दुर्गापुर. सस्पेंस-सस्पेंस और सस्पेंस. दुर्गापुर नगर निगम की कहानी सस्पेंस फिल्म की तरह हो गयी है. शुरु आत से ही सस्पेंस बरकरार बना हुआ है.
लेकिन अब नागरिकों की चिंता बढ़ने लगी है. उन्हें लगता है कि नगर निगम बोर्ड गठन तक यह हाल है तो आगे के पांच साल कैसे कटेंगे? नगर निगम के स्तर से विकास कैसे होगा? सनद रहे कि नगर निगम के सभी 43 वार्डो पर तृणमूल का कब्जा है. बोर्ड में एक भी विपक्ष के सदस्य नहीं हैं.
गौरतलब है कि नगर निगम बोर्ड के सस्पेंस की कहानी तृणमूल ने चुनाव के पहले दिन से शुरू की थी. सबसे पहले उम्मीदवारों के चयन को लेकर सस्पेंस बना रहा. तृणमूल के स्थानीय नेताओं तक को गतिविधियों की सही जानकारी नहीं मिल रही है.इसके चुनाव से लेकर बोर्ड गठन तक में दुर्गापुर के नेताओ की भूमिका कुछ खास नहीं है.
पूरा जिम्मा आसनसोल के नेताओं की टीम का रहा था, जो सीधे कोलकाता मुख्यालय को रिपोर्ट करती है. पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में घोषणआ की गयी थी कि मेयर परिषद के विभाग बंटवारे की जिम्मेदारी मेयर दिलीप अगस्ती को सौंपी गई है, जो उप मेयर और चेयरमैन सहित साथी पार्षदों के साथ सलाह कर जल्द ही विभाग का बंटबारा कर देगे. परन्तु शपथ ग्रहण समारोह के एक सप्ताह बीतने के बाद भी इस पर सस्पेंस बना हुआ है.
पार्टी की अंदरूनी कलह अधिक
पार्टी की अंदरूनी कलह कुछ अधिक ही है. मेयर परिषद में जगह नहीं मिलने से नाराज कई पार्षदों ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष इस्तीफा तक देने की पेशकश की. मेयर परिषद् के विभाग में सबसे अधिक महत्व पीडब्ल्यूडी तथा जल विभाग का है. इन दो विभागों को लेकर ही मुख्य गतिरोध बना हुआ है. पूर्ववर्त्ती बोर्ड में पीडब्ल्यूडी विभाग प्रभात चटर्जी के पास था. जबकि जल विभाग उपमेयर अमिताभ बनर्जी के जिम्मे था. इस बार भी दोनों इस विभाग के प्रबल दाबेदार माने जा रहे है. परन्तु अन्य कई पार्षदों की भी नजर इन विभागों पर टिकी है.
हालाकि इस मामले में कोई भी मेयर परिषद सदस्य मुंह नहीं खोल रहा है. विभागों का बंटबारा कोलकाता के निर्देश पर पूरी तरह टिका हुआ है. मंगलवार को दुर्गापुर के पार्टी नेता कोलकाता दरबार में हाजिर हुए थे. परन्तु पार्टी के जिला पर्यवेक्षक तथा मंत्नी अरूप विश्वास की व्यस्तता के कारण विभाग का फैसला अटक गया. पार्टी की ओर से एक बार फिर बुधबार को विभाग के बंटबारे की बात कही गई है.
