सीएसटीसी के पुनर्विकास में जुटी सरकार

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कोलकाता: आर्थिक मंदी से जूझ से रही परिवहन निगमों के पुनर्विकास के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. राज्य सरकार ने सबसे पहले कलकत्ता स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (सीएसटीसी) को फिर से लाभ अजिर्त करनेवाली परिवहन कंपनी बनाना चाहती है. इसके लिए राज्य सरकार ने अप्रैल 2014 से सीएसटीसी के अंतर्गत 1000 बस […]

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कोलकाता: आर्थिक मंदी से जूझ से रही परिवहन निगमों के पुनर्विकास के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. राज्य सरकार ने सबसे पहले कलकत्ता स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (सीएसटीसी) को फिर से लाभ अजिर्त करनेवाली परिवहन कंपनी बनाना चाहती है. इसके लिए राज्य सरकार ने अप्रैल 2014 से सीएसटीसी के अंतर्गत 1000 बस चलाने का फैसला किया है, इसमें से 632 नयी होंगी और 200 एसी बस रास्ते पर उतारी जायेंगी. वर्तमान समय में सीएसटीसी के अंतर्गत दो शिफ्ट में 400 बस चलायी जाती हैं, और यह रोजाना 20 लाख रुपये की आमदनी करती है.

राज्य सरकार ने इस आमदनी को 50 लाख करने का लक्ष्य रखा है. गौरतलब है कि राज्य के तीन परिवहन निगम सीएसटीसी, दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम व उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम को जेएनएनयूआरएम के तहत 826 नयी बस मिल रही हैं. इनमें से 100 बस एसबीएसटीसी व 94 बस एनबीएसटीसी को दी जायेंगी.

इस संबंध में सीएसटीसी के प्रबंध निदेशक ने दावा किया कि बसों की संख्या बढ़ने के बाद कंपनी के आमदनी में भी वृद्धि होगी. वर्तमान समय में 400 बसों से रोजाना 20 लाख रुपये की आमदनी हो रही है. बसों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ चालकों की संख्या भी बढ़ायी जायेगी.

इसके लिए प्रबंधन द्वारा ठेका के आधार पर 2000 चालकों की नियुक्ति की जायेगी. इस संबंध में प्रबंधन द्वारा राज्य के परिवहन विभाग के पास प्रस्ताव भेज दिया गया है और परिवहन विभाग ने इसे मंजूरी के लिए वित्त विभाग कों सौंप दिया है. इन 2000 नयी नियुक्तियों में 1000 चालक व 1000 कंडक्टर होंगे. उन्होंने बताया कि राज्य की कई कॉरपोरेट कंपनियों ने सीएसटीसी के साथ समझौता किया है और यह अपने कर्मचारियों के लिए इन बसों का प्रयोग करेगी. उन्होंने बताया कि सीएसटीसी के अंतर्गत कुल 755 बस हैं, इनमें से 400 बस ही चलाने के कंडिशन में है. बाकी 355 बसों का मरम्मत करना होगा.

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