाती है. सोमवार को लक्खी पूजा को लेकर बाजार में भी चहल-पहल बढ़ गई है. इधर, मूर्तिकार लक्खी देवी की मूर्ति बनाने में दिन रात जुट गये हैं.
इलाके के मूर्तिकार प्रदीप पाल, अरूण पाल ने बताया कि दुर्गापूजा के बाद इतना कम समय रहता है कि लक्खी मूर्ति बनाने में खाना-पीना भूल जाना पड़ता है. इन्होंने बताया कि बढ़ती महंगाई के कारण ऋण लेकर मूर्तियां बनानी पड़ रही हैं. दूसरी तरफ घर की महिलाएं लक्खी पूजा की खरीदारी में जुट गई हैं. पुरोहितों की तलाश व पूजा करने की तैयारी जोरों से हो रही है.
धन, वैभव की देवी मां लक्खी (लक्ष्मी) की आराधना के लिये शिल्पांचलवासी ज़ोर-शोर से तैयारी में जुट गये हैं. पूजा के मद्देनजर सोमवार को बाजार में चहल-पहल देखी गयी. लक्खी पूजा के कारण फल के भाव भी चढ़ गये. शहर के बेनाचिती सहित अन्य बाजारों मे प्रतिमाओं की बिक्री हुई. लक्खी पूजा को लेकर बाजार लक्खी मां की मूर्ति से पट गया है.
दुर्गापूजा आयोजक देवी दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के बाद लक्खी मां की पूजा की तैयारी में लग गए हैं. गौरतलब है कि बुधवार को मां लक्खी की पूजा की जायेगी. बंगाली समुदाय के प्राय: सभी घरों में लक्खी पूजा का आयोजन किया जाता है. शहर के काली मंदिर सहित आसपास के मंदिरों में भी पूजा की तैयारी की जा रही है. पूजा के दौरान स्वादिष्ट व्यंजन, पकवान तथा फलों से मां को भोग लगाया जाता है. वहीं आकर्षक अल्पना बनाकर घरों को सजाया जाता है.
महिलाएं रखती हैं उपवास
मान्यता है कि धन-धान्य, सुख-समृद्धि के लिये आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मां लक्खी की पूजा की जाती है. पूजा को कोजागरी लक्खी पूजा भी कहते हैं. लक्खी पूजा के दिन विवाहिता परिवार की सलामती के लिए उपवास रखती है जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर परिवार की प्राप्ति के लिए पवास रखती हैं. परंपरा के अनुसार इस अवसर पर घर के दरवाजे पर अल्पना भी बनाई जाती है. बंग समुदाय के लोगों द्वारा उल्लास के साथ यह पर्व मनाया जाता है.
बांकुड़ा: लक्खी पूजा को लेकर फल, सब्जियों की कीमतें बढ़ीं
बांकुड़ा. दुर्गापूजा के बाद बांकुड़ावासी लखी पूजा की तैयारी में जुट गये हैं. पूजा कमेटियों की तैयारी भी अंतिम चरण में है. बांकुड़ा के बाजार देवी लक्ष्मी की मूर्ति से पट गये है. धीरे-धीरे मूर्तियों की बिक्री भी शुरू हो गयी है. 60 रूपये से लेकर 900 रूपये तक की मूर्ति बाजार में उपलब्ध है. मूर्ति विक्रेता से लेकर सब्जी विक्रेताओं के चेहरे खिल उठे हैं.
यही एक पूजा है जहां विभिन्न प्रकार की सब्जियों से लेकर फलों की कीमतों में उछाल आता है. फिर भी लोग जमकर खरीदारी करते हैं. बांकुडा में जिस प्रकार से लोग दुर्गापूजा की प्रतीक्षा करते हैं, ठीक उसी प्रकार लक्ष्मी पूजा का भी इंतजार किया जाता है. बांकुड़ा शहर के केंदुआडिही सार्वजनिन लक्ष्मी पूजा कमेटी से लेकर नूतनचट्टी, लालबाजार, पाटपुर, चौक बाजार से लेकर ओंदा थाना के लोदना ग्राम में लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा आकर्षण का केंद्र रहती है.
केंदुआडिही में धूमधाम से कलश यात्रा निकाली जाती है. लोदना में तीन दिनों तक मेला लगा रहता है. यहां दूरदराज से लोगों का समागम होता है. इसकी तैयारी जोर-शोर से शुरू हो चली है. जिले के बाकी हिस्सों में भी लक्ष्मी पूजा का आयोजन धूमधाम के साथ होता है.
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