सुंदरबन में ‘जुगाड़‘ वैनों की जगह लेंगे सौर वाहन
कोलकाता : पर्यावरणीय लिहाज से बेहद कोमल सुंदरबन द्वीपों को ‘जुगाड़’ वैनों से पैदा होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचाने के लिए एक वैकल्पिक सार्वजनिक यातायात मॉडल तैयार किया जा रहा है. अब जुगाड़ की जगह सौर उर्जा वाले इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग किया जाएगा. शोध संस्था टेरी :द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट: […]
कोलकाता : पर्यावरणीय लिहाज से बेहद कोमल सुंदरबन द्वीपों को ‘जुगाड़’ वैनों से पैदा होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचाने के लिए एक वैकल्पिक सार्वजनिक यातायात मॉडल तैयार किया जा रहा है. अब जुगाड़ की जगह सौर उर्जा वाले इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग किया जाएगा. शोध संस्था टेरी :द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट: और पेरिस की मेलिंडा फाउंडेशन ने यह नया मॉडल तैयार किया है. इसके तहत सुंदरबन के पत्थरप्रतिम ब्लॉक में जल्दी ही पश्चिम बंगाल अक्षय उर्जा विकास एजेंसी की सहमति से 50 सौर वाहनों को लाया जाएगा.
अब तक मोटर से चलने वाले रिक्शा वैन ही सुंदरबन डेल्टा में रहने वाले 40 लाख लोगों के लिए सार्वजनिक यातायात का साधन हैं. यूनेस्को का यह वैश्विक धरोहर स्थल कोलकाता से तीन घंटे की दूरी पर है. कामचलाउ प्रबंध वाली, ‘जुगाड’ तकनीक वाले ये वाहन डीजल इंजन से चलते हैं. इसमें डीजल, केरोसीन, नेफ्था, इंजन ऑयल आदि के मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता है. इस मिश्रण से बेहद प्रदूषक उत्सजर्न होता है. परियोजना के तहत टेरी टाटा मोटर्स द्वारा बनाए गए 50 सौर वाहनों को लाएगा. इसके साथ ही सुंदरबन में दो चार्जिंग स्टेशन भी लगाए जाएंगे.
टेरी की परिमीता मोहंती ने बताया, ‘‘इन इलेक्ट्रिक रिक्शों में आठ लोग बैठ सकते हैं. स्टेशन पर चार से पांच घंटे तक सौर उर्जा से चार्ज होने के बाद ये रिक्शे एक दिन में 40 से 50 किलोमीटर तक चल सकते हैं.’’ इस परियोजना के प्रथम चरण में इसके सफल प्रदर्शन के बाद टेरी सुंदरबन में इस मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए सामाजिक उद्यमियों को शामिल करेगी. मोहंती ने कहा, ‘‘हम इस मॉडल को व्यवसायिक रुप से उपयुक्त बनाना चाहते हैं क्योंकि हम रिक्शा चालकों से इन्हें खरीदने के लिए कहेंगे.’’ सौर वाहनों से न तो कोई हानिकारक उत्सजर्न होगा, न ही शोर होगा.
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