सालों से फंसा फांसी पर फैसला

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।। विकास गुप्ता ।। राज्य में मौत की सजा प्राप्त सात कैदी कर रहे रहम का इंतजार कोलकाता : पिछले दिनों राजीव गांधी के हत्यारों की फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने यह कह कर उम्र कैद में बदल दी थी कि राष्ट्रपति के पास हत्यारों की दया याचिका का 11 साल बाद भी निराकरण […]

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।। विकास गुप्ता ।।

राज्य में मौत की सजा प्राप्त सात कैदी कर रहे रहम का इंतजार

कोलकाता : पिछले दिनों राजीव गांधी के हत्यारों की फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने यह कह कर उम्र कैद में बदल दी थी कि राष्ट्रपति के पास हत्यारों की दया याचिका का 11 साल बाद भी निराकरण नहीं होना अमानवीय है. शीर्ष अदालत ने कहा था कि सजा पर फैसले के इंतजार में कैदी मानसिक रोगी हो जाते हैं.

राज्य के जेलों में भी सात कैदी ऐसे हैं, जो फांसी की सजा मिलने के बाद उसे उम्रकैद में बदलने की अर्जी देकर वर्षो से जेल में उस पर फैसले का इंतजार कर रहे हैं. हत्या, हत्या की साजिश में शामिल होने व अपराधिक मामलों में दोषी पाते हुए निचली अदालतों ने उन्हें फांसी की सजा सुनायी थी. सजा के खिलाफ कुछ ने तुरंत व कुछ ने कुछ दिन बाद ऊपरी अदालत में फांसी की सजा को उम्र कैद में बदलने की अर्जी दी थी, लेकिन अदालतों में कानूनी दावं पेंच में फंस कर सालों से फैसला लटका हुआ है.

इनमें से कुछ कैदी सात साल से तो कुछ नौ सालों से मौत या जिंदगी मिलने के इंतजार में पल-पल गुजार रहे हैं. राज्य के एडीजी (कारागार) अधीर शर्मा बताते हैं कि ये सातों कैदी महानगर व महानगर से सटे अन्य जेलों में बंद हैं. इनमें से अमेरिकन सेंटर पर हमले के दोषी आफताब अंसारी का फांसी को उम्रकैद में बदलने का आवेदन सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जबकि अन्य छह कैदी का आवेदन कलकत्ता हाइकोर्ट में लंबित पड़ा हुआ है.

जेल सूत्रों के मुताबिक, सातों कैदियों में एक अलीपुर प्रेसिडेंसी जेल में है, जबकि तीन कैदी अलीपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. वहीं बहरमपुर जेल में बाकी के तीन कैदी अपना दिन काट रहे हैं.

ज्ञात हो कि महानगर में अंतिम बार एक स्कूली छात्र के साथ दुष्कर्म व कत्ल के आरोपी धनंजय चटर्जी को 2004 के 14 अगस्त को अंतिम बार फांसी की सजा सुनायी गयी थी, जिसके बाद से महानगर में अब तक एक भी फांसी की सजा पाने वाले कैदी को फांसी पर लटकाया नहीं जा सका.

तब से लेकर अब तक कुछ कैदियों की फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील हो गयी और कुछ को अब तक अदालत के निर्देश का इंतजार करना पड़ रहा है. धनंजय को फांसी की सजा सुनाये जाने के करीब 14 सालों बाद फांसी पर लटकाया गया था. लंबे इंतजार के बाद उसे फांसी दिये का कुछ लोगों ने विरोध किया था.

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