मेडीक्लेम मद में 40 हजार की कटौती

Updated at : 18 Aug 2018 12:26 AM (IST)
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मेडीक्लेम मद में 40 हजार की कटौती

सांकतोड़िया : कोयला श्रमिकों के दसवें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते की बकाया राशि से मेडिकल क्लेम मद में 40 हजार रुपये की कटौती प्रबंधन ने कर ली. इसके कारण कई कर्मियों को एरियर का भुगतान नहीं हो सका, बल्कि कर्मियों के खाते से राशि कट गई. कोल इंडिया के बगैर आदेश राशि काटे जाने पर […]

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सांकतोड़िया : कोयला श्रमिकों के दसवें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते की बकाया राशि से मेडिकल क्लेम मद में 40 हजार रुपये की कटौती प्रबंधन ने कर ली. इसके कारण कई कर्मियों को एरियर का भुगतान नहीं हो सका, बल्कि कर्मियों के खाते से राशि कट गई. कोल इंडिया के बगैर आदेश राशि काटे जाने पर यूनियन प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है.अब नये सिरे से एरियर की गणना शुरू करने को कहा गया है.
यूनियन प्रतिनिधियों के अनुसार ईसीएल समेत सीआइएल की सभी अनुषांगिक कंपनी में कार्यरत कर्मियों का दसवां वेतन समझौता पहली जुलाई, 2016 से लागू हुआ है. अक्टूबर 2017 में समझौता हुआ, बाद में एरियर भुगतान पर सहमति बनी. तत्काल 51 हजार रुपये दिये गये. शेष राशि बाद में देने का आश्वासन मिला. मई, 2018 में बकाये राशि के 70 फीसदी के भुगतान के बाद शेष 30 फीसदी राशि का भुगतान 22 अगस्त तक किया जाना है.
सभी कर्मियों की एरियर राशि की गणना करने के साथ भुगतान की प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है. प्रबंधन ने कर्मियों के मेडिकल क्लेम स्कीम के नाम 40 हजार रुपये की कटौती शुरू कर दी है. नियमतः यह राशि कर्मियों के वेतन से उनकी सुविधा के अनुसार काटा जाना है, पर प्रबंधन ने अपने स्तर से निर्णय लेते हुए राशि कटौती आरंभ कर दी. जिन कर्मियों को पांच-दस हजार रुपये एरियर मद में मिलते, उन्हें भी राशि नहीं मिली. उन कर्मियों से मेडिकल क्लेम की शेष राशि वेतन से काटे जाने का फरमान सुना दिया गया.
कर्मियों का कहना है कि प्रबंधन ने सीआइएल के आदेश बगैर ही राशि की कटौती की है. यूनियन प्रतिनिधियों ने सीएमडी को पत्र लिखकर आपत्ति जतायी है. एचएमएस के महामंत्री नत्थूलाल पांडेय ने क्षेत्रीय पदाधिकारियों से कहा है कि प्रबंधन की इस कार्यप्रणाली का वे विरोध करें. उन श्रमिक संगठन की कारगुजारियों को भी उजागर करें, जो गलत ढंग से प्रचारित कर मजदूरों को भ्रमित कर रहे हैं.
स्टैंडर्डाजेशन कमेटी की बैठक में कोलकर्मियों के ओवरटाइम पर भी मंथन किया गया था. निर्णय लिया गया कि कोलकर्मियों को ओटी नहीं मिलाकर चार्ज एलाउंस प्रदान किया जायेगा. इससे कर्मियों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. इस संबंध में सर्कुलर भी जारी कर दिया गया है.
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